सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में RFID सुरक्षा प्रणाली लागू, NICU से नवजात चोरी रोकने की पहल
सारांश
मुख्य बातें
सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल ने 7 जुलाई 2025 को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती शिशुओं की सुरक्षा के लिए रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित सुरक्षा प्रणाली सक्रिय की है। इस तकनीक के तहत प्रत्येक नवजात शिशु की कलाई पर एक इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाया जाता है, और बिना अनुमति NICU से बाहर जाने पर निकास द्वार पर लगी RFID मशीन तत्काल सुरक्षा अलार्म बजाती है। अस्पताल में पूर्व में शिशु चोरी की घटनाएँ घट चुकी हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
RFID प्रणाली कैसे काम करती है
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मण के अनुसार, NICU के बाहर RFID मशीन स्थापित की गई है। NICU में भर्ती प्रत्येक बच्चे की कलाई पर एक विशेष टैग बाँधा जाता है। यदि कोई भी व्यक्ति — चाहे परिजन हो या अन्य — बच्चे को बिना सूचना के बाहर ले जाने का प्रयास करे, तो निकास द्वार पर लगा बजर तुरंत सक्रिय हो जाता है और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा व सेवा कर्मचारी अलर्ट मोड में आ जाते हैं।
डॉ. लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में पहले भी शिशु चोरी की घटना हो चुकी है, इसीलिए यह तकनीकी समाधान अपनाया गया है।
मेडिकल ट्रांसफर के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल
बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक डॉ. जिगिशा पाटड़िया ने बताया कि कई बार बच्चों को MRI या CT स्कैन के लिए NICU से बाहर ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में संबंधित डॉक्टर को पहले बच्चे की पूरी जानकारी सुरक्षा कर्मचारियों के साथ साझा करनी होगी।
बजर बजने पर सुरक्षाकर्मी बच्चे के साथ मौजूद डॉक्टर से पहचान की पुष्टि करेंगे, उसके बाद ही बच्चे को जाँच के लिए ले जाने की अनुमति दी जाएगी। डॉ. पाटड़िया के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में NICU में भर्ती कोई भी बच्चा अस्पताल स्टाफ या सुरक्षाकर्मियों की नज़र से ओझल नहीं हो सकता।
अस्पताल की क्षमता और सेवा क्षेत्र
डॉ. जिगिशा पाटड़िया ने बताया कि न्यू सिविल हॉस्पिटल में केवल सूरत ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण गुजरात और गुजरात से सटे महाराष्ट्र के क्षेत्रों से भी मरीज़ रेफर होकर आते हैं। अस्पताल में आधिकारिक रूप से 42 बेड की स्वीकृति है, परंतु बाहर से रेफर होने वाले शिशुओं की संख्या को देखते हुए वास्तव में 60 बेड की व्यवस्था संचालित की जाती है।
NICU के लिए एक समर्पित टीम 24×7 शिशुओं के उपचार और देखरेख में तैनात रहती है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
चिकित्सकों का कहना है कि RFID तकनीक अपनाने से न केवल अनधिकृत आवाजाही पर रोक लगेगी, बल्कि मेडिकल ट्रांसफर के दौरान भी शिशुओं की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में शिशु चोरी की घटनाएँ सामने आती रही हैं, और सूरत का यह कदम सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे में तकनीकी सुरक्षा उपायों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है। यह प्रणाली अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए एक मॉडल बन सकती है।