विदेशी फंडिंग से भारत को तोड़ने की साजिश: रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल की चेतावनी, AQIS खतरे पर बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिविल डिफेंस सुदृढ़ीकरण संबंधी बयान का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि देश में हुए विभिन्न विरोध प्रदर्शनों को विदेशी फंडिंग मिल रही है और इसका एकमात्र उद्देश्य भारत को भीतर से कमज़ोर करना है। नई दिल्ली में दिए गए अपने बयान में सहगल ने अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के सक्रिय होने को देश की सुरक्षा के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बताया।
मोदी के भाषण पर सहगल का आकलन
सहगल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस भाषण में किसी अन्य देश का नाम लिए बिना पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य के विजन पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जो भाषण दिया, उसमें उन्होंने किसी दूसरे देश का नाम नहीं लिया, ना ही किसी देश की आलोचना की।' सहगल ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद की समाप्ति और नक्सलवाद पर नियंत्रण को देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
विदेशी फंडिंग और आंतरिक सुरक्षा पर चिंता
सहगल ने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन, शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों सहित देश में हुए विभिन्न विरोधों को विदेश से वित्तपोषण मिला है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के एक साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि कथित तौर पर हर वर्ष देश में ₹23,000 करोड़ की विदेशी फंडिंग आ रही है। सहगल के अनुसार, 'विदेशी फंडिंग का केवल और केवल एक ही मकसद है, देश को अंदर से बर्बाद करना।' यह बयान उनका व्यक्तिगत आकलन है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
AQIS खतरा और सिविल डिफेंस की ज़रूरत
रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की रिपोर्ट, जिसकी संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पुष्टि की, के अनुसार लाल किले के निकट हुआ हमला AQIS द्वारा किया गया था। उन्होंने कहा कि पहले जहाँ लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद और खालिस्तानी तत्वों से खतरा था, वहीं अब AQIS का इस नेटवर्क से जुड़ना देश के सामने एक नई और जटिल सुरक्षा चुनौती प्रस्तुत करता है। सहगल ने कहा, 'इन चुनौतियों से बचने के लिए सिविल डिफेंस को मजबूत करना बहुत जरूरी है।'
स्कूल-कॉलेज में सुरक्षा प्रशिक्षण और अग्निवीर योजना
सहगल ने सुझाव दिया कि देश की विशाल जनसंख्या को देखते हुए अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है, किंतु स्कूलों और कॉलेजों में प्रत्येक छात्र को आत्मरक्षा और सुरक्षा प्रशिक्षण अवश्य दिया जाना चाहिए। उन्होंने अग्निवीर योजना की सराहना करते हुए कहा कि चार वर्ष की सेवा के बाद अग्निवीर देश की नागरिक सुरक्षा में बड़े पैमाने पर योगदान देंगे। गौरतलब है कि देश के कई स्कूलों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुके हैं।
आगे की राह
सहगल का मानना है कि सिविल डिफेंस को जितनी जल्दी और जितने बड़े पैमाने पर मजबूत किया जाए, वह देश की सुरक्षा और एकता के लिए उतना ही लाभकारी होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी रक्षा नीति की समीक्षा कर रहा है।