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UP के महाराजगंज, मिर्जापुर, बस्ती में 13-14 घंटे बिजली कटौती, हीटवेव में जनजीवन बेहाल

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UP के महाराजगंज, मिर्जापुर, बस्ती में 13-14 घंटे बिजली कटौती, हीटवेव में जनजीवन बेहाल

सारांश

भीषण हीटवेव के बीच उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, मिर्जापुर और बस्ती में 13-14 घंटे तक बिजली गुल — किसानों के पंपिंग सेट बंद, लोग रात में बाहर सोने को मजबूर। विधायक पर सवाल, एक जूनियर इंजीनियर को नोटिस, लेकिन राहत अभी दूर।

मुख्य बातें

महाराजगंज , मिर्जापुर और बस्ती जिलों में हीटवेव के बीच दिनभर में 13 से 14 घंटे बिजली कटौती जारी।
मिर्जापुर में प्रतिदिन केवल 4 से 5 घंटे बिजली आपूर्ति; बस्ती में लोग रात को घर के बाहर सोने को मजबूर।
किसानों के पंपिंग सेट बंद — न पर्याप्त बिजली, न डीजल; फसलों को नुकसान की आशंका।
महाराजगंज के सोनौली क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर को कथित लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी।
बिजली विभाग ने फॉल्ट में वृद्धि और कर्मचारियों की कमी को संकट की मुख्य वजह बताया।
विधायक ऋषि त्रिपाठी ने सुधार कार्य जारी होने का दावा किया; निवासियों ने जनआंदोलन की चेतावनी दी।

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, मिर्जापुर और बस्ती जिलों में भीषण हीटवेव के बीच लंबे बिजली कटौती संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। 24 मई 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इन जिलों में दिनभर में 13 से 14 घंटे तक बिजली गुल रहने से खेती-किसानी, कारोबार और घरेलू जीवन सभी चरमरा गए हैं। बिजली विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि तेज गर्मी के कारण फॉल्ट की संख्या बढ़ी है और कर्मचारियों की कमी भी स्थिति को और बिगाड़ रही है।

महाराजगंज में सबसे गंभीर हालात

महाराजगंज जिले में स्थानीय निवासियों की नाराजगी सबसे अधिक देखी जा रही है। निवासियों के अनुसार दिन में 13 से 14 घंटे बिजली नहीं रहती, और रात में भी तीन से चार घंटे की कटौती से नींद तक दूभर हो गई है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि 'भीषण गर्मी में बच्चों का हाल बेहाल है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'जब राजधानी लखनऊ में ही बिजली संकट है तो छोटे शहरों और कस्बों में राहत की उम्मीद कैसे की जा सकती है।'

एक अन्य निवासी ने आरोप लगाया कि 'बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं दिख रही।' उन्होंने दावा किया कि न विधायक और न ही सांसद इस मुद्दे पर कोई ठोस हस्तक्षेप कर पाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो 'बड़ा जनआंदोलन शुरू हो सकता है।'

किसानों पर दोहरी मार

बिजली संकट का सबसे गंभीर असर किसानों पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार किसानों को न डीजल मिल पा रहा है और न पर्याप्त बिजली, जिससे खेतों में लगे पंपिंग सेट बंद पड़े हैं। गर्मी के मौसम में सिंचाई न हो पाने से फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पहले से ही हीटवेव की स्थिति बनी हुई है।

मिर्जापुर और बस्ती की स्थिति

मिर्जापुर में निवासियों का कहना है कि दिनभर में केवल चार से पाँच घंटे ही बिजली मिल रही है। गर्मी के कारण रात में सोना मुश्किल हो गया है और ठंडा पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा।

बस्ती जिले के भुअर निरंजनपुर गाँव और महसो रोड इलाके में लोग रात में बिजली न रहने के कारण घरों के बाहर सोने को मजबूर हैं। बस्ती के अधिकारियों ने माना है कि कर्मचारियों की कमी भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की एक बड़ी वजह है।

विधायक और विभाग की प्रतिक्रिया

महाराजगंज के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने कहा कि 'भीषण गर्मी के कारण कई इलाकों से लगातार फॉल्ट की शिकायतें आ रही हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 'फॉल्ट की वजह से बिजली सप्लाई रोकनी पड़ती है, लेकिन विभाग लगातार सुधार कार्य में जुटा हुआ है।' उन्होंने यह भी बताया कि जहाँ भी शिकायत मिलती है, वहाँ इंजीनियर तुरंत समाधान की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि महाराजगंज के सोनौली क्षेत्र में तैनात एक जूनियर इंजीनियर को कथित लापरवाही के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि बिजली कटौती के दौरान वह ड्यूटी से गायब रहे और स्थानीय विधायक के फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया।

आगे की राह

भीषण गर्मी का दौर अभी जारी है और राहत के आसार निकट भविष्य में कम दिख रहे हैं। प्रभावित जिलों के निवासी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और बिजली व्यवस्था में स्थायी सुधार की माँग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में बढ़ती माँग के अनुरूप बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किए बिना ऐसे संकट हर साल दोहराते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

कर्मचारी कम, और जवाबदेही शून्य। महाराजगंज में एक जूनियर इंजीनियर को नोटिस जारी करना प्रशासनिक कार्रवाई का प्रतीक ज़रूर है, लेकिन यह उस बुनियादी ढाँचागत विफलता को नहीं छुपा सकता जो हर साल लाखों लोगों को झुलसाती है। 'डबल इंजन सरकार' का दावा तब खोखला लगता है जब किसानों के पंपिंग सेट बंद पड़े हों और लोग रात में छत के नीचे भी सो न सकें। असली सवाल यह है कि ग्रीष्मकालीन माँग के अनुरूप बुनियादी ढाँचे में निवेश कब होगा — और क्या इस बार कोई जवाबदेही तय होगी या अगली गर्मी तक सब भुला दिया जाएगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश के किन जिलों में बिजली कटौती सबसे गंभीर है?
महाराजगंज, मिर्जापुर और बस्ती जिलों में स्थिति सबसे गंभीर है। महाराजगंज में दिनभर में 13 से 14 घंटे और रात में भी 3 से 4 घंटे बिजली नहीं रहती, जबकि मिर्जापुर में केवल 4 से 5 घंटे आपूर्ति हो रही है।
बिजली कटौती के पीछे क्या कारण बताए जा रहे हैं?
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार भीषण गर्मी के कारण फॉल्ट की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इसके अलावा बस्ती के अधिकारियों ने कर्मचारियों की कमी को भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की एक बड़ी वजह माना है।
किसानों पर बिजली संकट का क्या असर पड़ रहा है?
बिजली कटौती के कारण खेतों में लगे पंपिंग सेट बंद पड़े हैं और किसानों को न पर्याप्त बिजली मिल रही है और न डीजल। हीटवेव के दौरान सिंचाई न हो पाने से फसलों को नुकसान होने की गंभीर आशंका है।
महाराजगंज में जूनियर इंजीनियर को नोटिस क्यों दिया गया?
सोनौली क्षेत्र में तैनात एक जूनियर इंजीनियर को कथित लापरवाही के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि बिजली कटौती के दौरान वह ड्यूटी से गायब रहे और स्थानीय विधायक के फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया।
स्थानीय विधायक ने बिजली संकट पर क्या कहा?
महाराजगंज के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने कहा कि भीषण गर्मी के कारण फॉल्ट की शिकायतें बढ़ी हैं और फॉल्ट की वजह से बिजली सप्लाई रोकनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग लगातार सुधार कार्य में जुटा है और इंजीनियर शिकायतों पर तुरंत समाधान की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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