वसुंधरा राजे बोलीं — सहानुभूति राजनीतिक सीमाओं से ऊपर, आज की राजनीति में बदले की भावना हावी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार, 15 जुलाई को जयपुर में आयोजित राजस्थान विधानसभा के 75वें अमृत महोत्सव समारोह में कहा कि इंसानियत और सहानुभूति की भावना राजनीतिक मतभेदों से कहीं बड़ी होती है। उन्होंने पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन के बाद कांग्रेस कार्यालय जाने के अपने निर्णय को याद करते हुए यह बात कही।
कांग्रेस दफ्तर जाने का वह फैसला
राजे ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री थीं, तब पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए वे कांग्रेस कार्यालय गई थीं। उस समय कई लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या एक मुख्यमंत्री का विपक्षी दल के दफ्तर जाना उचित है। राजे ने उन सवालों का जवाब देते हुए कहा था — 'सहानुभूति और इंसानियत हमेशा राजनीतिक सीमाओं से ऊपर होनी चाहिए।' यह घटना उनके लिए उस मूल्य का प्रतीक है जो आज की राजनीति में दुर्लभ होता जा रहा है।
वरिष्ठ विधायकों को श्रद्धांजलि
राजे ने उस दौर को याद किया जब वैचारिक मतभेदों के बावजूद विधानसभा में आपसी सम्मान कायम रहता था। उन्होंने कहा कि जब गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, सीपी जोशी, प्रद्युमन सिंह, घनश्याम तिवारी, डॉ. नाथू सिंह गुर्जर और राजपाल शेखावत जैसे वरिष्ठ विधायक सदन में बोलते थे, तो सभी दलों के सदस्य ध्यान से उनकी बात सुनते थे। इसके अलावा उन्होंने राव राजेंद्र सिंह, काली चरण सराफ और बी.डी. कल्ला की भी सराहना की और उन्हें अपनी संवाद शैली और रचनात्मक बहस के लिए उल्लेखनीय बताया।
ऐतिहासिक उदाहरणों से दिया संदेश
राजे ने इतिहास का संदर्भ देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और हरिदेव जोशी के संबंध की तुलना सिकंदर और पोरस के ऐतिहासिक रिश्ते से की। उन्होंने कहा कि पोरस को युद्ध में हराने के बावजूद सिकंदर ने उनके साथ एक राजा जैसा सम्मानजनक व्यवहार किया था — यही भावना पुरानी पीढ़ी के राजनेताओं में भी थी।
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पीवी नरसिम्हा राव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को जिनेवा में मानवाधिकार उल्लंघन के पाकिस्तानी आरोपों का जवाब देने के लिए भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी थी — यह उस युग का प्रमाण है जब राष्ट्रीय हित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाता था।
मौजूदा राजनीति पर चिंता
राजे ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की राजनीति में बदले की भावना हावी हो गई है और सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरा है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्वस्थ बहस, आपसी सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की परंपरा को पुनर्जीवित करें।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ और मुख्यमंत्री की सराहना
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की 'एक राज्य, एक चुनाव' पहल शुरू करने के लिए प्रशंसा की। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, 24 घंटे घरेलू बिजली आपूर्ति, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना, नदियों को जोड़ने की पहल और 'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' की शुरुआत जैसे निर्णयों का उल्लेख किया। राजे ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य शासन को सुदृढ़ करना और राजस्थान की जनता को सशक्त बनाना था। आगे चलकर यह देखना होगा कि उनके इस संदेश का विधानसभा की कार्यसंस्कृति पर कोई ठोस असर पड़ता है या नहीं।