त्रिपुरा निकाय चुनाव 2026: 879 उम्मीदवारों ने भरे नामांकन, भाजपा 345 प्रत्याशियों के साथ सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा में 27 नवंबर 2026 को होने वाले शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनाव के लिए सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के कुल 879 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सर्वाधिक 345 प्रत्याशी उतारकर मैदान में सबसे मज़बूत स्थिति में है। 6 नवंबर 2026 को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख समाप्त हुई।
मुख्य घटनाक्रम
त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि राज्य के आठ जिलों में 21 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव कराए जाएंगे, जिनमें अगरतला नगर निगम (AMC) भी शामिल है। 7 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि उम्मीदवार 10 नवंबर तक अपने नाम वापस ले सकेंगे।
आँकड़ों के अनुसार, भाजपा के 345 उम्मीदवारों के बाद माकपा (CPI-M) ने 263 और कांग्रेस (INC) ने 221 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने 15 उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि 35 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी नामांकन दाखिल किया है।
पाँच निकायों में विपक्ष का बहिष्कार और आरोप
उल्लेखनीय है कि पाँच नगर निकायों में विपक्षी दलों का एक भी उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं है। इनमें धलाई जिले का कमालपुर, दक्षिण त्रिपुरा जिले का शांतिर बाजार, तथा पश्चिम त्रिपुरा जिले के रानीर बाजार, जिरानिया और मोहनपुर शामिल हैं।
माकपा और कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि इन पाँचों निकायों में सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं ने विपक्षी उम्मीदवारों और उनके प्रस्तावकों को धमकियाँ दीं, जिससे वे चुनाव में भाग नहीं ले सके। भाजपा ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
मतदाताओं की संख्या और सीटों का आरक्षण
निर्वाचन आयोग के अनुसार, 27 नवंबर के मतदान में कुल 6,29,903 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इनमें 3,21,743 महिलाएँ, 3,08,115 पुरुष और 45 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
कुल 345 सीटों में से 162 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति (SC) के लिए 80 सीटें और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 9 सीटें आरक्षित की गई हैं। अकेले अगरतला नगर निगम में 51 सीटें हैं।
चुनावी समय-सारिणी
सभी 21 शहरी स्थानीय निकायों का मौजूदा कार्यकाल 9 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। मतगणना 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित है। यह चुनाव त्रिपुरा में भाजपा की शहरी पकड़ का एक और अहम परीक्षण माना जा रहा है।