25 अक्टूबर 2026
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2014 से शहरी बजट आवंटन 10 गुना बढ़ा, ₹3.7 लाख करोड़ मेट्रो-बस में निवेश: राजीव गौबा

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2014 से शहरी बजट आवंटन 10 गुना बढ़ा, ₹3.7 लाख करोड़ मेट्रो-बस में निवेश: राजीव गौबा

सारांश

नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा ने भुवनेश्वर में स्वीकारा कि 2014 से शहरी बजट 10 गुना बढ़ा और मेट्रो-बस में ₹3.7 लाख करोड़ लगाए गए — लेकिन साथ ही चेताया कि 74वें संविधान संशोधन की अनदेखी और कमज़ोर नगर निकाय वित्त के बिना यह निवेश अधूरा रहेगा।

मुख्य बातें

नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा ने 25 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन को संबोधित किया।
2014 से शहरी क्षेत्र का केंद्रीय बजट आवंटन 10 गुना बढ़ा; मेट्रो और बस परिवहन में ₹3.7 लाख करोड़ निवेश।
2025-26 बजट में ₹1 लाख करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड और 7 शहरी आर्थिक क्षेत्रों को ₹5,000 करोड़ प्रति क्षेत्र आवंटन की घोषणा।
केंद्रीय वित्त आयोग अनुदान में नगर निकायों की हिस्सेदारी 36% से बढ़कर 45% हुई, फिर भी राज्य-स्तरीय हस्तांतरण अपर्याप्त।
गौबा ने 74वें संविधान संशोधन के तहत 18 कार्य नगर निकायों को सौंपने, सीधे निर्वाचित महापौर और मॉडल टेनेंसी एक्ट लागू करने की अपील की।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि वर्ष 2014 के बाद से शहरी क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार का बजटीय आवंटन 10 गुना बढ़ गया है। इस दौरान स्मार्ट सिटीज मिशन, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और शहरी आजीविका मिशन जैसी बड़ी योजनाओं के ज़रिए भारतीय शहरों के विकास को नई गति देने का प्रयास किया गया है।

निवेश और प्रमुख योजनाएँ

पूर्व कैबिनेट सचिव गौबा ने बताया कि मेट्रो रेल और बस परिवहन प्रणालियों में लगभग ₹3.7 लाख करोड़ का भारी निवेश किया जा चुका है। उन्होंने 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड का विशेष उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य शहरों को विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके अलावा, इस वर्ष के बजट में सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों के लिए पाँच वर्षों में प्रत्येक को ₹5,000 करोड़ आवंटित किए जाने की भी बात उन्होंने रखी।

गौबा ने नीति आयोग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट 'प्रभावी शहरी शासन की दिशा में आगे बढ़ना' का हवाला देते हुए नीति आयोग की ग्रोथ हब पहल के महत्व को भी रेखांकित किया।

शहरी शासन में सुधार की अपील

गौबा ने शहरों की सरकारों को वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने पाँच वर्षीय कार्यकाल वाले सीधे निर्वाचित महापौरों की व्यवस्था, मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली और समय पर नगर निकाय चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य की राजधानियों से शहरों का प्रभावी शासन संभव नहीं है।

उन्होंने 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को शहरी स्थानीय निकायों को सभी 18 कार्य सौंपने चाहिए — जिनमें मास्टर प्लान तैयार करना, जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएँ और यातायात प्रबंधन शामिल हैं। गौरतलब है कि यह संशोधन तीन दशक से अधिक पहले पारित हुआ था, लेकिन अधिकांश राज्यों में इसका पूर्ण क्रियान्वयन अब भी अधूरा है।

वित्तीय स्थिति और राजस्व चुनौतियाँ

गौबा ने स्वीकार किया कि नगर निकायों का राजस्व अब भी कम है और संपत्ति कर तथा उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त आयोग से शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाले अनुदान में पिछली राशि की तुलना में दोगुने से अधिक वृद्धि हुई है और उनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है। हालाँकि, राज्यों से शहरों को मिलने वाली धनराशि अब भी अपर्याप्त बनी हुई है।

उन्होंने राज्य वित्त आयोगों के नियमित गठन और शहरी स्थानीय निकायों को पर्याप्त वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित करने की माँग भी दोहराई।

आवास और भूमि उपयोग नीति

शहरी नियोजन के मुद्दे पर गौबा ने मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रतिबंधात्मक फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और भवन निर्माण नियमों में सुधार की अपील की, जो भूमि की उपलब्धता सीमित करते हैं और आवासीय व व्यावसायिक लागत बढ़ाते हैं। उन्होंने मिश्रित भूमि उपयोग, परिवहन केंद्रों के आसपास विकास और भूमि एकत्रीकरण को अपनाने पर ज़ोर दिया।

प्रवासी श्रमिकों, औद्योगिक मजदूरों, विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए किफायती किराये के आवास की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए गौबा ने राज्यों से मॉडल टेनेंसी एक्ट अपनाने का आग्रह किया।

आगे की राह

गौबा ने राज्यों से नए नगर निगम कानून लागू करके इन सभी सुधारों को अमल में लाने का आह्वान किया। उन्होंने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से शहरी मिशनों के तहत मिलने वाली सहायता को सुधारों से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित राज्य और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शहरों की सरकारों को सशक्त बनाना अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जिन निकायों को यह पैसा खर्च करना है, उन्हें 1992 के 74वें संविधान संशोधन के तहत मिले अधिकार आज भी पूरी तरह नहीं दिए गए हैं। ₹3.7 लाख करोड़ के मेट्रो निवेश के बावजूद अधिकांश नगर निकाय संपत्ति कर वसूली में पिछड़े हैं, जो दर्शाता है कि केंद्र का पैसा राज्य-नियंत्रित नौकरशाही से होकर गुज़रता है, न कि स्थानीय निर्वाचित सरकारों से। जब तक शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही एक साथ नहीं सुधरती, तब तक बजट की यह दस गुना वृद्धि ज़मीनी शहरी जीवन में उतनी ही गुना बदलाव नहीं लाएगी।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2014 के बाद से शहरी क्षेत्र का बजट आवंटन कितना बढ़ा है?
नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा के अनुसार, 2014 के बाद से केंद्र सरकार का शहरी क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन 10 गुना बढ़ गया है। इस दौरान मेट्रो रेल और बस परिवहन प्रणालियों में लगभग ₹3.7 लाख करोड़ का निवेश किया गया है।
अर्बन चैलेंज फंड क्या है और इसमें कितनी राशि है?
अर्बन चैलेंज फंड 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित ₹1 लाख करोड़ का कोष है, जिसका उद्देश्य शहरों को विकास के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके अतिरिक्त, सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों के लिए पाँच वर्षों में प्रत्येक को ₹5,000 करोड़ आवंटित किए जाने की भी घोषणा की गई है।
राजीव गौबा ने शहरी शासन सुधार के लिए क्या सुझाव दिए?
गौबा ने पाँच वर्षीय कार्यकाल वाले सीधे निर्वाचित महापौरों, मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली और समय पर नगर निकाय चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने 74वें संविधान संशोधन के तहत राज्यों से नगर निकायों को सभी 18 कार्य सौंपने और मॉडल टेनेंसी एक्ट लागू करने का भी आग्रह किया।
नगर निकायों की वित्तीय स्थिति पर गौबा ने क्या कहा?
गौबा ने माना कि नगर निकायों का राजस्व अब भी कम है और संपत्ति कर तथा उपयोगकर्ता शुल्क वसूली में सुधार ज़रूरी है। केंद्रीय वित्त आयोग से नगर निकायों की हिस्सेदारी 36% से बढ़कर 45% हो गई है, लेकिन राज्यों से मिलने वाली धनराशि अब भी अपर्याप्त बनी हुई है।
आवास और भूमि उपयोग पर क्या बदलाव की सिफारिश की गई?
गौबा ने प्रतिबंधात्मक फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और भवन निर्माण नियमों में सुधार, मिश्रित भूमि उपयोग और परिवहन केंद्रों के आसपास विकास की वकालत की। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों, विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए किफायती किराये के आवास हेतु मॉडल टेनेंसी एक्ट अपनाने पर भी ज़ोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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