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वसुंधरा राजे बोलीं — सहानुभूति राजनीतिक सीमाओं से ऊपर, आज की राजनीति में बदले की भावना हावी

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वसुंधरा राजे बोलीं — सहानुभूति राजनीतिक सीमाओं से ऊपर, आज की राजनीति में बदले की भावना हावी

सारांश

राजस्थान विधानसभा के 75वें अमृत महोत्सव में वसुंधरा राजे ने वह बात कही जो आज की राजनीति में शायद ही कोई कहता है — कि इंसानियत दल से बड़ी होती है। कांग्रेस दफ्तर जाने के पुराने किस्से से लेकर आज की 'बदले की राजनीति' तक, उनका संदेश सीधा और तीखा था।

मुख्य बातें

वसुंधरा राजे ने 15 जुलाई को राजस्थान विधानसभा के 75वें अमृत महोत्सव में सहानुभूति को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर बताया।
उन्होंने पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन पर कांग्रेस कार्यालय जाने की घटना साझा की, जिसे उन्होंने इंसानियत का प्रतीक बताया।
पूर्व PM पीवी नरसिम्हा राव द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी को जिनेवा में भारत का प्रतिनिधित्व सौंपने का उदाहरण दिया — राष्ट्रहित को दलहित से ऊपर रखने की मिसाल के रूप में।
राजे ने कहा कि आज की राजनीति में बदले की भावना हावी है और सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरा है।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की 'एक राज्य, एक चुनाव' पहल की सराहना की।
अपने कार्यकाल में महिलाओं के लिए 50% पंचायत आरक्षण और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना जैसे फैसलों का उल्लेख किया।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार, 15 जुलाई को जयपुर में आयोजित राजस्थान विधानसभा के 75वें अमृत महोत्सव समारोह में कहा कि इंसानियत और सहानुभूति की भावना राजनीतिक मतभेदों से कहीं बड़ी होती है। उन्होंने पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन के बाद कांग्रेस कार्यालय जाने के अपने निर्णय को याद करते हुए यह बात कही।

कांग्रेस दफ्तर जाने का वह फैसला

राजे ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री थीं, तब पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए वे कांग्रेस कार्यालय गई थीं। उस समय कई लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या एक मुख्यमंत्री का विपक्षी दल के दफ्तर जाना उचित है। राजे ने उन सवालों का जवाब देते हुए कहा था — 'सहानुभूति और इंसानियत हमेशा राजनीतिक सीमाओं से ऊपर होनी चाहिए।' यह घटना उनके लिए उस मूल्य का प्रतीक है जो आज की राजनीति में दुर्लभ होता जा रहा है।

वरिष्ठ विधायकों को श्रद्धांजलि

राजे ने उस दौर को याद किया जब वैचारिक मतभेदों के बावजूद विधानसभा में आपसी सम्मान कायम रहता था। उन्होंने कहा कि जब गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, सीपी जोशी, प्रद्युमन सिंह, घनश्याम तिवारी, डॉ. नाथू सिंह गुर्जर और राजपाल शेखावत जैसे वरिष्ठ विधायक सदन में बोलते थे, तो सभी दलों के सदस्य ध्यान से उनकी बात सुनते थे। इसके अलावा उन्होंने राव राजेंद्र सिंह, काली चरण सराफ और बी.डी. कल्ला की भी सराहना की और उन्हें अपनी संवाद शैली और रचनात्मक बहस के लिए उल्लेखनीय बताया।

ऐतिहासिक उदाहरणों से दिया संदेश

राजे ने इतिहास का संदर्भ देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और हरिदेव जोशी के संबंध की तुलना सिकंदर और पोरस के ऐतिहासिक रिश्ते से की। उन्होंने कहा कि पोरस को युद्ध में हराने के बावजूद सिकंदर ने उनके साथ एक राजा जैसा सम्मानजनक व्यवहार किया था — यही भावना पुरानी पीढ़ी के राजनेताओं में भी थी।

उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पीवी नरसिम्हा राव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को जिनेवा में मानवाधिकार उल्लंघन के पाकिस्तानी आरोपों का जवाब देने के लिए भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी थी — यह उस युग का प्रमाण है जब राष्ट्रीय हित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाता था।

मौजूदा राजनीति पर चिंता

राजे ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की राजनीति में बदले की भावना हावी हो गई है और सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरा है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्वस्थ बहस, आपसी सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की परंपरा को पुनर्जीवित करें।

अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ और मुख्यमंत्री की सराहना

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की 'एक राज्य, एक चुनाव' पहल शुरू करने के लिए प्रशंसा की। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, 24 घंटे घरेलू बिजली आपूर्ति, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना, नदियों को जोड़ने की पहल और 'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' की शुरुआत जैसे निर्णयों का उल्लेख किया। राजे ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य शासन को सुदृढ़ करना और राजस्थान की जनता को सशक्त बनाना था। आगे चलकर यह देखना होगा कि उनके इस संदेश का विधानसभा की कार्यसंस्कृति पर कोई ठोस असर पड़ता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उस समय 'बदले की भावना' पर उनकी टिप्पणी केवल विपक्ष पर नहीं, बल्कि अपने ही दल की आंतरिक संस्कृति पर भी इशारा करती है। नरसिम्हा राव और वाजपेयी का उदाहरण चुनना — दो अलग-अलग दलों के प्रधानमंत्रियों का — यह दर्शाता है कि वे राष्ट्रीय सहमति की उस पुरानी परंपरा को रेखांकित करना चाहती हैं जो आज दुर्लभ है। सवाल यह है कि क्या यह संदेश विधानसभा की दीवारों से बाहर निकलकर व्यवहार में बदलेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसुंधरा राजे ने राजस्थान विधानसभा के 75वें अमृत महोत्सव में क्या कहा?
वसुंधरा राजे ने कहा कि सहानुभूति और इंसानियत राजनीतिक सीमाओं से हमेशा ऊपर होनी चाहिए। उन्होंने पूर्व सांसद अबरार अहमद के निधन पर कांग्रेस कार्यालय जाने की घटना साझा करते हुए यह संदेश दिया।
वसुंधरा राजे ने अबरार अहमद का जिक्र क्यों किया?
राजे ने यह बताने के लिए अबरार अहमद का उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए वे विपक्षी पार्टी के दफ्तर उनके निधन पर शोक व्यक्त करने गई थीं। यह उनके लिए इंसानियत को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का व्यक्तिगत उदाहरण था।
राजे ने पीवी नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण क्यों दिया?
राजे ने यह दर्शाने के लिए यह उदाहरण दिया कि एक समय राष्ट्रीय हित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाता था। नरसिम्हा राव ने विपक्षी नेता वाजपेयी को जिनेवा में पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देने के लिए भारत का प्रतिनिधि बनाया था।
वसुंधरा राजे ने मौजूदा राजनीति के बारे में क्या कहा?
राजे ने चिंता जताई कि आज की राजनीति में बदले की भावना हावी हो गई है और सार्वजनिक संवाद का स्तर गिर गया है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्वस्थ बहस और आपसी सम्मान की परंपरा को पुनर्जीवित करें।
वसुंधरा राजे ने अपने कार्यकाल की किन उपलब्धियों का उल्लेख किया?
राजे ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, 24 घंटे घरेलू बिजली आपूर्ति, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना, नदियों को जोड़ने की पहल और 'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' की शुरुआत का उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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