21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'वंदे मातरम' विवाद पर अश्विनी चौबे का हमला — कांग्रेस की राजनीतिक ज़मीन और खिसकेगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'वंदे मातरम' विवाद पर अश्विनी चौबे का हमला — कांग्रेस की राजनीतिक ज़मीन और खिसकेगी

सारांश

'वंदे मातरम' के गायन को बीच में रोकने के कांग्रेस के फैसले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भागलपुर से तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा — भारत राष्ट्रगीत का अपमान नहीं सहेगा और कांग्रेस यह विवाद खड़ा कर अपनी राजनीतिक ज़मीन खुद खोद रही है।

मुख्य बातें

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने 21 अगस्त को भागलपुर में कांग्रेस के 'वंदे मातरम' रुख पर कड़ी आपत्ति जताई।
चौबे ने कहा — कांग्रेस को गाना ज़रूरी नहीं, लेकिन दो छंद तक सीमित रखना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह होगा।
उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम जगाने की ज़रूरत पर बल दिया।
चौबे ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय , रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद के योगदान का उल्लेख किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में पारित अधिनियम के तहत 'वंदे मातरम' के गायन का प्रावधान है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने 21 अगस्त को भागलपुर में कांग्रेस के 'वंदे मातरम' संबंधी रुख पर कड़ा प्रहार किया और स्पष्ट कहा कि हिंदुस्तान इस राष्ट्रगीत का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुद ऐसी परिस्थितियाँ बना रही है जो उसकी राजनीतिक साख को और कमज़ोर करेंगी।

चौबे का सीधा सवाल — दो पंक्तियाँ भी क्यों?

चौबे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कांग्रेस को 'वंदे मातरम' गाने के लिए कोई बाध्य नहीं कर रहा। लेकिन गायन को बीच में रोककर केवल दो छंद तक सीमित रखने के फैसले को उन्होंने राजनीतिक रूप से आत्मघाती बताया। उनके शब्दों में — 'अगर कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति से चिढ़ है, तो दो लाइन भी क्यों गाना है? वह भी नहीं गाए, कौन मना किया है?'

कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर चेतावनी

चौबे ने कहा कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पहले से कमज़ोर है और इस तरह के फैसले उसे और नुकसान पहुँचाएँगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुर्सी के लिए राजनीतिक गतिविधियाँ हो सकती हैं, तो 'वंदे मातरम' का गायन बीच में रोकने की ज़रूरत क्यों पड़ी? उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर पहले भी ऐसे विवाद उठते रहे हैं।

राष्ट्रप्रेम सबकी ज़िम्मेदारी — चौबे का व्यापक संदेश

पूर्व मंत्री ने कहा कि राष्ट्रभक्ति किसी एक व्यक्ति, दल या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है — यह हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने 'वंदे मातरम' को महज़ एक गीत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने का माध्यम बताया। उनके अनुसार, 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में आज की युवा पीढ़ी की केंद्रीय भूमिका होगी — और इसीलिए उन्हें देश के इतिहास, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना अनिवार्य है।

सांसदों ने पारित किया है संसद में अधिनियम

चौबे ने याद दिलाया कि संसद में एक अधिनियम पारित किया जा चुका है जिसमें 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं और सरकार व सांसदों ने मिलकर इसे पारित किया था। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस संबंध में कोई अलग निर्णय लेना चाहती है, तो यह उसकी अपनी इच्छा है।

सांस्कृतिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द का आह्वान

चौबे ने स्पष्ट किया कि 'वंदे मातरम' को किसी एक समुदाय के विरुद्ध नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने भारत की पहचान और गौरव को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने देश की सनातन संस्कृति और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत सनातन संस्कृति के अपमान को भी स्वीकार नहीं करेगा। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उतना ही ज़रूरी है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों की आड़ में असली नीतिगत बहसें — रोज़गार, महँगाई, शासन — हाशिये पर धकेली जा रही हैं। 2047 के विकसित भारत का संकल्प केवल राष्ट्रगीत गाने से नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक और सामाजिक नीतियों से पूरा होगा — यह बिंदु इस पूरी बहस में गायब है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी चौबे ने 'वंदे मातरम' विवाद पर क्या कहा?
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि भारत 'वंदे मातरम' का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा और कांग्रेस का यह फैसला उसकी राजनीतिक स्थिति को और कमज़ोर करेगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति से चिढ़ है तो वह दो पंक्तियाँ भी न गाए।
कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' को लेकर क्या फैसला लिया था?
कांग्रेस की ओर से 'वंदे मातरम' का गायन बीच में रोककर केवल दो छंद तक सीमित रखने की बात सामने आई, जिस पर भाजपा नेताओं ने तीखी आपत्ति जताई। इस फैसले को राष्ट्रगीत के प्रति अनादर के रूप में देखा जा रहा है।
क्या 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कोई कानून है?
चौबे के अनुसार, संसद में एक अधिनियम पारित किया गया है जिसमें 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं और सरकार व सांसदों ने मिलकर इसे पारित किया था।
चौबे ने 2047 का उल्लेख क्यों किया?
चौबे ने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर यानी 2047 में आज की युवा पीढ़ी देश की बागडोर संभालेगी। इसीलिए उनमें राष्ट्रप्रेम और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना अभी से ज़रूरी है।
'वंदे मातरम' को किसी एक समुदाय से जोड़कर देखे जाने पर चौबे का क्या जवाब था?
चौबे ने स्पष्ट कहा कि 'वंदे मातरम' को किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए इसे भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 7 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले