पीएम मोदी की माफी और छात्रों पर कार्रवाई एक साथ क्यों? कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का सीधा सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने 1 अगस्त को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश पर तीखा सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही थी। अनवर ने पूछा कि जब प्रधानमंत्री माफी की बात कर रहे हैं, तो प्रशासन उन्हीं छात्रों के घरों पर छापेमारी और गिरफ्तारियाँ क्यों कर रहा है।
दोहरी नीति का आरोप
अनवर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दोहरी नीति अपनाने का सीधा आरोप लगाया। उनका कहना था कि एक ओर प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से क्षमा की बात करते हैं, दूसरी ओर प्रशासन छात्रों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रधानमंत्री वास्तव में माफी देना चाहते हैं, तो उनके निर्देश पर किसी भी छात्र के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।
सिवान में एके-47 फायरिंग की जाँच
बिहार के सिवान जिले में प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से कथित फायरिंग के मामले में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के जाने पर अनवर ने कहा, "फैक्ट फाइंडिंग कमेटी इसलिए भेजी गई है ताकि सच्चाई सामने आ सके। सरकार लगातार इनकार कर रही है कि एके-47 का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसलिए मौके पर जाकर यह कमेटी मामले की सच्चाई देखेगी और जो कुछ भी है, उसे उजागर करेगी।" गौरतलब है कि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
सांसद पप्पू यादव प्रकरण पर प्रतिक्रिया
संसद में पुजारी का वेश धारण कर राम मंदिर चंदा चोरी के विरोध में प्रदर्शन करने पर सांसद पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के सवाल पर अनवर ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत एजेंडा था, पार्टी की ओर से नहीं। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव यह बताना चाहते थे कि राम मंदिर में किस तरह चोरी हुई और वह इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाना चाहते थे। अनवर के अनुसार, वे किसी हद तक अपने मकसद में कामयाब भी रहे।
कुलगाम हमला और एलपीजी कीमतें
कुलगाम आतंकी हमले पर तारिक अनवर ने इसे 'दुखद और अफसोसनाक' बताते हुए कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है और इससे कश्मीर की प्रगति को रोकने का प्रयास हो सकता है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती पर उन्होंने कहा कि पहले कीमतें बढ़ाई जाती हैं और फिर कटौती को राहत बताकर पेश किया जाता है। उनके अनुसार, आज मध्यम वर्ग और गरीब आदमी सिलेंडर का इस्तेमाल करने में असमर्थ हैं और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर शहरों से अपने घरों को लौट गए हैं।