तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामले में दोषी करार: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नोएडा में 7 अगस्त को कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामलों में आरोपी या दोषी ठहराए गए व्यक्तियों का बार-बार पक्ष लेता रहा है।
भंडारी के आरोप और कांग्रेस पर निशाना
भंडारी ने कहा कि तेजपाल की दोषसिद्धि के बाद कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी खुद-ब-खुद बहुत कुछ कह देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कभी तेजपाल को 'सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने वाला सिपाही' बताया था। इसी तरह, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने 2021 में तेजपाल को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया था — ऐसे आरोप जो विपक्ष की आलोचना के केंद्र में हैं।
तेजपाल और कांग्रेस नेतृत्व का कथित संबंध
भंडारी ने दावा किया कि तेजपाल, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के समर्थक रहे हैं और कथित तौर पर उन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में सोनिया गांधी को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा कि अब जब न्यायालय ने तेजपाल को दोषी ठहराया है, तो कांग्रेस नेतृत्व इस विषय पर मौन है।
महिला सम्मान पर BJP का रुख
भंडारी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांधी-वाड्रा परिवार के नेतृत्व में पार्टी की नीति महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों का साथ देने की रही है। उन्होंने कांग्रेस को 'महिला विरोधी पार्टी' करार दिया और माँग की कि पार्टी देश की महिलाओं को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब दे।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि तेजपाल का यह मामला 2013 में तब सामने आया था जब एक महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह मामला वर्षों तक अदालत में चला और अब दोषसिद्धि के साथ इसने एक बार फिर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और न्याय का मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखता है।
आगे क्या
कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। BJP के इस हमले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रहने की संभावना है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसदीय गलियारों तक पहुँच सकता है।