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टीएमसी 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' है, सत्ता जाते ही बिखरेगी: सीपीआई(एम) पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य

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टीएमसी 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' है, सत्ता जाते ही बिखरेगी: सीपीआई(एम) पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य

सारांश

सीपीआई(एम) पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य ने टीएमसी को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' करार देते हुए कहा कि एक व्यक्ति केंद्रित दल सत्ता जाते ही बिखर जाते हैं। साथ ही मदन मित्रा पर ईडी की छापेमारी ने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य ने 14 जून को टीएमसी को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' बताया।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को छोड़कर कई टीएमसी नेता भविष्य में एनडीए की ओर जा सकते हैं।
टीएमसी विधायक मदन मित्रा के ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की; 125 से अधिक कथित गैर-कानूनी नियुक्तियों की जाँच जारी।
कथित तौर पर नियुक्तियों के बदले बिचौलियों के ज़रिए नकद और सोने में रिश्वत ली गई।
भट्टाचार्य ने BJP नेताओं के साथ वायरल तस्वीर को फुटबॉल क्लब कार्यक्रम का हिस्सा बताया, राजनीतिक संबंध से इनकार किया।

सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य ने 14 जून को उत्तर 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह पार्टी एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' की तरह काम करती है, जो किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। उनके अनुसार, ऐसी पार्टियाँ सत्ता से बाहर होते ही संगठनात्मक रूप से बिखरने लगती हैं।

मुख्य बयान: 'एक व्यक्ति केंद्रित पार्टी का अंजाम'

भट्टाचार्य ने कहा कि जब कोई राजनीतिक दल किसी एक नेता के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाता है, तो उसका परिणाम अंततः कमज़ोर संगठनात्मक ढाँचे के रूप में सामने आता है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि अभिषेक बनर्जी को छोड़कर पार्टी के कई नेता — जिनमें काकोली घोष दस्तीदार के सहयोगी भी शामिल हैं — भविष्य में राजनीतिक रूप से अलग दिशा में जा सकते हैं और यहाँ तक कि एनडीए की ओर झुकाव की संभावना भी जताई।

मदन मित्रा पर ईडी की छापेमारी और जाँच एजेंसियों पर सवाल

टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने शनिवार सुबह छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि मित्रा ने कामरहाटी म्युनिसिपैलिटी सहित कई नगर पालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के ज़रिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली। अधिकारियों के अनुसार, मित्रा 125 से अधिक कथित गैर-कानूनी नियुक्तियों से जुड़े हैं और जाँच जारी है।

हालाँकि, भट्टाचार्य ने जाँच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यही एजेंसियाँ पहले भी कई मामलों में ठोस चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही हैं और अदालत में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाई हैं। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक मामलों में जाँच एजेंसियों की भूमिका लगातार विवादों में रही है।

वायरल तस्वीर पर सफाई

एक वायरल तस्वीर को लेकर — जिसमें भट्टाचार्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के साथ नज़र आए — उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक मंच का हिस्सा नहीं थे। उनके अनुसार, यह एक फुटबॉल क्लब के कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति थी, जहाँ BJP प्रवक्ता देबजीत सरकार और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अनौपचारिक बातचीत और चाय के दौरान ली गई इन तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

भट्टाचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर गुटबाज़ी की खबरें सामने आ रही हैं और ईडी की कार्रवाई से पार्टी पर दबाव बढ़ा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ वाम नेता ने टीएमसी की आंतरिक संरचना पर इस तरह के सवाल उठाए हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले ऐसे बयान विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

आगे क्या

मदन मित्रा से जुड़े मामले में ईडी की जाँच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी उतना ही सच है कि जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भट्टाचार्य का सवाल — कि वे अदालत में साक्ष्य नहीं टिका पातीं — एक वैध जवाबदेही-बिंदु है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तन्मय भट्टाचार्य ने टीएमसी को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' क्यों कहा?
सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य का कहना है कि टीएमसी एक व्यक्ति केंद्रित दल है, जिसका संगठनात्मक ढाँचा सत्ता के बाहर होते ही कमज़ोर पड़ जाता है। उनके अनुसार ऐसी पार्टियाँ 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' की तरह होती हैं जो शीर्ष नेतृत्व के बिना टिक नहीं सकतीं।
मदन मित्रा पर ईडी की छापेमारी किस मामले में हुई?
प्रवर्तन निदेशालय ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कोलकाता स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि कामरहाटी म्युनिसिपैलिटी सहित कई नगर पालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के ज़रिए नकद और सोने में रिश्वत ली गई, और ऐसी 125 से अधिक कथित गैर-कानूनी नियुक्तियाँ मित्रा से जुड़ी बताई जा रही हैं।
भट्टाचार्य ने किन टीएमसी नेताओं के एनडीए की ओर जाने की भविष्यवाणी की?
भट्टाचार्य ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को छोड़कर टीएमसी के कई नेता — जिनमें काकोली घोष दस्तीदार के सहयोगी भी शामिल हैं — भविष्य में राजनीतिक रूप से अलग दिशा में जा सकते हैं और एनडीए की ओर झुकाव की संभावना भी है।
BJP नेताओं के साथ वायरल तस्वीर पर भट्टाचार्य ने क्या सफाई दी?
भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं, बल्कि एक फुटबॉल क्लब के आयोजन में शामिल हुए थे, जहाँ BJP प्रवक्ता देबजीत सरकार और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अनौपचारिक बातचीत के दौरान ली गई तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की आंतरिक स्थिति कैसी है?
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के भीतर गुटबाज़ी और असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। ईडी की कार्रवाई और वरिष्ठ नेताओं पर बढ़ते कानूनी दबाव के बीच विपक्षी दलों ने पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे पर सवाल उठाने तेज़ कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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