14 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल के नए एडवोकेट जनरल बने सुरोजित नाथ मित्रा, किशोर दत्ता के इस्तीफे के बाद नियुक्ति

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पश्चिम बंगाल के नए एडवोकेट जनरल बने सुरोजित नाथ मित्रा, किशोर दत्ता के इस्तीफे के बाद नियुक्ति

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद कानूनी मोर्चे पर बड़ा बदलाव — राज्यपाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा को नया महाधिवक्ता नियुक्त किया। किशोर दत्ता के नाटकीय इस्तीफे और TMC के 15 वर्षों में तीसरे एडवोकेट जनरल की नियुक्ति राज्य की कानूनी व्यवस्था में उथल-पुथल की कहानी कहती है।

मुख्य बातें

सुरोजित नाथ मित्रा को 29 मई 2026 को पश्चिम बंगाल का नया एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया।
नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा की गई; न्यायिक विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
मित्रा 1983 से वकालत कर रहे हैं और दीवानी व वाणिज्यिक कानून में विशेषज्ञ हैं।
पूर्ववर्ती किशोर दत्ता ने 5 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम के एक दिन बाद इस्तीफा दिया था।
TMC के 15 वर्षों के शासनकाल में यह पद तीसरी बार बदला; सौमेंद्रनाथ मुखर्जी भी बीच में एडवोकेट जनरल रहे।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा को पश्चिम बंगाल का नया महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) नियुक्त किया है। राज्य के न्यायिक विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में 29 मई 2026 को इस नियुक्ति की पुष्टि की गई। मित्रा ने किशोर दत्ता का स्थान लिया है, जिन्होंने 5 मई को विधानसभा चुनाव परिणामों के एक दिन बाद पद से इस्तीफा दे दिया था।

कौन हैं सुरोजित नाथ मित्रा

सुरोजित नाथ मित्रा वर्ष 1983 से वकालत के पेशे में हैं और उनका कार्यकाल चार दशकों से अधिक का है। उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः दीवानी और वाणिज्यिक कानून में रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट में उनकी लंबी और सम्मानित उपस्थिति ने उन्हें राज्य सरकार की कानूनी जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त माना जाने वाला नाम बनाया।

किशोर दत्ता का उतार-चढ़ाव भरा कार्यकाल

निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वासपात्र माने जाने वाले किशोर दत्ता को 2011 से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासनकाल में दो बार एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया था। पहली बार उन्हें 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की स्थिति कमजोर पड़ने पर पद छोड़ना पड़ा था।

इसके बाद सौमेंद्रनाथ मुखर्जी ने एडवोकेट जनरल का कार्यभार संभाला, किंतु नवंबर 2023 में उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद दत्ता को दूसरी बार इस पद पर नियुक्त किया गया। इस प्रकार राज्य के एडवोकेट जनरल के पद पर एक दशक में कई बदलाव देखे गए।

इस्तीफे का राजनीतिक संदर्भ

5 मई को दत्ता के इस्तीफे का समय उस घटनाक्रम के साथ मेल खाता है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधि प्रकोष्ठ के अधिवक्ताओं ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल से संपर्क कर नए राज्य मंत्रिमंडल के गठन तक राज्य से संबंधित मामलों में फैसलों और आदेशों पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। राजनीतिक और कानूनी दबाव के इस संयोग ने दत्ता के त्यागपत्र को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया।

आगे की राह

नई राज्य सरकार के गठन के बाद सुरोजित नाथ मित्रा की नियुक्ति को प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके समक्ष चुनाव-पश्चात विवादों, लंबित न्यायिक मामलों और राज्य सरकार की कानूनी स्थिति को मजबूत करने की चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है। मित्रा के सामने चुनाव-पश्चात मामलों का बोझ होगा और साथ ही यह साबित करने की जिम्मेदारी भी कि महाधिवक्ता का पद राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र रह सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरोजित नाथ मित्रा को पश्चिम बंगाल का एडवोकेट जनरल क्यों नियुक्त किया गया?
किशोर दत्ता के 5 मई 2026 को इस्तीफे के बाद रिक्त हुए पद पर राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत सुरोजित नाथ मित्रा को नियुक्त किया। मित्रा कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और 1983 से दीवानी व वाणिज्यिक कानून में विशेषज्ञता रखते हैं।
किशोर दत्ता ने एडवोकेट जनरल पद से इस्तीफा क्यों दिया?
किशोर दत्ता ने 5 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद इस्तीफा दिया। यह इस्तीफा उस समय आया जब BJP के विधि प्रकोष्ठ के अधिवक्ताओं ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से नए मंत्रिमंडल के गठन तक राज्य मामलों में आदेशों पर रोक की माँग की थी।
TMC शासनकाल में पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल कितनी बार बदले?
2011 से TMC के 15 वर्षों के शासनकाल में यह पद तीन बार बदला। किशोर दत्ता दो बार इस पद पर रहे, जबकि बीच में नवंबर 2023 तक सौमेंद्रनाथ मुखर्जी ने कार्यभार संभाला था।
एडवोकेट जनरल की नियुक्ति किस संवैधानिक प्रावधान के तहत होती है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के खंड (1) के तहत राज्यपाल किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को राज्य का महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) नियुक्त करते हैं। पश्चिम बंगाल के न्यायिक विभाग के प्रधान सचिव ने इस नियुक्ति की अधिसूचना जारी की।
सुरोजित नाथ मित्रा के सामने क्या प्रमुख चुनौतियाँ हैं?
मित्रा के समक्ष चुनाव-पश्चात हिंसा और विवादों से जुड़े लंबित न्यायिक मामलों को संभालने की तत्काल चुनौती है। इसके साथ ही नई राज्य सरकार की कानूनी स्थिति को मजबूत करना और राजनीतिक दबाव के बीच पद की स्वायत्तता बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकता होगी।
राष्ट्र प्रेस
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