मद्रास हाई कोर्ट में तमिलनाडु सरकार ने नियुक्त किए 17 अस्थायी वकील, महाधिवक्ता की सिफारिश पर हुई नियुक्ति
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट और उसकी मदुरै बेंच में सिविल मामलों की पैरवी के लिए 17 अस्थायी वकीलों की नियुक्ति की है। ये नियुक्तियाँ तमिलनाडु के महाधिवक्ता की सिफारिश पर 'मद्रास हाई कोर्ट और उसकी मदुरै बेंच के विधि अधिकारियों (नियुक्ति) नियम, 2017' के नियम 5(11) के अंतर्गत की गई हैं। सभी नियुक्त वकील तत्काल प्रभाव से अपने दायित्व संभालेंगे।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
सरकारी आदेश के अनुसार, ये अस्थायी नियुक्तियाँ तब तक प्रभावी रहेंगी जब तक नियमित विधि अधिकारियों का चयन पूरा नहीं हो जाता। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया नियमों के अनुसार जारी है और चयन पूर्ण होते ही स्थायी नियुक्तियाँ की जाएंगी। इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया को बाधारहित बनाए रखना है।
मद्रास हाई कोर्ट — स्टेट गवर्नमेंट प्लीडर कार्यालय
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, मद्रास हाई कोर्ट के 'स्टेट गवर्नमेंट प्लीडर' कार्यालय से संबद्ध 9 अस्थायी वकीलों के नाम इस प्रकार हैं — डॉ. आर. गौरी, जी. धना माधुरी, मोहम्मद फैयाज अली, एम. शिववर्धनन, एम. गुरुप्रसाद, अमृतपूनकोडी दिनाकरन, के. सतीश, के. सुरेंद्र और डोमिनिक एस. डेविड। ये सभी विभिन्न सिविल मामलों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करेंगे।
मदुरै बेंच — गवर्नमेंट प्लीडर कार्यालय
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के 'गवर्नमेंट प्लीडर' कार्यालय से संबद्ध 8 अस्थायी वकीलों में आर. चक्रवर्ती, बी. सरवनन, एम.पी. सेंथिल, आर. पार्थिबन, आई. पिनायगाश, एस. शिवसुब्रमण्यम, एस. शिव थिलाकर और के. पोरकोडी शामिल हैं। ये वकील मदुरै बेंच में लंबित सरकारी मामलों की पैरवी का दायित्व संभालेंगे।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इन अस्थायी नियुक्तियों से राज्य सरकार को अदालतों में अपने मामलों की सुनवाई में सहूलियत मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी। गौरतलब है कि उच्च न्यायालयों में सरकारी पक्ष की पैरवी के लिए विधि अधिकारियों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है, और रिक्तियों की स्थिति में अस्थायी व्यवस्था एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि 2017 के नियमों के तहत नियमित विधि अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है। चयन पूर्ण होते ही इन अस्थायी व्यवस्थाओं को नियमित नियुक्तियों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। तब तक, नियुक्त सभी 17 वकील अपने-अपने न्यायालय कार्यालयों के अधीन कार्यरत रहेंगे।