तारा कोल ब्लॉक नीलामी पर भूपेश बघेल का साय सरकार से सवाल: दिसंबर 2025 का पत्र किसके दबाव में?
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 17 सितंबर 2026 को अंबिकापुर में मीडिया से बात करते हुए तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। बघेल ने माँग की कि साय सरकार यह स्पष्ट करे कि दिसंबर 2025 में तारा कोल ब्लॉक को पुनः नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को किस आधार और किसके दबाव में पत्र लिखा गया। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की भी माँग दोहराई।
हसदेव अरण्य और कोल ब्लॉक विवाद की पृष्ठभूमि
बघेल ने बताया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में हसदेव अरण्य क्षेत्र के घने जंगलों और आदिवासी समुदायों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने का आग्रह किया गया था। उनके अनुसार, तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में आए थे, जहाँ सभी अधिकारियों के साथ मिलकर यह आग्रह किया गया कि जंगल की रक्षा के लिए वहाँ खुदाई नहीं होनी चाहिए।
बघेल ने कहा कि उनकी माँग पर भारत सरकार ने 40 खदानों को डीनोटिफाई किया था और 2023 में राज्य सरकार के अनुरोध के बाद तारा सहित हसदेव क्षेत्र के कुछ कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब हसदेव अरण्य में खनन का मुद्दा राज्य में लंबे समय से पर्यावरणविदों और आदिवासी समूहों के विरोध का केंद्र रहा है।
साय सरकार पर सीधा निशाना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर निशाना साधते हुए बघेल ने कहा, 'अब सवाल ये उठता है कि विष्णु देव साय जो अपने आप को आदिवासियों का नेता कहते हैं, आदिवासी समाज से आते हैं और आदिवासी हमेशा जंगल की रक्षा किए हैं, तो आप उसके विनाशक कैसे बन गए?' उन्होंने सवाल किया कि दिसंबर 2025 में तारा कोल ब्लॉक को दोबारा नीलामी में शामिल करने के लिए केंद्र को जो पत्र भेजा गया, उसका आधार क्या था।
गौरतलब है कि विष्णु देव साय स्वयं आदिवासी समुदाय से आते हैं और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) आदिवासी हितों की पैरोकारी का दावा करती है। ऐसे में बघेल का यह हमला राजनीतिक रूप से सुचिंतित प्रतीत होता है।
CGPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
तारा कोल ब्लॉक के अलावा बघेल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि 2024 की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में सही और गलत उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थियों को समान अंक दिए जाने का मामला सामने आया है। बघेल ने कहा कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबंधित उत्तर पुस्तिकाएँ मीडिया के सामने रखी थीं और इंटरव्यू रोकने की माँग की थी।
उनके अनुसार, इंटरव्यू को तो स्थगित कर दिया गया है, लेकिन अब तक जाँच के कोई आदेश नहीं दिए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि जाँच के बिना महज स्थगन से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल नहीं होगी।
आम जनता और आदिवासी समुदाय पर असर
हसदेव अरण्य क्षेत्र में हज़ारों आदिवासी परिवार निवास करते हैं और उनकी आजीविका वन संसाधनों पर निर्भर है। खनन गतिविधियों से जंगल, सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभाव लंबे समय से चर्चा में हैं। वहीं CGPSC भर्ती विवाद से राज्य के उन हज़ारों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता दिख रहा है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से परीक्षा दी।
आगे क्या होगा
साय सरकार की ओर से अभी तक बघेल के सवालों का कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, तारा कोल ब्लॉक और CGPSC — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में विधानसभा और सड़क — दोनों मोर्चों पर गरमा सकते हैं। बघेल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कांग्रेस इन दोनों मुद्दों पर दबाव जारी रखेगी।