22 जुलाई 2026
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त्रिपुरा डीजीपी अनुराग के अंतिम संस्कार में मंत्री असीम अरुण, बोले- '1984 दंगा जांच में सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया था नाम'

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त्रिपुरा डीजीपी अनुराग के अंतिम संस्कार में मंत्री असीम अरुण, बोले- '1984 दंगा जांच में सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया था नाम'

सारांश

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के बाद उनके बैचमेट और UP मंत्री असीम अरुण ने अंतिम संस्कार में शिरकत की। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नाम लेकर अनुराग को 1984 दंगा जाँच की जिम्मेदारी सौंपी थी — एक दुर्लभ सम्मान जो उनकी असाधारण निष्ठा का प्रमाण है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग को 20 जुलाई को राज्य पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था।
अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया।
त्रिपुरा सरकार ने मंगलवार को एक दिन का राजकीय शोक घोषित कर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।
UP मंत्री असीम अरुण ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने नाम लेकर अनुराग को 1984 दंगा एसआईटी की जिम्मेदारी सौंपी थी।
मृत्यु की परिस्थितियों की जाँच का आदेश दिया जा रहा है; अभी कोई पुख्ता निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण मंगलवार को बागपत में त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। 22 जुलाई 2026 को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दिवंगत अधिकारी को अपना बैचमेट और एक दुर्लभ योद्धा बताया, जिनके जाने से पूरे सेवा-जगत को गहरा आघात पहुँचा है।

मंत्री असीम अरुण की भावुक श्रद्धांजलि

मंत्री असीम अरुण ने कहा, 'अनुराग डीजीपी त्रिपुरा के पद पर कार्यरत थे। जब उनकी मृत्यु की सूचना मिली तो विश्वास ही नहीं हुआ। हम लोग उनके आवास पर एकत्रित हुए और अंतिम संस्कार में शामिल हुए।' उन्होंने आगे कहा, 'अनुराग मेरे बैचमेट थे — हम केवल साथ काम ही नहीं करते थे, बल्कि साथ रहते भी थे। उनके जैसा योद्धा कम होता है।'

1984 दंगा एसआईटी और सुप्रीम कोर्ट का विशेष भरोसा

असीम अरुण ने दिवंगत अधिकारी की पेशेवर विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 1984 के दंगों की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) की अगुआई अनुराग कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'शायद ही ऐसा कोई उदाहरण हो जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने नाम लेकर कहा हो कि सीबीआई में कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वे इस जाँच में बने रहेंगे। इससे बड़ी गौरव और विश्वास की बात और क्या हो सकती है?'

मंत्री ने बताया कि अनुराग ने इस संवेदनशील मामले को न केवल पूरा किया, बल्कि दोषियों को सजा भी दिलाई। उन्होंने कहा, 'उनके जैसा व्यक्ति मैंने दूसरा नहीं देखा।'

संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु, जाँच की माँग

गौरतलब है कि 20 जुलाई को त्रिपुरा राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने चैंबर से जुड़े बाथरूम में डीजीपी अनुराग संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। उन्हें अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया। त्रिपुरा सरकार ने उनके सम्मान में मंगलवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

मंत्री असीम अरुण ने कहा, 'इस घटनाक्रम के बारे में हम सभी गहराई से जानना चाहते हैं। मुझे जानकारी मिली है कि जाँच का आदेश दिया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि त्रिपुरा सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।

राजकीय सम्मान और शोक

त्रिपुरा सरकार ने डीजीपी अनुराग की असामयिक मृत्यु पर एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित उनके सहयोगी और परिवारजन अंतिम संस्कार में उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर होने वाली अप्रत्याशित मौतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार, मृत्यु की परिस्थितियों की जाँच का आदेश दिया जा रहा है। त्रिपुरा पुलिस और राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। मंत्री असीम अरुण समेत उनके तमाम सहयोगी और परिवार पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि जाँच स्वतंत्र होगी या नहीं — और क्या उनके अधूरे कार्य को वही प्राथमिकता मिलेगी जो उन्हें मिली थी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग की मृत्यु कैसे हुई?
20 जुलाई को त्रिपुरा राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने चैंबर से जुड़े बाथरूम में डीजीपी अनुराग संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए। उन्हें अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया। मृत्यु की परिस्थितियों की जाँच के आदेश दिए जा रहे हैं।
असीम अरुण कौन हैं और उनका डीजीपी अनुराग से क्या संबंध था?
असीम अरुण उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और दिवंगत डीजीपी अनुराग के बैचमेट थे। उन्होंने बताया कि दोनों न केवल साथ काम करते थे, बल्कि साथ रहते भी थे।
1984 दंगा एसआईटी में डीजीपी अनुराग की क्या भूमिका थी?
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित 1984 दंगा एसआईटी का नेतृत्व डीजीपी अनुराग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने नाम लेकर निर्देश दिया था कि सीबीआई में कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वे इस जाँच को जारी रखेंगे — एक दुर्लभ सम्मान। उन्होंने इस मामले को पूरा कर दोषियों को सजा भी दिलाई।
त्रिपुरा सरकार ने डीजीपी अनुराग की मृत्यु पर क्या कदम उठाए?
त्रिपुरा सरकार ने उनके सम्मान में मंगलवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। इसके अलावा, मृत्यु की परिस्थितियों की जाँच का आदेश दिया जा रहा है।
क्या डीजीपी अनुराग की मृत्यु की जाँच होगी?
मंत्री असीम अरुण के अनुसार, मामले में जाँच का आदेश दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि त्रिपुरा सरकार और पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेगी। हालाँकि, अभी तक कोई पुख्ता निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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