सूरत में हजारों लोगों ने साइकिल चलाकर पहुंचे इंदौर स्टेडियम, PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर अमल
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के सूरत में 5 जून 2026 को इंदौर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए हजारों नागरिक साढ़े पाँच किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर पहुंचे। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इसे प्रधानमंत्री की ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील के प्रति जनता की सहज प्रतिक्रिया बताया।
मुख्य घटनाक्रम
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और छोटी दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने की अपील की थी। इस अपील पर अमल करते हुए सूरत के हजारों नागरिक तेज धूप में साइकिल लेकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। संघवी के अनुसार, इनमें कई ऐसे लोग भी थे जिन्होंने वर्षों से साइकिल नहीं चलाई थी।
संघवी के साथ अनेक विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधि भी साइकिल यात्रा के जरिए कार्यक्रम स्थल पहुंचे। केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने पैदल चलकर कार्यक्रम में भागीदारी की।
जनभागीदारी का स्वरूप
संघवी ने बताया कि कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी केवल साइकिल यात्रा तक सीमित नहीं रही। कई परिवारों ने घर पर बैठकर प्रधानमंत्री के लिए संदेश लिखे और प्लेकार्ड तैयार किए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उनके अनुसार, 15,000 से अधिक प्लेकार्ड कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ईंधन की बढ़ती कीमतों और शहरी वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा तेज है। गौरतलब है कि साइकिल संस्कृति को पुनर्जीवित करने की यह कोशिश पर्यावरण दिवस के आसपास और अधिक प्रतीकात्मक हो जाती है।
संघवी का बयान
हर्ष संघवी ने कहा, 'जब प्रधानमंत्री मोदी कोई अपील करते हैं तो देश के लोग उसे केवल सुनते ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने का भी प्रयास करते हैं।' उन्होंने इसे देश की राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ दृश्य बताया, जब किसी नेता की अपील पर इतने बड़े स्तर पर जनता एकजुट होकर आगे आई हो।
उन्होंने एक उपमुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि देश के कोने-कोने में पीएम के प्रति वही उत्साह और विश्वास बरकरार है।
आम जनता पर असर
इस आयोजन ने सूरत में साइकिल संस्कृति को नई ऊर्जा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की जन-पहल नियमित रूप से हो, तो शहरी यातायात में निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सकती है और ईंधन आयात बिल में भी बचत संभव है। आगे देखना होगा कि क्या यह उत्साह एक दिन के आयोजन से आगे बढ़कर दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में बदल पाता है।