18 अगस्त 2026
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तमिलनाडु के जलाशयों में जल-भंडारण घटकर 37%, कमजोर मानसून से पानी का संकट गहराया

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तमिलनाडु के जलाशयों में जल-भंडारण घटकर 37%, कमजोर मानसून से पानी का संकट गहराया

सारांश

दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोरी और कर्नाटक से कावेरी का निर्धारित हिस्सा न मिलने की दोहरी मार से तमिलनाडु के 90 जलाशयों में भंडारण 37% पर आ गया है — पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम। अब राज्य की निगाहें उत्तर-पूर्व मानसून पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के 90 जलाशयों में जल-भंडारण 18 अगस्त तक घटकर 37.05% (83.124 TMC) रह गया; कुल क्षमता 224.343 TMC है।
पिछले वर्ष इसी समय भंडारण 189.545 TMC था — मौजूदा स्तर उससे आधे से भी कम।
58 जलाशयों में पानी 25% से नीचे; केवल 2 में 80% से ऊपर।
मेट्टूर जलाशय में 46.30% भंडारण; पिछले साल यह 97.48% था।
कर्नाटक ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जून-जुलाई में तय कावेरी हिस्से से काफी कम पानी छोड़ा।
राज्य अब उत्तर-पूर्व मानसून पर निर्भर; मेट्टूर के इस सीजन में पूरी क्षमता तक भरने की संभावना न्यून।

तमिलनाडु के 90 जलाशयों में जल-भंडारण 18 अगस्त 2025 तक घटकर कुल क्षमता का मात्र 37.05 प्रतिशत रह गया है — दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर सक्रियता और असामान्य रूप से अधिक तापमान ने राज्य के जल संसाधनों पर गंभीर दबाव बना दिया है। जल संसाधन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, इन जलाशयों में फिलहाल 83.124 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी है, जबकि कुल भंडारण क्षमता 224.343 हजार मिलियन क्यूबिक फीट है।

पिछले वर्ष से कितना कम

बीते वर्ष इसी अवधि में राज्य के जलाशयों में 189.545 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था — यानी मौजूदा स्तर पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम है। यह अंतर बारिश की कमी की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। 90 में से 58 जलाशयों में पानी का स्तर 25 प्रतिशत से नीचे है, 14 में 26 से 50 प्रतिशत के बीच, 15 में 51 से 76 प्रतिशत के बीच और केवल दो जलाशयों में स्तर 80 प्रतिशत से ऊपर है। एकमात्र तेनकासी जिले का गुंडार जलाशय अपनी 18.43 मिलियन क्यूबिक फीट की पूरी क्षमता तक पहुँच सका है।

मेट्टूर जलाशय की स्थिति

कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए सबसे अहम माने जाने वाले मेट्टूर जलाशय में सोमवार को 43.275 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था, जो इसकी 93.470 हजार मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता का 46.30 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी समय यह स्तर 91.114 हजार मिलियन क्यूबिक फीट यानी क्षमता का 97.48 प्रतिशत था। अधिकारियों के अनुसार, इस सीजन में मेट्टूर के पूरी क्षमता तक भरने की संभावना अब बेहद कम है। मेट्टूर और तिरुचि के बीच कावेरी नदी में पानी की उपलब्धता फिलहाल सामान्य बनी हुई है, लेकिन निचले और अंतिम छोर के इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

कर्नाटक से कावेरी जल विवाद

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए तय कावेरी का हिस्सा अभी तक नहीं छोड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेश के तहत, कर्नाटक को जून में 9.190 हजार मिलियन क्यूबिक फीट और जुलाई में 31.240 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी छोड़ना था। हालाँकि, तमिलनाडु को जून में केवल 2.915 हजार मिलियन क्यूबिक फीट और जुलाई में मात्र 0.7138 हजार मिलियन क्यूबिक फीट ही मिला। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के अपने चार प्रमुख कावेरी जलाशयों — कृष्णराज सागर (63.64%), काबिनी (92.31%), हारंगी (97.06%) और हेमावती (86.56%) — में भंडारण की स्थिति काफी बेहतर है।

आम जनता और खेती पर असर

भवानीसागर, अमरावती और वैगई समेत अन्य प्रमुख सिंचाई जलाशयों में भी पानी का स्तर कम बना हुआ है, जिससे कई जिलों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य अभी मौजूदा माँग को पूरा कर रहा है, लेकिन जलाशयों पर निर्भर इलाकों में आपूर्ति और खपत का संतुलन बनाए रखना कठिन होता जा रहा है।

उत्तर-पूर्व मानसून पर टिकी उम्मीदें

दक्षिण-पश्चिम मानसून से अपर्याप्त वर्षा को देखते हुए, तमिलनाडु को इस वर्ष के अंत में आने वाले उत्तर-पूर्व मानसून पर बड़ी उम्मीदें टिकानी होंगी। जलाशयों को भरने और कृषि व पेयजल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए यह मानसून निर्णायक साबित होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की जल नीति और अंतरराज्यीय जल-साझाकरण व्यवस्था दोनों पर नए सिरे से विचार की माँग उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई — यह न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन की पुरानी कमजोरी को उजागर करता है। उत्तर-पूर्व मानसून पर निर्भरता एक अनिश्चित दाँव है, क्योंकि वह भी हर साल भरोसेमंद नहीं रहा। राज्य को दीर्घकालिक जल-संग्रहण और माँग-प्रबंधन नीति की ज़रूरत है — संकट आने पर मानसून की प्रतीक्षा करना टिकाऊ रणनीति नहीं है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के जलाशयों में अभी कितना पानी है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, 18 अगस्त तक राज्य के 90 जलाशयों में 83.124 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी है, जो कुल 224.343 TMC क्षमता का 37.05 प्रतिशत है। पिछले साल इसी समय यह 189.545 TMC था।
मेट्टूर बाँध की मौजूदा स्थिति क्या है?
मेट्टूर जलाशय में 18 अगस्त को 43.275 TMC पानी था, जो इसकी 93.470 TMC क्षमता का 46.30 प्रतिशत है। पिछले साल यह 97.48 प्रतिशत था। अधिकारियों के अनुसार, इस सीजन में जलाशय के पूरी क्षमता तक भरने की संभावना बेहद कम है।
कर्नाटक ने तमिलनाडु को कावेरी का पानी क्यों नहीं दिया?
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत कर्नाटक को जून में 9.190 TMC और जुलाई में 31.240 TMC पानी छोड़ना था, लेकिन तमिलनाडु को क्रमशः केवल 2.915 TMC और 0.7138 TMC ही मिला। कर्नाटक के अपने जलाशयों में भंडारण अच्छा होने के बावजूद यह कमी बनी रही।
इस जल संकट का किसानों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
कई जिलों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ गया है। निचले और नदी के अंतिम छोर के इलाकों में पीने के पानी की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। भवानीसागर, अमरावती और वैगई जलाशयों में भी स्तर कम है, जिससे खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित हो सकती है।
तमिलनाडु अब इस संकट से कैसे निपटेगा?
अधिकारियों के अनुसार, राज्य अभी मौजूदा माँग को पूरा कर रहा है, लेकिन आपूर्ति-खपत संतुलन कठिन होता जा रहा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता के बाद अब राज्य को जलाशय भरने और कृषि-पेयजल आपूर्ति के लिए साल के अंत में आने वाले उत्तर-पूर्व मानसून पर बड़ी उम्मीदें टिकानी होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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