उत्तराखंड मानसून 2025: आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन बोले — सभी प्रमुख हाईवे खुले, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड में मानसून सीजन के दौरान संभावित बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की आशंका को देखते हुए राज्य प्रशासन ने पूर्ण सतर्कता की स्थिति अपना ली है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि राज्य के सभी प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग फिलहाल पूरी तरह खुले हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दल तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ भी जरूरत पड़ेगी, वहाँ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र-राज्य समन्वय और संसाधन प्रबंधन
सुमन ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में आपदा प्रबंधन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा, 'इस बैठक में केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को दिए गए संसाधनों और धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जहाँ भी किसी तरह की कमी है, उसे जल्द पूरा किया जाएगा, और जिन क्षेत्रों में दिक्कतें हैं, वहाँ आवश्यक सुधार किए जाएंगे।' यह बैठक राज्यों के बीच संसाधन वितरण की समीक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
जन-सुरक्षा के लिए अग्रिम चेतावनी तंत्र
सुमन के अनुसार, जब भी नदियों या जलाशयों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँचता है, तो आपदा प्रबंधन विभाग पहले से ही नागरिकों को सतर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। इसके लिए ब्रॉडकास्ट संदेश, एसएमएस, व्हाट्सएप ग्रुप, जिला प्रशासन और पुलिस का समन्वित उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाता है, ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके।
जलभराव-प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा सुधार
सचिव ने बताया कि जिन इलाकों में जलभराव की पुनरावृत्ति होती है, वहाँ सुरक्षा दीवारों को मजबूत करने और जल-निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहाँ भी जलभराव की संभावना हो, वहाँ समय रहते कदम उठाए जाएं और ड्रेनेज सिस्टम को चालू हालत में रखा जाए। गौरतलब है कि उत्तराखंड में हर मानसून सीजन में ऐसे कई क्षेत्र बाढ़ और मलबे से प्रभावित होते हैं।
सड़क बहाली और मशीनरी की तैनाती
सुमन ने बताया कि यदि बारिश के कारण किसी मार्ग पर मलबा आने से रास्ता बंद होता है, तो उसे शीघ्र खोलने के लिए मशीनें और टीमें पहले से तैनात हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर जेसीबी मशीनें अग्रिम रूप से रखी गई हैं, ताकि भूस्खलन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके। राज्य के सभी प्रमुख हाईवे अभी पूरी तरह चालू हैं और छोटे मार्गों को भी खुला रखने के प्रयास जारी हैं।
वर्षभर चलने वाली आपदा तैयारी
सुमन ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की तैयारी केवल मानसून तक सीमित नहीं है — विभाग पूरे वर्ष मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण और विभिन्न स्तरों पर अभ्यास आयोजित करता है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया त्वरित और प्रभावी हो। फिलहाल राज्य में आपदा की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सजग है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।