उत्तरकाशी: भारत-चीन सीमा पर रक्षा परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण की जिलाधिकारी ने की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तरकाशी जिले के भारत-चीन सीमा से लगे सीमांत क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आधारभूत ढाँचे के विकास में तेज़ी लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने 6 जून को सेना से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण के लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राजस्व विभाग, वन विभाग और सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए और लंबित प्रस्तावों की प्रगति का आकलन किया गया।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में रक्षा परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशांत आर्य ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी अड़चन को शीघ्र दूर किया जाए ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
सेना की चौकियाँ और संपर्क मार्ग
बैठक में विशेष रूप से सेना की चौकियों और संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि से जुड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण जल्द से जल्द पूरा किया जाए और निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सीमांत क्षेत्रों में बेहतर संपर्क व्यवस्था और आधारभूत ढाँचे का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
वन भूमि स्वीकृति और प्रतिपूरक वनीकरण
वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वन भूमि स्वीकृति से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। जहाँ प्रतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि की आवश्यकता हो, वहाँ राजस्व विभाग के सहयोग से शीघ्र भूमि चिह्नित की जाए ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। गौरतलब है कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में प्रतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता अक्सर रक्षा परियोजनाओं में देरी का प्रमुख कारण बनती है।
विभागीय समन्वय पर ज़ोर
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी संबंधित विभाग नियमित रूप से आपसी समन्वय बनाए रखें ताकि रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि हस्तांतरण और अन्य प्रक्रियाएँ तेज़ी से पूरी हो सकें। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमांत क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है।
आगे की राह
प्रशासन का लक्ष्य है कि सीमांत क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा से जुड़े सभी महत्त्वपूर्ण कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएँ। यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में रणनीतिक अवसंरचना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है।