राम मंदिर चढ़ावा मामला: वीएचपी ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर प्रियंका, केजरीवाल, संजय सिंह के बयान दर्ज करने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने 5 जुलाई 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रहे अधिकारी को औपचारिक पत्र लिखा, जिसमें कांग्रेस नेता एवं लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव सहित अन्य नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की गई है। यह पत्र अयोध्या के डीएसपी एवं एफआईआर संख्या 0090/2026, थाना राम जन्मभूमि के जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी को संबोधित किया गया है।
पत्र की पृष्ठभूमि और मांग
वीएचपी ने इस पत्र की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त नेताओं ने टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर राम मंदिर चढ़ावे को लेकर गंभीर सार्वजनिक आरोप लगाए हैं। आलोक कुमार के अनुसार, चूँकि इन नेताओं ने निश्चित रकम और विशिष्ट दावों का उल्लेख किया है, इसलिए यह माना जा सकता है कि वे मामले के तथ्यों से परिचित हैं। उन्होंने जांच अधिकारी से आग्रह किया कि इन नेताओं को कानून के तहत बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जाएँ।
नेताओं के आरोप जो पत्र में उद्धृत हैं
पत्र के अनुसार, समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर में कथित तौर पर लगभग ₹20,000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए 50-50 किलो सोना, चाँदी, बहुमूल्य हार और करोड़ों रुपए की नकदी गायब है, और इसमें केवल छोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं।
पत्र में अरविंद केजरीवाल के उन बयानों का हवाला दिया गया है जिनमें उन्होंने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि भगवान राम का हार, चरण पादुकाएँ, हीरे, आभूषण, चाँदी की ईंटें, चाँदी के दीपक और भारी मात्रा में नकदी चोरी हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि लगभग ₹200 करोड़ नकद और कीमती हीरे-जवाहरात गायब हैं, और निष्पक्ष जांच होने पर सरकार भी गिर सकती है।
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कथित तौर पर दावा किया था कि राम मंदिर के दान पात्रों से ₹200 करोड़ से अधिक की चोरी हुई है और इसमें 50 से ज़्यादा कर्मचारियों की संलिप्तता है। लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सवाल उठाया था कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले सीसीटीवी बंद कर हजारों करोड़ रुपए के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे बड़े लोगों की मिलीभगत है।
वीएचपी की कानूनी दलील
आलोक कुमार ने जांच अधिकारी से यह भी पूछने का आग्रह किया कि संबंधित नेताओं के आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है, उन्हें यह जानकारी कहाँ से मिली और उनके पास इन दावों के समर्थन में कौन-से दस्तावेज़ या साक्ष्य मौजूद हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि ये नेता विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध कराते हैं, तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुँचने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच में यह स्पष्ट हो कि गंभीर आरोप बिना किसी तथ्य या सबूत के लगाए गए हैं, तो यह भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। आलोक कुमार ने चेताया कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठे या लापरवाहीपूर्ण आरोप लगाता है जिससे समाज में वैमनस्य फैलने की आशंका हो, तो जांच एजेंसी कानून के तहत उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम जन्मभूमि मंदिर प्रशासन और चढ़ावा प्रबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है। अब सबकी नज़रें जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी पर हैं कि वे वीएचपी की इस माँग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या संबंधित नेताओं को बयान के लिए बुलाया जाता है।