दिल्ली विरोध-प्रदर्शन 'टूलकिट एजेंडा और भारत-विरोधी साजिश' था: भाजपा एमएलसी सी.टी. रवि
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी सी.टी. रवि ने 21 जुलाई को बेंगलुरू में मीडिया से बातचीत करते हुए दिल्ली में हुए हालिया विरोध-प्रदर्शन को 'टूलकिट' राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने दावा किया कि यह प्रदर्शन वास्तव में छात्रों का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित, भारत-विरोधी साजिश थी।
मुख्य आरोप और बयान
रवि ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्वक प्रदर्शन का अधिकार दिया जाता है और वह दिया भी गया था। लेकिन उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद का घेराव करने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया — जिसे उन्होंने अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि NEET को लेकर विरोध समझ में आता है, परंतु जंतर-मंतर से धारा 370 की बहाली और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध की माँग उठाना छात्रों का मुद्दा नहीं है।
NEET और मेडिकल शिक्षा पर तर्क
रवि ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से पहले देश में 51,000 MBBS सीटें थीं, जो अब बढ़कर 1 लाख 36 हजार हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के नेतृत्व में 370 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस के शासनकाल में भी पेपर लीक होते थे, लेकिन कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि दूसरी बार परीक्षा आयोजित होने पर व्यवस्था इतनी दुरुस्त की गई कि कोई पेपर लीक नहीं हो सका।
एक्स पर पोस्ट का हवाला
रवि ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: 'दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर जो कुछ हुआ, वह निश्चित रूप से छात्रों का प्रदर्शन नहीं था। यह एक सुनियोजित, भारत-विरोधी साजिश और टूलकिट एजेंडा था। छात्रों की आड़ में छिपे माओवादी, वामपंथी और राष्ट्रविरोधी तत्व निस्संदेह डीप स्टेट द्वारा प्रायोजित समूह हैं। उनका मकसद भारत में अराजकता फैलाना और सरकार को गिराना है। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने की यह राष्ट्र-विरोधी साजिश अब देश के सामने बेनकाब हो चुकी है। विदेशी पैसे के दम पर भारत में अराजकता फैलाने की ऐसी कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।'
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विद्यार्थियों में रोष है। रवि के ये आरोप विपक्षी दलों और छात्र संगठनों द्वारा अस्वीकार किए जाने की संभावना है, जो प्रदर्शन को स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन बता रहे हैं। यह ऐसी पहली बार नहीं है जब सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने विरोध-प्रदर्शनों को 'टूलकिट' या 'विदेशी षड्यंत्र' से जोड़ा हो।