20 सितंबर 2026
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इडुक्की भूस्खलन: कोट्टाकम्बूर में भारी बारिश से दो की मौत, एक घायल

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इडुक्की भूस्खलन: कोट्टाकम्बूर में भारी बारिश से दो की मौत, एक घायल

सारांश

केरल के इडुक्की जिले में मानसून का कहर — कोट्टाकम्बूर में तीन घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद भूस्खलन में बालकृष्णन और उनकी बहन चिन्नू की जान गई। यह घटना पेट्टिमुडी और कूम्बनपारा के बाद एक बार फिर इडुक्की की भूस्खलन-संवेदनशीलता को सामने लाती है।

मुख्य बातें

कोट्टाकम्बूर , वट्टावडा , इडुक्की में 20 सितंबर 2026 की शाम भूस्खलन से दो लोगों की मौत हुई।
मृतकों की पहचान बालकृष्णन और उनकी बहन चिन्नू के रूप में हुई; पत्नी मरियम्मा गंभीर रूप से घायल।
भारी बारिश, अस्थिर मिट्टी और दुर्गम इलाके के कारण बचाव अभियान में बड़ी चुनौतियाँ आईं।
मुन्नार से फायर एंड रेस्क्यू और देविकुलम से पुलिस ने राहत अभियान में भाग लिया।
इडुक्की में 6 अगस्त 2020 के पेट्टिमुडी भूस्खलन में 70 लोगों की जान गई थी — यह जिले का सबसे घातक हादसा था।
अधिकारियों ने भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और अस्थिर ढलानों से दूर रहने की सलाह दी।

इडुक्की जिले के वट्टावडा इलाके के कोट्टाकम्बूर गांव में 20 सितंबर 2026 की शाम करीब तीन घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद आए भूस्खलन में एक शेड मलबे में दब गया, जिससे दो लोगों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। यह दुखद घटना एक बार फिर केरल के इस पहाड़ी जिले में मानसून के दौरान भूस्खलन के बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है।

मृतकों की पहचान और घटनाक्रम

मरने वालों की पहचान कोट्टाकम्बूर निवासी बालकृष्णन और उनकी बहन चिन्नू के रूप में हुई है। बालकृष्णन की पत्नी मरियम्मा को मलबे से जीवित निकाला गया, हालांकि उनकी हालत गंभीर बताई गई और उन्हें तत्काल आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल भेजा गया।

आपातकालीन दल के पहुँचने से पहले ही स्थानीय निवासी मौके पर पहुँच गए और मिट्टी व मलबा हटाने का काम स्वयं शुरू कर दिया। बाद में मुन्नार से अग्निशमन एवं बचाव सेवा के कर्मी तथा देविकुलम से पुलिस अधिकारी भी राहत अभियान में शामिल हो गए।

बचाव अभियान की चुनौतियाँ

लगातार हो रही बारिश, अस्थिर मिट्टी और दुर्गम पहाड़ी इलाके ने बचाव दलों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं। अधिकारियों ने मिट्टी के और खिसकने की आशंका को देखते हुए आसपास की ढलानों पर कड़ी निगरानी रखी। बचाव दल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित क्षेत्र की तलाशी लेते रहे कि कहीं और कोई व्यक्ति मलबे में दबा तो नहीं है।

पुलिस, राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारी मौके का मुआयना करने और आसपास के निवासियों के लिए खतरों का आकलन करने में जुटे रहे।

इडुक्की में भूस्खलन का इतिहास

गौरतलब है कि इडुक्की जिला हाल के वर्षों में कई घातक भूस्खलन झेल चुका है। सबसे भीषण हादसा 6 अगस्त 2020 को राजमाला के निकट पेट्टिमुडी में हुआ था, जब मलबे से 66 शव बरामद किए गए और चार लापता व्यक्तियों को मृत मान लिया गया — यानी कुल 70 लोगों की जान गई थी।

इसी तरह, अक्टूबर 2025 में आदिमाली के पास कूम्बनपारा में आए भूस्खलन ने कोच्चि-धनुष्कोडी राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे कई घरों को दफना दिया था। उस हादसे में 48 वर्षीय बीजू की मलबे से निकाले जाने के बाद मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी संध्या को बचा लिया गया था और अनेक परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया था।

अधिकारियों की चेतावनी

अधिकारियों ने भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने और अस्थिर ढलानों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। आपातकालीन दल कोट्टाकम्बूर में तलाशी अभियान पूरा करने, प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने और खतरे वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए तैनात रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल के कई जिलों में मानसूनी वर्षा का दौर जारी है और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने पश्चिमी घाट के संवेदनशील इलाकों के लिए बारंबार चेतावनियाँ जारी की हैं। आने वाले दिनों में उच्च-जोखिम वाली ढलानों की निगरानी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हर बारिश में बचाव दल तैनात करना महज़ एक दोहराव बनकर रह जाता है। असली सवाल यह है कि आपदा-प्रवण ढलानों पर बसी आबादी के लिए दीर्घकालिक नीति कहाँ है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इडुक्की के कोट्टाकम्बूर में भूस्खलन कब और कैसे हुआ?
20 सितंबर 2026 की शाम वट्टावडा इलाके के कोट्टाकम्बूर में करीब तीन घंटे की भारी बारिश के बाद ढलान की मिट्टी खिसकने से भूस्खलन आया, जिसमें एक शेड मलबे में दब गया।
इस भूस्खलन में कितने लोगों की मौत हुई और कौन घायल हुआ?
भूस्खलन में बालकृष्णन और उनकी बहन चिन्नू की मौत हुई। बालकृष्णन की पत्नी मरियम्मा को गंभीर हालत में मलबे से निकाला गया और आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल भेजा गया।
बचाव अभियान में किसने भाग लिया?
स्थानीय लोगों ने आपातकालीन दल के पहुँचने से पहले ही मलबा हटाना शुरू किया। बाद में मुन्नार से अग्निशमन एवं बचाव सेवा के कर्मी, देविकुलम से पुलिस अधिकारी, तथा पुलिस, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभागों की टीमें भी अभियान में शामिल हुईं।
इडुक्की में इससे पहले कौन-कौन से बड़े भूस्खलन हुए हैं?
6 अगस्त 2020 को राजमाला के पास पेट्टिमुडी में हुए भूस्खलन में 70 लोगों की जान गई थी, जो जिले का अब तक का सबसे घातक हादसा है। अक्टूबर 2025 में आदिमाली के पास कूम्बनपारा में भूस्खलन से एक व्यक्ति की मौत हुई और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए।
अधिकारियों ने इलाके के निवासियों को क्या सलाह दी है?
अधिकारियों ने भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने, अस्थिर ढलानों से दूर रहने और आपातकालीन दलों के निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी है। खतरे वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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