यूपी में गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का खतरा, गन्ना विकास विभाग ने जारी किया अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने 5 मई 2026 को गन्ने की फसल में चूसक कीटों के बढ़ते प्रकोप को लेकर किसानों के लिए आधिकारिक अलर्ट जारी किया है। अपर गन्ना आयुक्त वी.के. शुक्ला के अनुसार, अधिक तापमान और शुष्क मौसम के कारण इस समय गन्ने की पौध और पेड़ी फसल दोनों पर चूसक कीटों का खतरा मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने कीटों की पहचान, उनके लक्षण और प्रभावी नियंत्रण के उपाय विस्तार से साझा किए हैं।
किन कीटों से है खतरा
शोध परिषद ने मुख्यतः तीन प्रकार के चूसक कीटों की पहचान की है — काला चिकटा, थ्रिप्स और सैनिक कीट। काला चिकटा काले रंग का होता है और इसका प्रकोप सामान्यतः अप्रैल से जून के बीच, विशेष रूप से पेड़ी फसल में अधिक देखा जाता है। इसके प्रौढ़ और शिशु दोनों पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे उभर आते हैं, साथ ही गन्ने की बढ़वार रुक जाती है।
थ्रिप्स कीट आकार में बेहद छोटे — लगभग 2-3 मिमी — होते हैं। मादा कीट गहरे भूरे और नर हल्के रंग के होते हैं। ये पत्ती की ऊपरी सतह के भीतर अंडे देते हैं और निम्फ अवस्था में पत्तियों का रस चूसते हैं। प्रभावित पत्तियाँ ऊपर से नीचे की ओर सफेद या पीली पड़ने लगती हैं और उनका अग्रभाग मुड़कर नुकीला हो जाता है। उल्लेखनीय है कि बारिश शुरू होते ही इनकी आबादी में स्वाभाविक कमी आने लगती है।
सैनिक कीट की सूड़ी अवस्था गन्ने की पत्तियों को कुतरकर खाती है। मादा कीट पत्रकंचुक में समूह में अंडे देती है और इसका प्रकोप पेड़ी फसल में अधिक पाया जाता है।
फसल और उत्पादकता पर असर
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन कीटों के कारण गन्ने की वृद्धि और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और किसानों की आर्थिक स्थिति काफी हद तक इस फसल पर निर्भर करती है। गौरतलब है कि अधिक तापमान और शुष्क मौसम की स्थितियाँ इन कीटों के तेज़ी से फैलने के लिए अनुकूल होती हैं।
नियंत्रण के उपाय
शोध वैज्ञानिकों ने किसानों को निम्नलिखित उपाय अपनाने की सलाह दी है:
खेत की नियमित अंतराल पर सिंचाई करते रहें और खेत को खरपतवार तथा गन्ने की सूखी पत्तियों से मुक्त रखें। संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए सुबह या शाम के समय प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेन्थिन 4% ई.सी. का 750 मिली (संयुक्त उत्पाद) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल का 200 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।
सरकार की पहल
योगी सरकार गन्ना किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है और यह अलर्ट उसी दिशा में एक सक्रिय कदम है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जागरूकता और उचित कीट प्रबंधन से फसल की क्षति को काफी हद तक रोका जा सकता है। आने वाले हफ्तों में मानसून की दस्तक से थ्रिप्स के प्रकोप में स्वाभाविक कमी की उम्मीद है, लेकिन तब तक सतर्कता बेहद ज़रूरी है।