टीएमसी सांसद डोला सेन का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, पश्चिम बंगाल में 92 लाख मतदाताओं के नाम काटने का दावा
सारांश
टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर 92 लाख मतदाताओं के नाम काटने और मतगणना में जानबूझकर देरी का आरोप लगाया है। सौगत रॉय ने हिंदू ध्रुवीकरण को हार का कारण बताया। दोनों नेताओं की प्रतिक्रियाएँ टीएमसी के भीतर हार के विश्लेषण की अलग-अलग धाराओं को उजागर करती हैं।
मुख्य बातें
टीएमसी सांसद डोला सेन ने 6 मई 2026 को चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल में मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
सेन के अनुसार, चुनाव के दौरान एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत 92 लाख वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 स्थानों पर जहाँ टीएमसी उम्मीदवार आगे थे, वहाँ का डेटा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया।
चुनाव के दौरान ढाई लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूद सेन ने कहा कि जनता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वोट दिया।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भाजपा के हिंदू ध्रुवीकरण को हार का प्रमुख कारण बताया और आई-पैक रणनीति पर जानकारी होने से इनकार किया।
रॉय ने 2006 के और भी खराब चुनावी परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि टीएमसी 2011 की तरह फिर वापसी करेगी।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद डोला सेन ने 6 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में पार्टी की हार के लिए चुनाव आयोग (ECI) को जिम्मेदार ठहराया और मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान 92 लाख वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। वहीं, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने हार के लिए हिंदू ध्रुवीकरण और आई-पैक रणनीति को कारण बताया।
डोला सेन के आरोप: मतगणना में कुप्रबंधन
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में डोला सेन ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन इनके साथ एक बड़ी विडंबना भी है — टीएमसी उसी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है जिसने वर्षों तक पश्चिम बंगाल में पंचायत और विधानसभा चुनावों में उस पर पक्षपात के आरोप लगाए। 92 लाख मतदाताओं के नाम काटने का दावा गंभीर है, लेकिन इसे स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत है। सौगत रॉय की हिंदू ध्रुवीकरण वाली स्वीकारोक्ति अधिक ईमानदार विश्लेषण लगती है — यह संकेत देती है कि टीएमसी को संस्थागत से अधिक रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा। पार्टी के भीतर से आ रही ये दो अलग-अलग आवाज़ें बताती हैं कि हार के बाद आत्ममंथन अभी शुरू ही हुआ है।
RashtraPress
13 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
डोला सेन ने आरोप लगाया कि मतगणना के दिन जानबूझकर देरी की गई और लगभग 100 स्थानों पर टीएमसी उम्मीदवारों की लीड का डेटा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत 92 लाख वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
92 लाख मतदाताओं के नाम काटने का दावा क्या है?
डोला सेन के अनुसार, चुनाव के दौरान एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के जरिए पश्चिम बंगाल में 92 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये मतदाता अवैध थे तो चुनाव आयोग और गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की।
सौगत रॉय ने टीएमसी की हार के क्या कारण बताए?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि भाजपा हिंदू ध्रुवीकरण करने और हिंदू वोटों को एकजुट करने में सफल रही, जो हार का प्रमुख कारण बना। उन्होंने आई-पैक रणनीति के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भविष्य पर सौगत रॉय ने क्या कहा?
सौगत रॉय ने कहा कि 2006 में पार्टी के परिणाम इससे भी खराब थे, फिर भी टीएमसी ने 2011 में वापसी की। उन्होंने कहा कि राजनीति इसी तरह चलती है और चिंतित होने की कोई वजह नहीं है।
चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में कितने केंद्रीय बल तैनात थे?
डोला सेन के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान ढाई लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि जनता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष में मतदान किया।