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सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में RFID सुरक्षा प्रणाली लागू, NICU से नवजात चोरी रोकने की पहल

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सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में RFID सुरक्षा प्रणाली लागू, NICU से नवजात चोरी रोकने की पहल

सारांश

सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल ने NICU में RFID आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की है — हर नवजात की कलाई पर टैग, बिना अनुमति बाहर जाने पर तत्काल अलार्म। पूर्व में शिशु चोरी की घटनाओं के बाद उठाया यह कदम सरकारी अस्पतालों में तकनीकी सुरक्षा की नई मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल ने NICU में RFID आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की, जो नवजात शिशुओं की अनधिकृत आवाजाही पर तत्काल अलार्म बजाती है।
प्रत्येक भर्ती शिशु की कलाई पर इलेक्ट्रॉनिक RFID टैग लगाया जाता है; निकास द्वार पर मशीन स्थापित है।
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ.
लक्ष्मण के अनुसार, अस्पताल में पहले भी शिशु चोरी की घटना हो चुकी है।
MRI/CT स्कैन जैसे मेडिकल ट्रांसफर के दौरान भी सुरक्षाकर्मियों से पुष्टि अनिवार्य की गई है।
अस्पताल में 42 बेड की स्वीकृति के बावजूद 60 बेड संचालित; दक्षिण गुजरात व महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीज़ भी यहाँ आते हैं।
NICU के लिए 24×7 समर्पित टीम तैनात है।

सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल ने 7 जुलाई 2025 को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती शिशुओं की सुरक्षा के लिए रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित सुरक्षा प्रणाली सक्रिय की है। इस तकनीक के तहत प्रत्येक नवजात शिशु की कलाई पर एक इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाया जाता है, और बिना अनुमति NICU से बाहर जाने पर निकास द्वार पर लगी RFID मशीन तत्काल सुरक्षा अलार्म बजाती है। अस्पताल में पूर्व में शिशु चोरी की घटनाएँ घट चुकी हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

RFID प्रणाली कैसे काम करती है

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मण के अनुसार, NICU के बाहर RFID मशीन स्थापित की गई है। NICU में भर्ती प्रत्येक बच्चे की कलाई पर एक विशेष टैग बाँधा जाता है। यदि कोई भी व्यक्ति — चाहे परिजन हो या अन्य — बच्चे को बिना सूचना के बाहर ले जाने का प्रयास करे, तो निकास द्वार पर लगा बजर तुरंत सक्रिय हो जाता है और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा व सेवा कर्मचारी अलर्ट मोड में आ जाते हैं।

डॉ. लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में पहले भी शिशु चोरी की घटना हो चुकी है, इसीलिए यह तकनीकी समाधान अपनाया गया है।

मेडिकल ट्रांसफर के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल

बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक डॉ. जिगिशा पाटड़िया ने बताया कि कई बार बच्चों को MRI या CT स्कैन के लिए NICU से बाहर ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में संबंधित डॉक्टर को पहले बच्चे की पूरी जानकारी सुरक्षा कर्मचारियों के साथ साझा करनी होगी।

बजर बजने पर सुरक्षाकर्मी बच्चे के साथ मौजूद डॉक्टर से पहचान की पुष्टि करेंगे, उसके बाद ही बच्चे को जाँच के लिए ले जाने की अनुमति दी जाएगी। डॉ. पाटड़िया के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में NICU में भर्ती कोई भी बच्चा अस्पताल स्टाफ या सुरक्षाकर्मियों की नज़र से ओझल नहीं हो सकता।

अस्पताल की क्षमता और सेवा क्षेत्र

डॉ. जिगिशा पाटड़िया ने बताया कि न्यू सिविल हॉस्पिटल में केवल सूरत ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण गुजरात और गुजरात से सटे महाराष्ट्र के क्षेत्रों से भी मरीज़ रेफर होकर आते हैं। अस्पताल में आधिकारिक रूप से 42 बेड की स्वीकृति है, परंतु बाहर से रेफर होने वाले शिशुओं की संख्या को देखते हुए वास्तव में 60 बेड की व्यवस्था संचालित की जाती है।

NICU के लिए एक समर्पित टीम 24×7 शिशुओं के उपचार और देखरेख में तैनात रहती है।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

चिकित्सकों का कहना है कि RFID तकनीक अपनाने से न केवल अनधिकृत आवाजाही पर रोक लगेगी, बल्कि मेडिकल ट्रांसफर के दौरान भी शिशुओं की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में शिशु चोरी की घटनाएँ सामने आती रही हैं, और सूरत का यह कदम सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे में तकनीकी सुरक्षा उपायों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है। यह प्रणाली अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि सरकारी अस्पतालों में तकनीकी सुरक्षा के लिए शिशु चोरी की घटना का इंतज़ार क्यों करना पड़ता है। RFID प्रणाली तभी कारगर होगी जब सुरक्षाकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण मिले और मशीनों का रखरखाव सुनिश्चित हो — जो सरकारी ढाँचे की पुरानी कमज़ोरी रही है। देशभर के सरकारी अस्पतालों में ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं, फिर भी यह तकनीक अभी तक मुख्यधारा में नहीं आई। सूरत की यह पहल तभी मॉडल बनेगी जब राज्य सरकार इसे प्रदेश के सभी NICU तक विस्तारित करे।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में RFID सुरक्षा प्रणाली क्या है?
यह एक रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित तकनीक है जिसमें NICU में भर्ती प्रत्येक नवजात शिशु की कलाई पर इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाया जाता है। यदि कोई बच्चे को बिना अनुमति बाहर ले जाने का प्रयास करे, तो निकास द्वार पर लगी मशीन तुरंत सुरक्षा अलार्म बजाती है।
यह प्रणाली क्यों लागू की गई?
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मण के अनुसार, न्यू सिविल हॉस्पिटल में पहले भी शिशु चोरी की घटना हो चुकी है। उन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए RFID प्रणाली स्थापित की गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
MRI या CT स्कैन के लिए बच्चे को बाहर ले जाने पर क्या प्रक्रिया होगी?
डॉ. जिगिशा पाटड़िया के अनुसार, जाँच के लिए बाहर जाने से पहले संबंधित डॉक्टर को बच्चे की पूरी जानकारी सुरक्षाकर्मियों के साथ साझा करनी होगी। बजर बजने पर डॉक्टर सुरक्षाकर्मियों से पहचान की पुष्टि करेगा, उसके बाद ही बच्चे को जाँच के लिए ले जाया जाएगा।
न्यू सिविल हॉस्पिटल के NICU में कितने बेड हैं और कहाँ-कहाँ से मरीज़ आते हैं?
अस्पताल में आधिकारिक रूप से 42 बेड की स्वीकृति है, लेकिन वास्तव में 60 बेड संचालित किए जाते हैं। यहाँ सूरत के अलावा समूचे दक्षिण गुजरात और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी मरीज़ रेफर होकर आते हैं।
क्या यह प्रणाली अन्य गुजरात सरकारी अस्पतालों में भी लागू होगी?
फिलहाल यह प्रणाली केवल सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल के NICU में लागू की गई है। अन्य अस्पतालों में विस्तार को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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