10 अगस्त 2026
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थेवा आर्ट को मिली वैश्विक पहचान: मंदसौर के राकेश सोनी ने PM मोदी के लिए बनाया विशेष ब्रोच

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थेवा आर्ट को मिली वैश्विक पहचान: मंदसौर के राकेश सोनी ने PM मोदी के लिए बनाया विशेष ब्रोच

सारांश

मंदसौर के शिल्पकार राकेश सोनी की 25 साल की साधना ने थेवा आर्ट को स्लोवाकिया के राष्ट्रपति तक पहुँचाया। PM मोदी के लिए बनाया गया विशेष ब्रोच इस 400 वर्ष पुरानी कला की नई वैश्विक यात्रा का प्रतीक है।

मुख्य बातें

मंदसौर के शिल्पकार राकेश सोनी पिछले 25 वर्षों से थेवा आर्ट को संजो रहे हैं।
थेवा आर्ट राजस्थान के प्रतापगढ़ की लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तकला है, जिसमें 23 कैरेट सोने से काँच पर नक्काशी होती है।
PM मोदी ने स्लोवाकिया यात्रा में राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को थेवा मोटिफ कफलिंक्स भेंट किए।
राकेश सोनी ने PM मोदी के लिए थेवा कला का एक विशेष ब्रोच तैयार किया है।
एक थेवा सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है।

मध्य प्रदेश के मंदसौर निवासी शिल्पकार राकेश सोनी पिछले 25 वर्षों से राजस्थान के प्रतापगढ़ की विश्वप्रसिद्ध थेवा आर्ट को जीवंत बनाए हुए हैं। उनकी बारीक कारीगरी और अथक लगन ने इस दुर्लभ हस्तकला को न केवल देशभर में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए थेवा कला का एक विशेष ब्रोच तैयार किया है।

थेवा कला की विरासत और विशेषता

थेवा आर्ट राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तकला है, जो मुगल काल से चली आ रही है। इस अनूठी कला में बहुरंगी काँच की सतह पर 23 कैरेट सोने की अत्यंत महीन नक्काशी की जाती है, जो इसे अन्य सभी हस्तशिल्पों से अलग और दुर्लभ बनाती है। यही बारीकी इस कला की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी कारण देश-विदेश में इसकी माँग निरंतर बढ़ रही है।

राकेश सोनी ने बताया कि उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो प्रतापगढ़ में रहकर वर्षों से इस परंपरागत शिल्प से जुड़े हैं। कई वर्षों के अभ्यास और समर्पण के बाद उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की। उनके द्वारा निर्मित थेवा आभूषण और कलाकृतियाँ आज देशभर के कला-प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

स्लोवाकिया में मिली वैश्विक पहचान

थेवा कला को उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्लोवाकिया यात्रा के दौरान वहाँ के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को प्रतापगढ़ की थेवा कला से निर्मित 'थेवा मोटिफ कफलिंक्स' भेंट किए। इन कफलिंक्स में रंगीन काँच पर सोने की बेहद बारीक नक्काशी की गई थी, जिसने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने विदेश यात्राओं में भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प को कूटनीतिक उपहार के रूप में प्रस्तुत किया हो। यह 'सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी' का एक उभरता हुआ स्वरूप है, जिसमें भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक संबंधों की नींव बनाया जा रहा है।

PM मोदी के लिए विशेष ब्रोच

प्रधानमंत्री मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान से प्रेरित होकर राकेश सोनी ने उनके लिए थेवा आर्ट का एक विशेष ब्रोच तैयार किया है। इस ब्रोच में थेवा कला की पारंपरिक बारीकियाँ, भारतीय संस्कृति की झलक और शिल्पकार के वर्षों के परिश्रम का सार समाहित है। राकेश सोनी की इच्छा है कि यह विशेष उपहार प्रधानमंत्री तक पहुँचे, ताकि वे मंदसौर के इस कलाकार की कला और समर्पण को करीब से जान सकें।

शिल्पकार की आवाज़

राकेश सोनी ने कहा, 'मैं पिछले 25 साल से इस काम को कर रहा हूँ। काफी प्रयासों के बाद मैंने इस कला को सीखा और आगे बढ़ाया है। इसमें बहुत बारीकी का काम होता है — एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है। यह करीब 400 साल पुरानी कला है और मुगल काल से चली आ रही है।'

उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि थेवा कला को जिस तरह वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई गई है, उससे उन्हें और पूरे शिल्पकार समुदाय को अत्यंत प्रसन्नता हुई है।

आगे की राह

'वोकल फॉर लोकल' की भावना के साथ थेवा जैसी दुर्लभ कलाओं को वैश्विक मंच मिलने से देशभर के हस्तशिल्प कारीगरों में नया उत्साह जागा है। राकेश सोनी जैसे शिल्पकारों की यात्रा यह दर्शाती है कि स्थानीय कला, सही प्रोत्साहन और पहचान मिलने पर, वैश्विक सांस्कृतिक राजनय का हिस्सा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कूटनीतिक प्रदर्शन जमीनी स्तर पर कारीगरों की आजीविका में भी बदलाव ला रहा है। 'वोकल फॉर लोकल' की भावना सराहनीय है, पर राकेश सोनी जैसे शिल्पकारों को वैश्विक बाज़ार तक स्थायी पहुँच, उचित मूल्य और संस्थागत समर्थन की दरकार है — सिर्फ प्रतीकात्मक पहचान की नहीं। जब तक पारंपरिक कलाओं को नीतिगत ढाँचे में स्थायी स्थान नहीं मिलता, ये कहानियाँ प्रेरणादायक तो रहेंगी, पर परिवर्तनकारी नहीं बन पाएँगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थेवा आर्ट क्या है और यह कहाँ से आती है?
थेवा आर्ट राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तकला है, जो मुगल काल से चली आ रही है। इसमें बहुरंगी काँच की सतह पर 23 कैरेट सोने की अत्यंत बारीक नक्काशी की जाती है, जो इसे दुनिया की दुर्लभतम हस्तशिल्पों में से एक बनाती है।
राकेश सोनी कौन हैं और थेवा कला से उनका क्या संबंध है?
राकेश सोनी मध्य प्रदेश के मंदसौर निवासी शिल्पकार हैं, जो पिछले 25 वर्षों से थेवा आर्ट का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो प्रतापगढ़ में इस परंपरागत शिल्प से जुड़े हैं।
PM मोदी की स्लोवाकिया यात्रा में थेवा कला का क्या महत्व था?
PM मोदी ने स्लोवाकिया यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को प्रतापगढ़ की थेवा कला से निर्मित 'थेवा मोटिफ कफलिंक्स' भेंट किए। इस उपहार ने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को वैश्विक कूटनीतिक मंच पर प्रदर्शित किया।
राकेश सोनी ने PM मोदी के लिए क्या बनाया है?
'वोकल फॉर लोकल' अभियान से प्रेरित होकर राकेश सोनी ने PM मोदी के लिए थेवा आर्ट का एक विशेष ब्रोच तैयार किया है। उनकी इच्छा है कि यह उपहार प्रधानमंत्री तक पहुँचे और वे इस कला व शिल्पकार के समर्पण को करीब से जान सकें।
एक थेवा आर्ट सेट बनाने में कितना समय लगता है?
राकेश सोनी के अनुसार एक थेवा सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है। इसमें 23 कैरेट सोने से काँच पर की जाने वाली अत्यंत महीन नक्काशी के कारण यह एक अत्यंत श्रमसाध्य प्रक्रिया है।
राष्ट्र प्रेस
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