वरुड में नाबालिग बेटी के साथ मां-सौतेले पिता की क्रूरता, बेल्ट से पिटाई और बाल काटे — दोनों गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- अमरावती जिले के वरुड में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ उसकी मां और सौतेले पिता ने शक के आधार पर बर्बर क्रूरता की।
- आरोपियों ने बच्ची को बेल्ट से पीटा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रिमर से बाल काटे, साथ ही जान से मारने की धमकियां दीं।
- 21 अप्रैल 2026 को पीड़िता के बयान पर वरुड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज, 24 अप्रैल को दोनों आरोपी गिरफ्तार।
- मामले में BNS धारा 245/26, 118(1), 115(2), 351(2), 352 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट धारा 75 लागू।
- जांच महिला सब-इंस्पेक्टर पूजा माली को सौंपी गई; पीड़िता अमरावती चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में सुरक्षित।
- पुलिस ने चेतावनी दी — नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अमरावती, 25 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के वरुड इलाके में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ उसकी सगी मां और सौतेले पिता ने महज शक के आधार पर बर्बर क्रूरता की। आरोपियों ने बच्ची को बेल्ट से बुरी तरह पीटा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रिमर से उसके बाल काट दिए। वरुड पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर टीम की त्वरित कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या हुआ वरुड में — पूरा घटनाक्रम
पीड़िता मिर्ची प्लॉट, वरुड में अपनी मां और सौतेले पिता के साथ रहती थी। परिवार में उस पर लंबे समय से शक किया जा रहा था और उसे जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। मामला तब सामने आया जब बच्ची की दुर्दशा की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंची।
21 अप्रैल 2026 को पीड़िता के बयान के आधार पर वरुड पुलिस स्टेशन में उसकी मां और सौतेले पिता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों ने शक के नाम पर नाबालिग को बेल्ट से बेरहमी से पीटा और ट्रिमर मशीन से उसके बाल काट दिए — यह कृत्य मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की यातना का प्रतीक है।
पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही वरुड पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर टीम ने संयुक्त अभियान चलाया और पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाला। उसे तत्काल अमरावती चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में भर्ती कराया गया, जहां उसकी देखभाल और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग जारी है।
इस मामले की जांच महिला सब-इंस्पेक्टर पूजा माली को सौंपी गई है। पुलिस ने 24 अप्रैल 2026 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और भविष्य में किसी भी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रिवेंटिव एक्शन भी लिया गया है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
वरुड पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 245/26, 118(1), 115(2), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के अंतर्गत भी आरोप लगाए गए हैं, जो बाल क्रूरता के मामलों में लागू होती है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य — बाल संरक्षण की चुनौती
यह मामला केवल एक पारिवारिक हिंसा की घटना नहीं है — यह उस गहरी सामाजिक समस्या को उजागर करता है जहां सौतेले माता-पिता और घरेलू वातावरण में नाबालिग बच्चियां सबसे अधिक असुरक्षित होती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हिंसा और बाल क्रूरता के मामलों में परिवार के सदस्य ही अधिकांशतः आरोपी होते हैं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में बाल संरक्षण के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) और POCSO कोर्ट की व्यवस्था है, फिर भी ऐसे मामले बार-बार सामने आते हैं। यह व्यवस्था की खामियों और जागरूकता की कमी दोनों को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पड़ोसियों और समुदाय की सतर्कता ऐसे मामलों को समय पर उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और शक या किसी भी छोटी बात के नाम पर बच्चों के साथ मारपीट या क्रूर व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। यदि कोई अन्य व्यक्ति इस क्रूरता में संलिप्त पाया गया तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता को चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में रखा गया है जहां उसकी मानसिक और शारीरिक देखभाल जारी है। न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष होगी।