तेलंगाना: नाबालिग पोती से कार चलवाने पर सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड, डीजीपी सी.वी. आनंद ने दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी.वी. आनंद ने 13 जुलाई को एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को निलंबित करने के आदेश दिए, जिस पर आरोप है कि उसने हैदराबाद के नरसिंगी थाना क्षेत्र की एक व्यस्त सड़क पर अपनी छह वर्षीया नाबालिग पोती को कार चलाने दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की।
घटना का पूरा घटनाक्रम
शनिवार शाम गंधमगुडा रोड पर स्थानीय लोगों ने देखा कि एक बच्ची सार्वजनिक सड़क पर कार चला रही है। जब लोगों ने विरोध जताया, तब बच्ची ने बताया कि उसके दादाजी पुलिस सब-इंस्पेक्टर हैं। आरोपी अधिकारी पुजारी तिरुपति ने सफाई देते हुए कहा कि कार ऑटोमैटिक थी और पूरे समय वाहन उनके नियंत्रण में था। हालाँकि, मौजूद लोगों ने यह तर्क नहीं माना और उन्हें यह सुझाव दिया कि यदि बच्चे को ड्राइविंग सिखानी है तो किसी खुले मैदान में सिखाएं, न कि सार्वजनिक सड़क पर।
मामला दर्ज और विभागीय जाँच
साइबराबाद ट्रैफिक पुलिस ने सोमवार को बताया कि पुजारी तिरुपति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 और 180 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार जाँच जारी है। डीजीपी आनंद ने साइबराबाद पुलिस आयुक्त को संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित करने और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।
साइबराबाद पुलिस आयुक्त की प्रतिक्रिया
साइबराबाद पुलिस आयुक्त एम. रमेश ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी साइबराबाद पुलिस में तैनात नहीं है। उन्होंने डीजीपी के एक्स पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा, 'सर, हम संबंधित अधिकारी को तुरंत निलंबित करने और उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट भेज रहे हैं।' यह बयान डीजीपी की सक्रियता और सोशल मीडिया के ज़रिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश को दर्शाता है।
सोशल मीडिया और जन दबाव की भूमिका
घटना का वीडियो रविवार रात सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसके बाद जनता में आक्रोश फैल गया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने से जुड़ी दुर्घटनाओं पर चिंता बढ़ रही है। गौरतलब है कि पुलिसकर्मी द्वारा खुद यातायात नियमों का उल्लंघन करना इस मामले को और अधिक गंभीर बनाता है।
आगे की कार्रवाई
विभागीय जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं और मामले की पुलिस जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिसके बाद औपचारिक निलंबन आदेश जारी होने की संभावना है। यह मामला पुलिस बल में अनुशासन और जनता के बीच विश्वास बनाए रखने की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है।