तहसीन पूनावाला: यूसीसी का समर्थन, लेकिन कई सवाल उठाए
सारांश
Key Takeaways
- यूसीसी लागू करने का समर्थन, लेकिन सवाल उठाए गए।
- अलग-अलग राज्यों में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया पर प्रश्न।
- मुस्लिम समुदाय की आपत्तियों पर तहसीन का स्पष्ट रुख।
- गोवा के कानून का संदर्भ और न्यायसंगतता की मांग।
- सभी भारतीयों को यूसीसी में शामिल करने की आवश्यकता।
पुणे, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने यूसीसी को लागू करने के समर्थन में आवाज उठाई है, लेकिन उन्होंने कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए हैं।
उन्होंने बुधवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि मैं यूसीसी का समर्थन करता हूं और यह मानता हूं कि इसे हर हाल में लागू किया जाना चाहिए। लेकिन, मेरे कुछ प्रश्न हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में यूसीसी को लागू किया गया, लेकिन आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया। क्या हम इस तरह की स्थिति को स्वीकार कर सकते हैं?
तहसीन पूनावाला ने कहा कि मेरा सवाल सीधा है कि जब आप यूसीसी लागू करने के लिए उत्सुक हैं, तो इसे पूरे देश में एक साथ क्यों नहीं लागू किया जाता? विभिन्न राज्यों में इसे लागू करने का क्या कारण है? इससे किसी को भी कोई लाभ नहीं होगा। यदि आप वास्तव में यूसीसी के प्रति गंभीर हैं, तो इसे सभी के लिए लागू करें। हमें इससे कोई समस्या नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लगातार कहा जा रहा है कि यूसीसी के खिलाफ मुस्लिम समुदाय में आपत्तियाँ हैं। कुछ लोग कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय के लोग बहुविवाह करते हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूसीसी से हमें कोई आपत्ति नहीं है। आप इसे बिना किसी संकोच के लागू करें। कोई विरोध नहीं होगा।
तहसीन ने गोवा के एक कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके राज्य में एक ऐसा कानून है, जिसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी हिंदू पुरुष को ३० वर्ष की आयु तक पुत्र नहीं होता है, तो उसे दूसरी शादी करने का अधिकार है। यह आश्चर्यजनक है कि गोवा के मुख्यमंत्री इस कानून को न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, मैं मांग करता हूं कि सरकार को इस विषय में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यूसीसी में सभी भारतीयों को शामिल किया जाना चाहिए, तभी स्थिति सकारात्मक होगी। कृपया उत्तराखंड जैसे यूसीसी का निर्माण न करें, जहां एसडीएम यह तय कर रहे हैं कि किसका किसके साथ संबंध है। बल्कि, यूसीसी में सभी को शामिल करें, तभी आगे चलकर स्थिति में सुधार होगा।