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यूपी के 6.18 लाख ग्रामीण गरीबों को पक्के मकान, रबी फसल एमएसपी खरीद 8 जुलाई तक बढ़ी

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यूपी के 6.18 लाख ग्रामीण गरीबों को पक्के मकान, रबी फसल एमएसपी खरीद 8 जुलाई तक बढ़ी

सारांश

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक ही दिन में यूपी को दो बड़ी सौगातें दीं — 6.18 लाख पक्के मकानों की स्वीकृति और रबी फसल MSP खरीद 8 जुलाई तक बढ़ाना। एल नीनो की चेतावनी के बीच वैज्ञानिक कृषि रोडमैप भी तैयार होगा।

मुख्य बातें

शिवराज सिंह चौहान ने 25 जून 2025 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो स्वीकृति-पत्र सौंपे।
PMAY-G के 2024-25 से 2028-29 चरण के तहत उत्तर प्रदेश को 6,18,482 पक्के मकान आवंटित किए गए।
गेहूं, चना और मसूर की MSP पर खरीद की अवधि बढ़ाकर 8 जुलाई 2026 तक की गई।
उत्तर प्रदेश देश के कुल गेहूं उत्पादन में लगभग 38% का योगदान करता है।
इस वर्ष एल नीनो के संकेतों के मद्देनज़र जिला-वार आकस्मिक कृषि योजना और वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर रोडमैप को अंतिम रूप देंगी, जिसमें फसल चक्र, जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलें शामिल होंगी।

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 जून 2025 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो अलग-अलग स्वीकृति-पत्र सौंपे — पहला, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण गरीबों के लिए 6,18,482 पक्के मकानों की मंजूरी; और दूसरा, गेहूं, चना और मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की अवधि 8 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का आदेश। यह दोनों फैसले एक साथ आने से राज्य के लाखों ग्रामीण परिवारों और किसानों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य घटनाक्रम: 6.18 लाख पक्के मकानों की स्वीकृति

चौहान ने बताया कि यह आवंटन PMAY-G के 2024-25 से 2028-29 तक के नए चरण के अंतर्गत दिया गया है, जिसके तहत केंद्र सरकार देशभर में अतिरिक्त 2 करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उत्तर प्रदेश को इसमें से 6,18,482 मकान आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में ग्रामीण परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र गरीब परिवारों की पहचान कर ली गई है। अब इन पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र की ओर से पूर्ण वित्तीय और तकनीकी सहयोग का भरोसा भी दिलाया गया है, साथ ही समयबद्ध निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया।

गौरतलब है कि यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबके लिए आवास' मिशन के अनुरूप है, जो 2016 से चली आ रही PMAY-G योजना का विस्तार है।

किसानों को राहत: एमएसपी खरीद 8 जुलाई तक बढ़ी

किसानों के हित में लिए गए दूसरे बड़े फैसले के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर गेहूं, चना और मसूर की MSP पर खरीद की अवधि बढ़ाकर 8 जुलाई 2026 तक कर दी गई है। चौहान ने कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों, मंडियों में भीड़, तौल में देरी और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण कोई भी किसान MSP से कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न हो, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया।

चौहान ने उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी कृषि राज्य बताते हुए कहा कि देश के कुल गेहूं उत्पादन में लगभग 38 प्रतिशत योगदान अकेले उत्तर प्रदेश का है। ऐसे में MSP खरीद की समयसीमा बढ़ाना राज्य के लाखों किसानों के लिए व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण है।

एल नीनो की चेतावनी और कृषि रोडमैप

बैठक में जलवायु संकट पर भी गंभीर चर्चा हुई। चौहान ने कहा कि इस वर्ष एल नीनो के संकेत दिखाई दे रहे हैं और अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है; आगे भी वर्षा में कमी की आशंका है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और भूजल स्तर में गिरावट को खेती के लिए गंभीर चुनौती बताया गया।

इसी के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश के लिए एक वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें फसल चक्र, सिंचाई, जल संरक्षण, बीज, तकनीक और विपणन रणनीतियाँ शामिल होंगी। यह रोडमैप केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अंतिम रूप देंगी।

आम जनता पर असर

बैठक में जिला-वार आकस्मिक योजना तैयार करने का फैसला लिया गया, जिसमें कम अवधि और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। स्थानीय जल उपलब्धता, मिट्टी की स्थिति और मौजूदा फसल पैटर्न के आधार पर वैकल्पिक फसलों की सूची तैयार होगी। किसानों को समय पर सलाह, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से विशेष व्यवस्था की जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आवास की माँग और कृषि संकट दोनों एक साथ चरम पर हैं। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उनकी टीम के साथ विस्तृत चर्चा की गई।

क्या होगा आगे

PMAY-G के तहत पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर मकान आवंटन की प्रक्रिया अब शुरू होगी। MSP खरीद 8 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी, जिससे किसानों को अपनी रबी फसल उचित दाम पर बेचने का पर्याप्त समय मिलेगा। वैज्ञानिक कृषि रोडमैप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी आने वाले हफ्तों में पूरी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसका कोई स्पष्ट सार्वजनिक लेखा-जोखा नहीं दिया गया। MSP खरीद की समयसीमा बढ़ाना राहत ज़रूर है, पर यह मूल समस्या — अपर्याप्त खरीद केंद्र, तौल में देरी, बिचौलियों का दबाव — को संबोधित नहीं करता। एल नीनो की चेतावनी के बीच वैज्ञानिक कृषि रोडमैप की बात स्वागत योग्य है, लेकिन ऐसे रोडमैप पहले भी बनते रहे हैं; क्रियान्वयन की जवाबदेही तय किए बिना ये कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत यूपी को कितने मकान मिले हैं?
PMAY-G के 2024-25 से 2028-29 के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश को 6,18,482 पक्के मकान आवंटित किए गए हैं। यह आवंटन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 जून 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे गए पत्र के माध्यम से दिया।
यूपी में रबी फसल की MSP खरीद कब तक बढ़ाई गई है?
गेहूं, चना और मसूर की MSP पर खरीद की अवधि अब 8 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों तथा मंडियों में व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए लिया गया।
इन मकानों का लाभ किसे मिलेगा और प्रक्रिया क्या है?
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र गरीब परिवारों की पहचान कर ली गई है। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे।
एल नीनो का यूपी की खेती पर क्या असर पड़ सकता है?
इस वर्ष एल नीनो के संकेत दिखाई दे रहे हैं और अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है; आगे भी वर्षा में कमी की आशंका है। इससे निपटने के लिए जिला-वार आकस्मिक कृषि योजना तैयार की जाएगी, जिसमें कम पानी वाली और कम अवधि की वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के लिए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप में क्या शामिल होगा?
इस रोडमैप में फसल चक्र, सिंचाई, जल संरक्षण, बीज, तकनीक और विपणन रणनीतियाँ शामिल होंगी। इसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अंतिम रूप देंगी और कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य कृषि विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के माध्यम से लागू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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