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यूपीएमआरसी का ऐतिहासिक कदम: मेट्रो टेक्नोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू, भारत में पहली बार

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यूपीएमआरसी का ऐतिहासिक कदम: मेट्रो टेक्नोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू, भारत में पहली बार

सारांश

यूपीएमआरसी ने मेट्रो क्षेत्र में ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर देश में पहली मिसाल कायम की है। ₹200 की किफायती फीस और वैश्विक नामांकन सुविधा के साथ यह पहल भारत के 1,095 किमी लंबे मेट्रो नेटवर्क की बढ़ती तकनीकी माँग को पूरा करने का प्रयास है।

मुख्य बातें

यूपीएमआरसी मेट्रो क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने वाला देश का पहला मेट्रो संगठन बना।
पहले चरण में एक दर्जन से अधिक कोर्स शुरू; रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग, ट्रैक मेंटेनेंस और एएफसी जैसे विषय शामिल।
भारतीय प्रतिभागियों के लिए शुल्क ₹200 प्रति कोर्स; विदेशी प्रतिभागियों के लिए 100 अमेरिकी डॉलर ।
भारत में 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं; नेटवर्क 1,095 किलोमीटर से अधिक — विश्व में तीसरा सबसे बड़ा ।
पहल स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप; विश्वभर के इंजीनियर, छात्र और तकनीकी पेशेवर ऑनलाइन नामांकन कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने 29 जुलाई 2026 को मेट्रो क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर एक नया इतिहास रचा है। इस पहल के साथ यूपीएमआरसी देश का पहला मेट्रो संगठन बन गया है जिसने मेट्रो टेक्नोलॉजी में ऑनलाइन तकनीकी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। लखनऊ से संचालित यह पहल केंद्र सरकार के स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बुधवार को इन ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्सों का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं और तकनीकी पेशेवरों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। पहले चरण में एक दर्जन से अधिक ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं।

इन पाठ्यक्रमों में रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग, ट्रैक मेंटेनेंस और ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) सहित मेट्रो संचालन से जुड़े कई तकनीकी विषय शामिल हैं। आने वाले समय में मेट्रो योजना, निर्माण, संचालन, रखरखाव, सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों से संबंधित अतिरिक्त पाठ्यक्रम भी जोड़े जाएंगे।

कौन ले सकता है भाग

इन कोर्सों में इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, कंसल्टेंट, ठेका कंपनियों के कर्मचारी, इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र और मेट्रो सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक युवा दुनिया के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन भाग ले सकते हैं। भारतीय और विदेशी — दोनों प्रतिभागियों के लिए नामांकन की सुविधा उपलब्ध है।

फीस संरचना को किफायती रखा गया है: भारतीय प्रतिभागियों के लिए प्रति कोर्स शुल्क ₹200 और विदेशी प्रतिभागियों के लिए 100 अमेरिकी डॉलर निर्धारित किया गया है। इच्छुक अभ्यर्थी यूपीएमआरसी की आधिकारिक वेबसाइट के 'ऑनलाइन कोर्स' अनुभाग के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।

भारत का मेट्रो विस्तार और वैश्विक माँग

इस समय भारत के 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं और देश का परिचालित मेट्रो नेटवर्क 1,095 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका है। इसके साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों सहित दुनिया के कई हिस्सों में नई मेट्रो परियोजनाओं के तेज विस्तार के कारण प्रशिक्षित इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की माँग लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि यूपीएमआरसी की यह पहल केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है — यह वैश्विक मेट्रो बाज़ार में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता को स्थापित करने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

प्रबंध निदेशक सुशील कुमार के अनुसार, 'भारत और दुनिया में मेट्रो नेटवर्क जिस गति से विस्तार कर रहा है, उसे देखते हुए विशेष तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव वाले प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।' उन्होंने आगे कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्सों के माध्यम से यूपीएमआरसी अपनी तकनीकी विशेषज्ञता वैश्विक स्तर तक पहुँचाएगा।

आगे की राह

यूपीएमआरसी की योजना है कि आने वाले चरणों में मेट्रो योजना, निर्माण और सुरक्षा से जुड़े और अधिक पाठ्यक्रम जोड़े जाएंगे। यह पहल स्किल इंडिया मिशन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में प्रमाणित पेशेवर तैयार करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी नामांकन की संख्या और प्रमाणपत्र की उद्योग-स्वीकार्यता होगी। ₹200 की फीस पहुँच को लोकतांत्रिक बनाती है, परंतु यह सवाल बना रहता है कि क्या ये कोर्स केवल जागरूकता तक सीमित रहेंगे या वास्तव में नियोक्ताओं द्वारा मान्यता प्राप्त योग्यता बनेंगे। भारत का मेट्रो नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है, पर तकनीकी प्रतिभा का अभाव एक वास्तविक बाधा है — यूपीएमआरसी की पहल इस खाई को पाटने की दिशा में सही है, बशर्ते पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और मान्यता सुनिश्चित की जाए।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीएमआरसी के ऑनलाइन मेट्रो सर्टिफिकेट कोर्स क्या हैं?
यूपीएमआरसी ने मेट्रो टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए हैं, जिनमें रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग, ट्रैक मेंटेनेंस और एएफसी जैसे विषय शामिल हैं। पहले चरण में एक दर्जन से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं और भविष्य में और विषय जोड़े जाएंगे।
इन कोर्सों की फीस कितनी है और नामांकन कैसे करें?
भारतीय प्रतिभागियों के लिए प्रति कोर्स शुल्क ₹200 और विदेशी प्रतिभागियों के लिए 100 अमेरिकी डॉलर निर्धारित है। इच्छुक अभ्यर्थी यूपीएमआरसी की आधिकारिक वेबसाइट के 'ऑनलाइन कोर्स' अनुभाग से पंजीकरण कर सकते हैं।
यूपीएमआरसी के ये कोर्स किनके लिए उपयोगी हैं?
ये कोर्स इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, कंसल्टेंट, ठेका कंपनियों के कर्मचारी, इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र और मेट्रो सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए हैं। दुनिया के किसी भी हिस्से से भारतीय और विदेशी — दोनों — प्रतिभागी नामांकन कर सकते हैं।
यूपीएमआरसी यह पहल क्यों खास है?
यूपीएमआरसी मेट्रो क्षेत्र के लिए ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला मेट्रो संगठन बन गया है। यह पहल स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप है और भारत के 1,095 किलोमीटर से अधिक लंबे मेट्रो नेटवर्क के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
भारत का मेट्रो नेटवर्क कितना बड़ा है और वैश्विक माँग क्यों बढ़ रही है?
भारत में अभी 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हैं और नेटवर्क 1,095 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। खाड़ी देशों सहित दुनिया के कई हिस्सों में नई मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार के कारण प्रशिक्षित इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की वैश्विक माँग लगातार बढ़ रही है।
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