यूसीसी से देश में समानता की दिशा में एक कदम, बंगाल में सांस्कृतिक आपातकाल का खतरा: शायना एनसी
सारांश
Key Takeaways
- यूसीसी को समानता और न्याय के लिए आवश्यक माना गया है।
- पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक आपातकाल की स्थिति पर चिंता जताई गई है।
- महिलाओं को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।
मुंबई, २ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना की नेता शायना एनसी ने कई मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय प्रकट की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) से संबंधित बयान का समर्थन किया। इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया।
शायना एनसी ने कहा कि पूरे देश, विशेष रूप से असम जैसे राज्यों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता है। जब 'सभी के लिए न्याय और किसी का तुष्टीकरण नहीं' की बात की जाती है, तो उसकी वास्तविक शुरुआत यूसीसी से होती है। उन्होंने इसे समानता और न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे देश में एकरूपता और न्यायिक संतुलन स्थापित होगा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के आंतरिक मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शायना ने कहा कि यह पूरी तरह से एनसीपी का अंतरदृष्टि का मामला है। ऐसे विवादों के समाधान के लिए चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान मौजूद हैं और वही इस पर उचित निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने इस विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी से बचने की बात की।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बात करते हुए शायना एनसी ने भाजपा सांसद हेमा मालिनी के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी को एक सांस्कृतिक दूत के रूप में जाना जाता है और देश के सभी राज्यों में उनका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार यह सुनिश्चित करती है कि उनके कार्यक्रमों में बाधाएं उत्पन्न हों और उन्हें सुचारू रूप से आयोजित न होने दिया जाए। शायना एनसी ने इसे सांस्कृतिक आपातकाल की स्थिति बताया और कहा कि यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि महिलाओं के सम्मान के दृष्टिकोण से भी गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक महिला को दूसरी महिला का समर्थन करना चाहिए, लेकिन पश्चिम बंगाल में जो परिस्थितियां हैं, वे इसके विपरीत हैं। शायना एनसी ने कहा कि राज्य की महिलाएं इन घटनाओं को देख रही हैं और आने वाले चुनावों में इसका प्रभाव मतदान पर भी पड़ सकता है।