टीएमसी 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' है, सत्ता जाते ही बिखरेगी: सीपीआई(एम) पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक तन्मय भट्टाचार्य ने 14 जून को उत्तर 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह पार्टी एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' की तरह काम करती है, जो किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। उनके अनुसार, ऐसी पार्टियाँ सत्ता से बाहर होते ही संगठनात्मक रूप से बिखरने लगती हैं।
मुख्य बयान: 'एक व्यक्ति केंद्रित पार्टी का अंजाम'
भट्टाचार्य ने कहा कि जब कोई राजनीतिक दल किसी एक नेता के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाता है, तो उसका परिणाम अंततः कमज़ोर संगठनात्मक ढाँचे के रूप में सामने आता है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि अभिषेक बनर्जी को छोड़कर पार्टी के कई नेता — जिनमें काकोली घोष दस्तीदार के सहयोगी भी शामिल हैं — भविष्य में राजनीतिक रूप से अलग दिशा में जा सकते हैं और यहाँ तक कि एनडीए की ओर झुकाव की संभावना भी जताई।
मदन मित्रा पर ईडी की छापेमारी और जाँच एजेंसियों पर सवाल
टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने शनिवार सुबह छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि मित्रा ने कामरहाटी म्युनिसिपैलिटी सहित कई नगर पालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के ज़रिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली। अधिकारियों के अनुसार, मित्रा 125 से अधिक कथित गैर-कानूनी नियुक्तियों से जुड़े हैं और जाँच जारी है।
हालाँकि, भट्टाचार्य ने जाँच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यही एजेंसियाँ पहले भी कई मामलों में ठोस चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही हैं और अदालत में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाई हैं। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक मामलों में जाँच एजेंसियों की भूमिका लगातार विवादों में रही है।
वायरल तस्वीर पर सफाई
एक वायरल तस्वीर को लेकर — जिसमें भट्टाचार्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के साथ नज़र आए — उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक मंच का हिस्सा नहीं थे। उनके अनुसार, यह एक फुटबॉल क्लब के कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति थी, जहाँ BJP प्रवक्ता देबजीत सरकार और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अनौपचारिक बातचीत और चाय के दौरान ली गई इन तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
भट्टाचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर गुटबाज़ी की खबरें सामने आ रही हैं और ईडी की कार्रवाई से पार्टी पर दबाव बढ़ा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ वाम नेता ने टीएमसी की आंतरिक संरचना पर इस तरह के सवाल उठाए हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले ऐसे बयान विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
आगे क्या
मदन मित्रा से जुड़े मामले में ईडी की जाँच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने के संकेत हैं।