तमिलनाडु के 90 जलाशयों में मात्र 33.7% क्षमता, मानसून के बाद भी जल संकट बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के 90 जलाशयों में कुल जल भंडारण उनकी संयुक्त क्षमता के मात्र 33.7 प्रतिशत पर बना हुआ है — यह स्थिति 3 नवंबर 2026 को तब भी बनी है जब पूर्वोत्तर मानसून पूरे राज्य में सक्रिय है। जल संसाधन विभाग के आँकड़ों के अनुसार राज्य के जलाशयों में अभी केवल 75.7 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) जल संचित है, जो आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।
जलाशयों की स्थिति: असमान तस्वीर
विभाग के आँकड़ों के अनुसार राज्य के 90 जलाशयों में से केवल तीन अपनी पूरी क्षमता पर भरे हुए हैं। वहीं 43 जलाशयों में 25 प्रतिशत से भी कम पानी शेष है और 24 जलाशयों में जल स्तर 50 प्रतिशत से नीचे है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि मानसूनी बारिश का लाभ अभी तक समग्र रूप से भंडारण में नहीं दिखा है।
हालांकि कुछ जलाशयों में उत्साहजनक स्थिति भी है। तेनकासी का गुंडर, कन्याकुमारी का मंबाझथुरैयार, थेनी का सोथुपराई, विरुधुनगर का सास्था कोइल और कुल्लुरसंडई, तथा डिंडीगुल का वरधमनाधी जलाशय — इन सभी में भंडारण 95 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसी तरह कोयंबटूर के पेरुवरिपल्लम जलाशय में भी 95 प्रतिशत से अधिक जल भंडारण दर्ज किया गया है।
मुख्य कारण: सूखी तलहटी और 'अल नीनो' का असर
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस स्थिति के पीछे प्रमुख कारण लंबे समय तक बना रहा सूखा मौसम और भीषण गर्मी है, जिसने जलाशयों की तलहटी को पूरी तरह सुखा दिया। 'डैम प्रोटेक्शन मूवमेंट' के एक अधिकारी के अनुसार 'अल नीनो' मौसमी घटना के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में औसत से कम वर्षा हुई, जिससे कई जलाशयों में जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज हुई।
गौरतलब है कि भंडारण घटने से जलाशयों की तलहटी का बड़ा हिस्सा खाली दिखने लगा और उच्च तापमान के कारण वहाँ जमी गाद व मिट्टी में गहरी दरारें पड़ गई हैं। इस अधिकारी ने समझाया कि अभी जो बारिश हो रही है उसे यही सूखी तलहटी तेज़ी से सोख रही है, इसलिए जल भंडारण में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हो पा रही।
बारिश जारी, लेकिन राहत अभी दूर
पश्चिमी घाट से सटे जिलों में पिछले कुछ दिनों से पूर्वोत्तर मानसून की बारिश हो रही है और उत्तरी तमिलनाडु के व्यापक हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई है। फिर भी समग्र जल भंडारण में अभी तक कोई खास सुधार नहीं आया है। अधिकारियों ने बताया कि सतह पर पानी का ठोस भंडार जमा होने से पहले मिट्टी में नमी लौटाने और भूजल स्तर सुधारने के लिए लगातार और पर्याप्त वर्षा आवश्यक है।
आम जनता और कृषि पर असर
जलाशयों में जल भंडारण का यह असमान वितरण पूरे तमिलनाडु में जल संसाधनों को फिर से बहाल करने की चुनौती को उजागर करता है। कम जल स्तर से पेयजल आपूर्ति और रबी फसलों की सिंचाई — दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी से ज़मीनदोज़ पानी भी पहले से कम है।
आगे की निगरानी
पूर्वोत्तर मानसून के जारी रहने के बीच जल संसाधन विभाग के अधिकारी वर्षा के पैटर्न और जलाशयों में पानी की आवक पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं ताकि आकलन किया जा सके कि आने वाले हफ्तों में भंडारण स्तर में सुधार होगा या नहीं। यदि मानसून की तीव्रता बनी रही तो स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल राज्य के अधिकांश जलाशय चिंताजनक रूप से कम भरे हुए हैं।