तृणमूल के तीन पूर्व राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल, सुखेंदु शेखर रॉय समेत तीनों ने थामा कमल
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद — सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक — 9 जुलाई 2026 को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य मुख्यालय में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। तीनों ने पिछले महीने संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया था और तब से उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक अटकलें जारी थीं।
शामिल होने का समारोह और स्वागत
पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं का स्वागत किया और उन्हें पार्टी का झंडा सौंपा। भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि इन तीनों को भाजपा में शामिल करना एक अपवाद है और इसका अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि पार्टी तृणमूल के किसी भी नेता के लिए अपने द्वार खोल देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तीनों का रिकॉर्ड बेदाग है और तृणमूल में रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं रहा।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
सुखेंदु शेखर रॉय ने 8 जून को राज्यसभा से इस्तीफा दिया, इसके बाद सुष्मिता देव ने 10 जून को और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून को इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे के बाद बराइक ने विपक्ष के नेता सुभेंदु अधिकारी की सार्वजनिक प्रशंसा की थी, जबकि देव ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की थी। गौरतलब है कि रॉय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले से ही तृणमूल नेतृत्व के मुखर आलोचक रहे हैं। अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना के बाद उन्हें पार्टी में हाशिए पर कर दिया गया था।
राज्यसभा उपचुनाव की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि भाजपा आगामी राज्यसभा उपचुनावों में इन तीनों नेताओं को अपना उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि, भट्टाचार्य ने इस संभावना की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया — उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से स्पष्ट इनकार किया।
विधानसभा में संख्या बल और चुनावी गणित
पश्चिम बंगाल विधानसभा के मौजूदा संख्या समीकरण के अनुसार, भाजपा के पास फिलहाल 208 विधायक हैं। किसी भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्षी उम्मीदवार को कम से कम 70 मत चाहिए होंगे। आधिकारिक रूप से तृणमूल के पास 80 विधायक हैं, लेकिन इनमें से 60 निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी बहुमत' गुट से जुड़े हैं। शेष 20 विधायक ही ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार माने जाते हैं। इस गणित के आधार पर, भाजपा के उम्मीदवारों की तीनों सीटों पर जीत की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
तृणमूल में बढ़ती दरारें
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में आंतरिक कलह से जूझ रही है। आरजी कर कांड के बाद से पार्टी में असंतोष की आवाजें मुखर हुई हैं और कई वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व से दूरी बनाई है। यह तीसरी बड़ी राजनीतिक विदाई है जो तृणमूल के राज्यसभा प्रतिनिधित्व को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। आने वाले उपचुनाव न केवल इन तीन सीटों का भविष्य तय करेंगे, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा का भी संकेत देंगे।