वंदे मातरम पर विवाद नहीं, कानून के तहत छह पद गाने चाहिए: शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 अगस्त को मुंबई में स्पष्ट कहा कि 'वंदे मातरम' को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए — और यदि संसद ने कानून बनाकर छह पद गाना अनिवार्य किया है, तो सभी को छहों पद गाने चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखने की अनिवार्यता, पुणे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और देश में जेन-जी की भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए।
वंदे मातरम: छह पद या दो — क्या है विवाद
दुबे ने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा में वंदे मातरम पर विधेयक पारित हुआ, जिसमें इस राष्ट्रगीत को गाना अनिवार्य किया गया और यह स्पष्ट किया गया कि इसके छह पद हैं, तो लोग छहों पद गाने लगे। उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों को बचपन से सिर्फ दो पद याद हैं, क्योंकि पहले दो ही पद गाए जाते थे। अब कानून के अनुसार छह पद हैं, इसलिए लोग उन्हें देखकर गा रहे हैं — जिन्हें पूरा याद है, वे बिना देखे गा रहे हैं।'
दुबे ने कांग्रेस के रुख का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कांग्रेस का कहना है कि 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सिर्फ दो पद गाने का निर्णय लिया था, और कांग्रेस उसी परंपरा का पालन करती है। दुबे ने इस पर कहा, 'अगर कानून है तो छह पद गाने चाहिए। इसे विवाद नहीं बनाना चाहिए।'
मराठी भाषा अनिवार्यता: ऑटो-टैक्सी चालकों को और समय मिले
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों को 15 अगस्त तक मराठी सीखने का निर्देश दिया था। दुबे ने बताया कि इसके बाद चालकों को रोककर उनकी जाँच की जा रही है और रोज़मर्रा की बातचीत में मराठी बोलने को कहा जा रहा है। कुछ परीक्षा में उत्तीर्ण हो रहे हैं, जबकि कुछ असफल।
दुबे ने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में कई राज्यों से लोग रोज़ी-रोटी कमाने आते हैं। जो चालक भाषा नहीं सीख पाए हैं, उन्हें थोड़ा और समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि मुंबई में रहने वाले अधिकांश लोगों ने मराठी सीख ली है और इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम
पुणे में आयोजित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर दुबे ने कहा कि यह कार्यक्रम लड़कियों, महिलाओं, बेटियों और बहनों के लिए है और इसमें विभिन्न कॉलेजों से छात्र-छात्राएं स्वेच्छा से भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) यह आरोप लगाती है कि छात्रों को जबरन लाया जा रहा है, तो यह उन विद्यार्थियों का अपमान है।
दुबे के अनुसार, छात्र बस, निजी वाहन और सार्वजनिक परिवहन से कार्यक्रम में पहुँच रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के मुद्दों को समझा जाना ज़रूरी है — वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहते हैं और राहुल गांधी उसी दिशा में काम कर रहे हैं।
जेन-जी और शिक्षा सुधार की माँग
दुबे ने कहा कि भारत की आबादी में लगभग 65 से 70 प्रतिशत युवा हैं और यह युवाओं का देश है, जिसमें जेन-जी की निर्णायक भूमिका है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 24 से 25 करोड़ छात्र स्कूलों में पढ़ रहे हैं और 5 से 6 करोड़ लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं — यानी कुल मिलाकर लगभग 30 करोड़ लोग शिक्षा की प्रक्रिया में हैं।
दुबे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों का जेन-जी से जुड़ाव है, लेकिन इससे भी ज़रूरी यह है कि सरकार — चाहे वह BJP की हो या एनडीए की — जेन-जी की चिंताओं को समझे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को 'खराब हालत में' बताते हुए उसे दुरुस्त करने की माँग की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा बेरोज़गारी और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज़ है।