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वाराणसी साइबर सेल का बड़ा एक्शन: एक साल में 103 अपराधी जेल, ₹76 लाख पीड़ितों को वापस

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वाराणसी साइबर सेल का बड़ा एक्शन: एक साल में 103 अपराधी जेल, ₹76 लाख पीड़ितों को वापस

सारांश

वाराणसी साइबर सेल ने एक साल में 103 अपराधियों को जेल भेजकर और ₹76 लाख पीड़ितों को वापस दिलाकर साइबर अपराध के खिलाफ मिसाल कायम की है। जागरूकता अभियान के चलते फ्रॉड की रकम ₹30 करोड़ से घटकर ₹17 करोड़ हो गई — यह उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध नियंत्रण की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

मुख्य बातें

वाराणसी साइबर सेल ने एक वर्ष में 103 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
ये अपराधी 8 फर्जी कॉल सेंटर से इन्वेस्टमेंट स्कैम, फेक जॉब और पिरामिड स्कीम चला रहे थे।
5 मामलों में 20 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लागू; वाराणसी ऐसा करने वाला प्रदेश का पहला जिला (2024)।
साइबर फ्रॉड की रकम ₹30 करोड़ से घटकर ₹17 करोड़ हुई — करीब 43% की कमी।
एनसीआरपी पोर्टल के ज़रिए ₹5.5 करोड़ होल्ड कराए गए; पीड़ितों को ₹76 लाख वापस दिलाए गए।

वाराणसी साइबर सेल ने पिछले एक वर्ष में 103 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है — यह जानकारी एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने दी। इन अपराधियों का संबंध 8 अलग-अलग फर्जी कॉल सेंटर से था, जो इन्वेस्टमेंट स्कैम, फेक जॉब और पिरामिड स्कीम जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे थे। साइबर जागरूकता अभियान के चलते वाराणसी में साइबर फ्रॉड की कुल रकम पिछले वर्ष के ₹30 करोड़ से घटकर इस वर्ष जून तक ₹17 करोड़ रह गई है।

मुख्य घटनाक्रम

एसीपी विदुष सक्सेना ने बताया कि साइबर सेल दो मोर्चों पर एक साथ काम करती है — जागरूकता अभियान और अपराध का पता लगाकर कार्रवाई। इस दोहरी रणनीति का असर अब आँकड़ों में साफ दिख रहा है। वाराणसी में साइबर फ्रॉड से जुड़े मुकदमों की संख्या में कमी आई है, चाहे वह एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतें हों या एफआईआर पंजीकरण।

इसके अतिरिक्त, 5 अलग-अलग मामलों में 20 आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। गौरतलब है कि वाराणसी, उत्तर प्रदेश का पहला जिला था जिसने 2024 में साइबर अपराध से जुड़े किसी मामले में गैंगस्टर एक्ट लागू किया।

रकम होल्ड और रिफंड की प्रक्रिया

साइबर सेल ने एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से इस वर्ष करीब ₹70 करोड़ की धोखाधड़ी वाली रकम में से ₹5.5 करोड़ होल्ड करा दिए हैं। इसके अलावा, पीड़ितों को ₹76 लाख की राशि सफलतापूर्वक वापस दिलाई जा चुकी है।

सक्सेना ने बताया कि होल्ड की गई शेष रकम को भी जल्द रिलीज़ कराने की प्रक्रिया चल रही है। एनसीआरपी पोर्टल के ज़रिए रकम होल्ड कराने की गति में भी उल्लेखनीय तेज़ी आई है।

जागरूकता अभियान का असर

सक्सेना के अनुसार, साइबर जागरूकता कार्यक्रमों का सीधा असर फ्रॉड की रकम में आई गिरावट के रूप में सामने आया है। पिछले एक वर्ष में वाराणसी में साइबर फ्रॉड की कुल राशि ₹30 करोड़ से घटकर ₹17 करोड़ हो गई — यानी करीब 43% की कमी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

साइबर सेल हाई-टेक टूल्स का इस्तेमाल करते हुए अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी करती है। फर्जी कॉल सेंटर, जो अक्सर निवेश के नाम पर या नौकरी का झाँसा देकर लोगों को ठगते हैं, अब सेल के निशाने पर हैं।

क्या होगा आगे

होल्ड की गई रकम की रिलीज़ प्रक्रिया जारी है और पीड़ितों को अधिक धनराशि वापस मिलने की संभावना है। साइबर सेल का लक्ष्य जागरूकता और कार्रवाई दोनों मोर्चों पर और अधिक सक्रियता बनाए रखना है, ताकि वाराणसी में साइबर अपराध की दर को और नीचे लाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि होल्ड की गई ₹5.5 करोड़ की रकम में से कितनी वास्तव में पीड़ितों तक पहुँचती है — अभी तक केवल ₹76 लाख ही लौटाए गए हैं। गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग एक साहसिक कदम है, पर यह तब तक प्रतीकात्मक रहेगा जब तक इसके दीर्घकालिक परिणाम सामने न आएँ। राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध बढ़ रहे हैं; एक जिले की सफलता तब तक पर्याप्त नहीं जब तक यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों में नहीं फैलता।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी साइबर सेल ने एक साल में कितने अपराधियों को जेल भेजा?
वाराणसी साइबर सेल ने पिछले एक वर्ष में 103 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। ये सभी 8 अलग-अलग फर्जी कॉल सेंटर से जुड़े थे और इन्वेस्टमेंट स्कैम, फेक जॉब तथा पिरामिड स्कीम जैसे अपराधों में शामिल थे।
वाराणसी में साइबर फ्रॉड की रकम में कितनी कमी आई?
एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना के अनुसार, वाराणसी में साइबर फ्रॉड की कुल रकम पिछले एक वर्ष के ₹30 करोड़ से घटकर इस वर्ष जून तक ₹17 करोड़ रह गई है। यह गिरावट मुख्यतः साइबर जागरूकता अभियानों का परिणाम बताई जा रही है।
एनसीआरपी पोर्टल के ज़रिए कितनी रकम होल्ड कराई गई और पीड़ितों को कितना वापस मिला?
इस वर्ष करीब ₹70 करोड़ की धोखाधड़ी वाली रकम में से ₹5.5 करोड़ एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से होल्ड कराए गए हैं। इसके अलावा पीड़ितों को ₹76 लाख की राशि सफलतापूर्वक वापस दिलाई जा चुकी है और शेष होल्ड रकम को भी रिलीज़ कराने की प्रक्रिया जारी है।
वाराणसी में गैंगस्टर एक्ट का साइबर अपराध में उपयोग क्यों खास है?
वाराणसी उत्तर प्रदेश का पहला जिला है जिसने 2024 में साइबर अपराध के किसी मामले में गैंगस्टर एक्ट लागू किया। इस कदम के तहत 5 अलग-अलग मामलों में 20 आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जो साइबर अपराधियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने का प्रयास है।
वाराणसी साइबर सेल अपराधियों की पहचान कैसे करती है?
एसीपी विदुष सक्सेना के अनुसार, साइबर सेल हाई-टेक टूल्स का उपयोग करते हुए अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी करती है। इसके साथ ही एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों का त्वरित विश्लेषण कर फर्जी कॉल सेंटरों और ऑनलाइन स्कैम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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