इडुक्की भूस्खलन: कोट्टाकम्बूर में भारी बारिश से दो की मौत, एक घायल
सारांश
मुख्य बातें
इडुक्की जिले के वट्टावडा इलाके के कोट्टाकम्बूर गांव में 20 सितंबर 2026 की शाम करीब तीन घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद आए भूस्खलन में एक शेड मलबे में दब गया, जिससे दो लोगों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। यह दुखद घटना एक बार फिर केरल के इस पहाड़ी जिले में मानसून के दौरान भूस्खलन के बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है।
मृतकों की पहचान और घटनाक्रम
मरने वालों की पहचान कोट्टाकम्बूर निवासी बालकृष्णन और उनकी बहन चिन्नू के रूप में हुई है। बालकृष्णन की पत्नी मरियम्मा को मलबे से जीवित निकाला गया, हालांकि उनकी हालत गंभीर बताई गई और उन्हें तत्काल आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल भेजा गया।
आपातकालीन दल के पहुँचने से पहले ही स्थानीय निवासी मौके पर पहुँच गए और मिट्टी व मलबा हटाने का काम स्वयं शुरू कर दिया। बाद में मुन्नार से अग्निशमन एवं बचाव सेवा के कर्मी तथा देविकुलम से पुलिस अधिकारी भी राहत अभियान में शामिल हो गए।
बचाव अभियान की चुनौतियाँ
लगातार हो रही बारिश, अस्थिर मिट्टी और दुर्गम पहाड़ी इलाके ने बचाव दलों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं। अधिकारियों ने मिट्टी के और खिसकने की आशंका को देखते हुए आसपास की ढलानों पर कड़ी निगरानी रखी। बचाव दल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित क्षेत्र की तलाशी लेते रहे कि कहीं और कोई व्यक्ति मलबे में दबा तो नहीं है।
पुलिस, राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारी मौके का मुआयना करने और आसपास के निवासियों के लिए खतरों का आकलन करने में जुटे रहे।
इडुक्की में भूस्खलन का इतिहास
गौरतलब है कि इडुक्की जिला हाल के वर्षों में कई घातक भूस्खलन झेल चुका है। सबसे भीषण हादसा 6 अगस्त 2020 को राजमाला के निकट पेट्टिमुडी में हुआ था, जब मलबे से 66 शव बरामद किए गए और चार लापता व्यक्तियों को मृत मान लिया गया — यानी कुल 70 लोगों की जान गई थी।
इसी तरह, अक्टूबर 2025 में आदिमाली के पास कूम्बनपारा में आए भूस्खलन ने कोच्चि-धनुष्कोडी राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे कई घरों को दफना दिया था। उस हादसे में 48 वर्षीय बीजू की मलबे से निकाले जाने के बाद मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी संध्या को बचा लिया गया था और अनेक परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया था।
अधिकारियों की चेतावनी
अधिकारियों ने भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने और अस्थिर ढलानों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। आपातकालीन दल कोट्टाकम्बूर में तलाशी अभियान पूरा करने, प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने और खतरे वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए तैनात रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल के कई जिलों में मानसूनी वर्षा का दौर जारी है और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने पश्चिमी घाट के संवेदनशील इलाकों के लिए बारंबार चेतावनियाँ जारी की हैं। आने वाले दिनों में उच्च-जोखिम वाली ढलानों की निगरानी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित रहेगा।