11 जुलाई 2026
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माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य पसुनूरी नरहरि और पत्नी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया

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माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य पसुनूरी नरहरि और पत्नी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया

सारांश

सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य पसुनूरी नरहरि और पत्नी मेदारा दनम्मा ने 26 मई को तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। DGP सीवी आनंद ने कहा — इससे माओवादियों का अंतिम बचा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो पतन की कगार पर है।

मुख्य बातें

पसुनूरी नरहरि (उर्फ विश्वनाथ, सलाई दा), सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य एवं BJAC सचिव , और पत्नी मेदारा दनम्मा ने 26 मई 2026 को तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
DGP सीवी आनंद ने कहा कि इस आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन का अंतिम बचा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो पतन की कगार पर है।
नरहरि 1982 से माओवादी आंदोलन से जुड़े थे और 2017 में केंद्रीय समिति सदस्य बने।
नरहरि को मोर्टार, रॉकेट, ग्रेनेड और बूबी ट्रैप निर्माण में विशेषज्ञता हासिल थी और उन्होंने कार्यकर्ताओं को हथियार प्रशिक्षण दिया।
दनम्मा (उर्फ लता, पूनम, जोबा) राज्य समिति सदस्य (SCM) थीं और गुंटूर जिले से हैं।

प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन को मंगलवार, 26 मई 2026 को बड़ा झटका लगा, जब उसके केंद्रीय समिति सदस्य पसुनूरी नरहरि और उनकी पत्नी मेदारा दनम्मा ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस महानिदेशक (DGP) सीवी आनंद ने दोनों वरिष्ठ माओवादी नेताओं को मीडिया के सामने पेश किया।

कौन हैं पसुनूरी नरहरि

64 वर्षीय नरहरि, जो विश्वनाथ और सलाई दा उपनामों से भी जाने जाते हैं, बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति (BJAC) के सचिव के पद पर थे। वे तेलंगाना के हनुमाकोंडा जिले के मूल निवासी हैं और डिग्री पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में ही रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) से जुड़ गए थे।

पुलिस के अनुसार, 1982 में तत्कालीन सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर के आंध्र प्रदेश राज्य समिति सचिव स्वर्गीय पुली अंजैया के प्रभाव में आकर नरहरि ने संगठन में औपचारिक रूप से प्रवेश किया और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय कुंटा दलम का हिस्सा बने।

माओवादी संगठन में नरहरि का सफर

1988 में नरहरि ने गुंटूर जिले की दनम्मा से विवाह किया। 2006 में उन्हें राज्य समिति सदस्य (SCM) के पद पर पदोन्नत किया गया और वे बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति (BJSSAC) में SZC सदस्य के रूप में 2010 तक रहे।

2014 तक उन्होंने BJSSAC के अंतर्गत सात सदस्यीय तकनीकी विभाग का नेतृत्व किया। इसके बाद उनका तबादला बिहार राज्य समिति में हुआ, जहाँ उन्होंने 2017 तक गया जिला संगठन के प्रभारी के रूप में कार्य किया। 2017 में उन्हें पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ERB) के अंतर्गत केंद्रीय समिति सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया।

हथियार विशेषज्ञता और प्रशिक्षण

पुलिस ने बताया कि नरहरि को मोर्टार, रॉकेट, रॉकेट-चालित ग्रेनेड, ग्रेनेड और बूबी ट्रैप के निर्माण एवं रखरखाव में व्यापक विशेषज्ञता हासिल थी। उन्होंने माओवादी कार्यकर्ताओं को हथियार उत्पादन, मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया।

दनम्मा, जो लता, पूनम और जोबा उपनामों से जानी जाती हैं, राज्य समिति सदस्य (SCM) के पद पर थीं।

पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के पतन की कगार

DGP सीवी आनंद ने कहा कि इस आत्मसमर्पण के साथ ही सीपीआई (माओवादी) का अंतिम बचा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो पतन के कगार पर आ गया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में तेलंगाना और आसपास के राज्यों में माओवादी संगठन के खिलाफ अभियान तेज हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई वरिष्ठ नेता या तो मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आत्मसमर्पण उस दीर्घकालिक रणनीति की एक और कड़ी है जिसके तहत सुरक्षा बलों ने माओवादी नेतृत्व ढाँचे को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि माओवादी संगठन की तकनीकी रीढ़ का टूटना है — वे हथियार निर्माण और प्रशिक्षण के केंद्रीय स्तंभ थे। DGP का यह बयान कि 'पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो पतन की कगार पर है', एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपलब्धि है, लेकिन इतिहास बताता है कि माओवादी संगठन पहले भी ऐसे दबावों के बाद पुनर्गठित हुआ है। असली कसौटी यह होगी कि क्या सुरक्षा बल इस संगठनात्मक शून्य को भरने से रोकने में सफल होते हैं, और क्या आत्मसमर्पण नीति उन निचले स्तर के कार्यकर्ताओं तक भी पहुँच पाती है जो अभी भी जंगलों में सक्रिय हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पसुनूरी नरहरि कौन हैं और उन्होंने आत्मसमर्पण क्यों किया?
पसुनूरी नरहरि सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति (BJAC) के सचिव थे, जो 1982 से संगठन से जुड़े थे। उन्होंने 26 मई 2026 को अपनी पत्नी मेदारा दनम्मा के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
इस आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन पर क्या असर पड़ेगा?
तेलंगाना के DGP सीवी आनंद के अनुसार, इस आत्मसमर्पण से सीपीआई (माओवादी) का अंतिम बचा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो पतन की कगार पर आ गया है। नरहरि हथियार निर्माण और तकनीकी प्रशिक्षण के प्रमुख विशेषज्ञ थे, जिससे संगठन को बड़ा नुकसान होगा।
मेदारा दनम्मा माओवादी संगठन में किस पद पर थीं?
मेदारा दनम्मा, जो लता, पूनम और जोबा उपनामों से जानी जाती हैं, सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति सदस्य (SCM) थीं। वे गुंटूर जिले की मूल निवासी हैं और 1988 में नरहरि से उनका विवाह हुआ था।
नरहरि की माओवादी संगठन में तकनीकी भूमिका क्या थी?
पुलिस के अनुसार, नरहरि को मोर्टार, रॉकेट, रॉकेट-चालित ग्रेनेड, ग्रेनेड और बूबी ट्रैप के निर्माण एवं रखरखाव में व्यापक विशेषज्ञता थी। उन्होंने माओवादी कार्यकर्ताओं को हथियार उत्पादन, मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया।
नरहरि कब से और कैसे माओवादी आंदोलन से जुड़े?
नरहरि डिग्री पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) से जुड़े और 1982 में तत्कालीन सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर के नेता स्वर्गीय पुली अंजैया के प्रभाव में आकर औपचारिक रूप से संगठन में शामिल हुए। वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय कुंटा दलम का हिस्सा बने।
राष्ट्र प्रेस
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