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त्रिपुरा में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: CM माणिक साहा बोले — दोषसिद्धि दर 11.7% से बढ़कर 14.7% हुई

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त्रिपुरा में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: CM माणिक साहा बोले — दोषसिद्धि दर 11.7% से बढ़कर 14.7% हुई

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा में साफ कहा — नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, चाहे दोषी कोई भी हो। दोषसिद्धि दर 11.7% से 14.7% पहुँची, पर गोल्डन ट्रायंगल से जुड़ी तस्करी और रेल मार्ग से आ रहे सिंथेटिक ड्रग्स की चुनौती अभी भी बड़ी है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 28 अगस्त को विधानसभा में मादक पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की पुष्टि की।
ड्रग तस्करों की दोषसिद्धि दर 2023 में 11.7% से बढ़कर जुलाई 2025 तक 14.7% हो गई।
राज्य पुलिस ने NDPS अधिनियम, 1985 के तहत मामलों की जाँच के लिए विशेष इकाई गठित की।
कांग्रेस विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने रेल मार्ग से तस्करी और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता का आरोप लगाया।
मिजोरम और मणिपुर पूर्वोत्तर में ड्रग तस्करी के प्रमुख गलियारे; म्यांमार सीमा और गोल्डन ट्रायंगल की निकटता बड़ी चुनौती।
कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप की बांग्लादेश के लिए सीमा पार तस्करी भी जारी।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार, 28 अगस्त को त्रिपुरा विधानसभा के मानसून सत्र में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप इस वर्ष जुलाई तक दोषसिद्धि दर 14.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो 2023 में केवल 11.7 प्रतिशत थी।

विधानसभा में उठा सवाल

मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने राज्य में बढ़ती नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर सरकार से जवाब माँगा। रॉय ने आरोप लगाया कि रेल मार्ग के ज़रिए ड्रग्स की तस्करी हो रही है और यह कारोबार त्रिपुरा में बड़े पैमाने पर फैल चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी भी इस अवैध कारोबार में संलिप्त हैं।

मुख्यमंत्री साहा ने इस आरोप पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े किसी भी अवैध काम में शामिल व्यक्ति को — चाहे वह किसी भी विभाग से हो — किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।

सरकार की रणनीति और कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य पुलिस, सुरक्षा एजेंसियाँ और न्यायपालिका के बीच समन्वय को मज़बूत किया गया है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की जाँच के लिए राज्य पुलिस ने एक विशेष इकाई का गठन भी किया है। साथ ही, कानूनी कार्रवाई के समानांतर नशे के दुष्प्रभावों को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

साहा ने व्यक्तिगत स्तर पर अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों पर ध्यान रखें, ताकि वे नशे की लत से दूर रह सकें।

सिंथेटिक ड्रग्स और तस्करी के रास्ते

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भारत में प्रतिबंधित मेथामफेटामाइन गोलियाँ, हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से त्रिपुरा में तस्करी के ज़रिए पहुँचाए जाते हैं। हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स ने पारंपरिक और प्राकृतिक नशीले पदार्थों की जगह लेनी शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने बताया कि कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप — जिसका बांग्लादेश में नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल होता है — की भी सीमा पार तस्करी की जाती है।

पूर्वोत्तर में तस्करी का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, मिजोरम और मणिपुर पूर्वोत्तर भारत में ड्रग तस्करी के प्रमुख गलियारे बन चुके हैं। इसका मुख्य कारण म्यांमार के साथ उनकी लंबी और खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र की निकटता है — जो दुनिया के सबसे बड़े अवैध मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे पूर्वोत्तर में सिंथेटिक ड्रग्स के प्रसार को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें दोनों दबाव में हैं।

आने वाले समय में राज्य सरकार की विशेष इकाई की कार्यकुशलता और दोषसिद्धि दर में और सुधार ही यह तय करेगा कि जीरो टॉलरेंस की नीति ज़मीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा तब तक अधूरा है जब तक यह स्पष्ट न हो कि कितने मामले दर्ज हुए और कितने अदालत तक पहुँचे। गोल्डन ट्रायंगल से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला और म्यांमार की खुली सीमा एक ऐसी संरचनात्मक समस्या है जिसे केवल राज्य पुलिस की विशेष इकाई से नहीं सुलझाया जा सकता — इसके लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साथ ठोस खुफिया समन्वय ज़रूरी है। कांग्रेस का पुलिसकर्मियों की संलिप्तता वाला आरोप, यदि सत्यापित हो, तो यह सबसे बड़ी खामी है जिसे मुख्यमंत्री के बयान में पर्याप्त जवाब नहीं मिला।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा की जीरो टॉलरेंस ड्रग नीति क्या है?
यह राज्य सरकार की वह नीति है जिसके तहत मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति — चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी कर्मचारी — के खिलाफ बिना किसी रियायत के कानूनी कार्रवाई की जाती है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 28 अगस्त को विधानसभा में इस नीति की पुष्टि की।
त्रिपुरा में ड्रग तस्करी की दोषसिद्धि दर कितनी है?
मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, दोषसिद्धि दर 2023 के 11.7% से बढ़कर जुलाई 2025 तक 14.7% हो गई है। पुलिस और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय को इसका कारण बताया गया है।
त्रिपुरा में ड्रग्स की तस्करी किन रास्तों से होती है?
पुलिस के अनुसार, मिजोरम और मणिपुर से होकर म्यांमार और गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र से मेथामफेटामाइन व हेरोइन त्रिपुरा पहुँचती है। कांग्रेस विधायक ने रेल मार्ग से तस्करी का भी आरोप लगाया है।
NDPS अधिनियम के तहत त्रिपुरा पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?
त्रिपुरा पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की जाँच के लिए एक विशेष इकाई गठित की है। इसके अलावा, पुलिस और न्यायपालिका के बीच समन्वय को भी मज़बूत किया गया है।
कांग्रेस ने त्रिपुरा सरकार की ड्रग नीति पर क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने आरोप लगाया कि रेल मार्ग से नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है और पुलिस के कुछ कर्मचारी भी इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। उन्होंने राज्य में ड्रग्स के व्यापक प्रसार पर चिंता जताई।
राष्ट्र प्रेस
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