3 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वाराणसी एयरपोर्ट पर एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल AHME-2026, CISF और बहु-एजेंसी तैयारियों की परीक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वाराणसी एयरपोर्ट पर एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल AHME-2026, CISF और बहु-एजेंसी तैयारियों की परीक्षा

सारांश

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन पर AHME-2026 के तहत CISF की अगुवाई में बहु-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग ड्रिल हुई। इसमें हाईजैक परिदृश्य का अनुकरण कर पुलिस, AAI, मेडिकल और खुफिया एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया — और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अद्यतन करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

मुख्य बातें

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन, वाराणसी पर 3 अक्टूबर 2026 को वार्षिक AHME-2026 मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
CISF की अगुवाई में स्थानीय पुलिस, AAI , अग्निशमन सेवा, मेडिकल टीम, ATC और खुफिया एजेंसियों ने भाग लिया।
अभ्यास में अपहृत विमान की लैंडिंग और जमीनी बंधक-स्थिति का यथार्थवादी अनुकरण किया गया।
स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने ड्रिल देखी; परिणामों के आधार पर सुरक्षा दिशा-निर्देश अद्यतन किए जाएंगे।
CISF के अनुसार अभ्यास से ऑपरेशनल तैयारी, अंतर-एजेंसी समन्वय और रिस्पॉन्स सिस्टम को मज़बूती मिली।

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन, वाराणसी पर 3 अक्टूबर 2026 को वार्षिक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME-2026) का सफल आयोजन किया गया। इस ड्रिल का प्राथमिक उद्देश्य विमान अपहरण जैसी गंभीर आपात स्थिति में सुरक्षा एवं आपातकालीन एजेंसियों की परिचालन तत्परता और आपसी समन्वय को व्यावहारिक परिदृश्य में परखना था।

अभ्यास में क्या हुआ

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने विमान अपहरण की काल्पनिक किंतु यथार्थवादी परिस्थिति तैयार की — जिसमें अपहृत विमान की लैंडिंग और जमीनी स्तर पर बंधक-स्थिति का अनुकरण शामिल था। सुरक्षा टीमों की प्रतिक्रिया गति, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के पालन और एजेंसियों के बीच वास्तविक समय संपर्क की विस्तार से जाँच की गई।

CISF ने इस ड्रिल की जानकारी एक्स (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) पर साझा करते हुए बताया कि अभ्यास से ऑपरेशनल तैयारी, अंतर-एजेंसी समन्वय और समग्र रिस्पॉन्स सिस्टम को ठोस मज़बूती मिली।

भाग लेने वाली एजेंसियाँ

इस बहु-एजेंसी अभ्यास में CISF, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), AAI अग्निशमन सेवा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC), एयरलाइंस प्रतिनिधि, मेडिकल टीम और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने ड्रिल के प्रत्येक चरण का अवलोकन किया।

AHME क्या होता है और क्यों अनिवार्य है

एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियमों के तहत प्रत्येक वर्ष देशभर के हवाई अड्डों पर आयोजित की जाने वाली अनिवार्य सुरक्षा ड्रिल है। इसका मूल उद्देश्य किसी वास्तविक हाईजैक संकट के दौरान क्राइसिस रिस्पॉन्स, SOP-अनुपालन और एजेंसियों के परस्पर तालमेल की व्यावहारिक परीक्षा करना है।

गौरतलब है कि ड्रिल के समापन पर एक विस्तृत डीब्रीफिंग बैठक आयोजित होती है, जिसमें प्रदर्शन की समीक्षा कर सुरक्षा दिशा-निर्देशों को आवश्यकतानुसार अद्यतन किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक एजेंसी की खामियाँ अगली ड्रिल से पहले दूर की जाएँ।

वाराणसी एयरपोर्ट की विशिष्ट भूमिका

वाराणसी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है, जहाँ घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात लगातार बढ़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विमानपत्तनों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। AHME-2026 की सफलता यह संकेत देती है कि वाराणसी एयरपोर्ट की बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया-क्षमता राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

आगे की दिशा

डीब्रीफिंग के निष्कर्षों के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपडेट किया जाएगा और पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए लक्षित प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की संभावना है। यह वार्षिक अभ्यास किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इनकी वास्तविक उपयोगिता डीब्रीफिंग के बाद की जाने वाली सुधारात्मक कार्रवाई पर निर्भर करती है। वाराणसी जैसे बढ़ते यातायात वाले एयरपोर्ट पर यह अभ्यास विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ धार्मिक पर्यटन के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। असली परीक्षा यह है कि ड्रिल में उजागर खामियों को अगले अभ्यास तक दूर किया जाए — न कि केवल 'सफल ड्रिल' की घोषणा तक सीमित रहा जाए।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी एयरपोर्ट पर AHME-2026 मॉक ड्रिल क्या थी?
AHME-2026 एक वार्षिक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज है जो 3 अक्टूबर 2026 को लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन, वाराणसी पर आयोजित हुई। इसमें विमान अपहरण के यथार्थवादी परिदृश्य बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और समन्वय को परखा गया।
इस ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
AHME-2026 में CISF, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, AAI, AAI अग्निशमन सेवा, ATC, एयरलाइंस प्रतिनिधि, मेडिकल टीम और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने पूरी ड्रिल का अवलोकन किया।
एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) हर साल क्यों की जाती है?
AHME नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियमों के तहत अनिवार्य वार्षिक अभ्यास है। इसका उद्देश्य वास्तविक हाईजैक संकट में क्राइसिस रिस्पॉन्स, SOP-अनुपालन और बहु-एजेंसी तालमेल की जाँच कर सुरक्षा दिशा-निर्देशों को अद्यतन करना है।
इस मॉक ड्रिल से क्या हासिल हुआ?
CISF के अनुसार, AHME-2026 से ऑपरेशनल तैयारी, अंतर-एजेंसी समन्वय और रिस्पॉन्स सिस्टम को मज़बूती मिली। डीब्रीफिंग के बाद प्रदर्शन की समीक्षा कर सुरक्षा प्रोटोकॉल अपडेट किए जाएंगे।
वाराणसी एयरपोर्ट पर यह ड्रिल कितनी महत्वपूर्ण है?
वाराणसी एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है जहाँ घरेलू व अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में नियमित AHME अभ्यास यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए विशेष रूप से आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले