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तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया के निधन पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, बताया 'अपूरणीय क्षति'

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तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया के निधन पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, बताया 'अपूरणीय क्षति'

सारांश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एक्स पर तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भाषा और साहित्य का अमूल्य रत्न बताया। पप्पैया ने पट्टिमंड्रम परंपरा को करोड़ों दर्शकों तक पहुँचाया था। इसी दौरान राधाकृष्णन ने दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव का पहला आधिकारिक दौरा भी पूरा किया।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 12 सितंबर को तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया के निधन पर एक्स पर शोक व्यक्त किया।
पप्पैया को तमिल की पट्टिमंड्रम (वाद-विवाद) परंपरा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का श्रेय दिया गया।
राधाकृष्णन ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का अपना पहला आधिकारिक दौरा पूरा किया।
दौरे में नमो अस्पताल , नमो मेडिकल इंस्टीट्यूट , दमन नाइट मार्केट और रामसेतु सीफ्रंट का निरीक्षण शामिल रहा।
सिलवासा के एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट कॉलेज में सार्वजनिक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने भाग लिया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार, 12 सितंबर को प्रख्यात तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी श्रद्धांजलि पोस्ट करते हुए पप्पैया को तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति का अमूल्य रत्न बताया। यह शोक संदेश ऐसे समय आया है जब तमिल साहित्यिक जगत पप्पैया के जाने से एक बड़े शून्य का अनुभव कर रहा है।

उपराष्ट्रपति की श्रद्धांजलि

राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा — 'तमिल के महान विद्वान सोलोमन पप्पैया के निधन से गहरा दुख हुआ है। उनकी वाक्पटुता और ज्ञान ने हमारी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया।' उन्होंने पप्पैया की विद्वता और वक्तृत्व कला को विशेष रूप से रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा — 'असाधारण शालीनता और गहरे ज्ञान के साथ उन्होंने लाखों लोगों के दिलों में तमिल साहित्य की सुंदरता पहुँचाई और पट्टिमंड्रम (तमिल वाद-विवाद मंच) की कालातीत परंपरा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।' गौरतलब है कि पट्टिमंड्रम तमिलनाडु में साहित्यिक बहस की एक प्राचीन और अत्यंत लोकप्रिय विधा है, जिसे पप्पैया ने टेलीविज़न के माध्यम से करोड़ों दर्शकों तक पहुँचाया था।

पप्पैया का तमिल साहित्य में योगदान

सोलोमन पप्पैया को तमिल भाषा के सबसे प्रभावशाली समकालीन विद्वानों में गिना जाता है। उनकी हाजिरज़वाबी, गहन भाषण कला और साहित्यिक मंचों पर अद्वितीय उपस्थिति ने उन्हें तमिल समाज में एक घर-घर पहचाने जाने वाले नाम में बदल दिया। राधाकृष्णन ने स्वयं स्वीकार किया कि पप्पैया ने 'तमिल के कालातीत ज्ञान को पीढ़ियों तक पहुँचाया' और 'साहित्यिक मंचों की परंपरा के माध्यम से तमिल भाषा की समृद्धि को अनगिनत घरों तक पहुँचाया।'

उपराष्ट्रपति ने पप्पैया के परिवार, प्रशंसकों और समूचे तमिल समुदाय के प्रति हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा — 'तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति उनके आजीवन समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।'

उपराष्ट्रपति का दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव दौरा

इससे पहले उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया, जो शुक्रवार को शुरू हुआ और शनिवार को समाप्त हुआ। दौरे के दौरान उन्होंने दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सीफ्रंट (मोती दमन) और देवका में नमोपथ सीफ्रंट जैसी पर्यटन और वॉटरफ्रंट विकास परियोजनाओं का मुआयना किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राधाकृष्णन ने इन सार्वजनिक स्थलों के विकास की सराहना करते हुए कहा कि ये परियोजनाएँ पर्यटन, मनोरंजन और आर्थिक अवसरों को बढ़ा रही हैं, साथ ही दमन की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध विरासत को भी प्रदर्शित कर रही हैं।

शैक्षणिक संस्थानों का निरीक्षण

सिलवासा में उपराष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर का दौरा कर छात्रों से बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नमो अस्पताल और नमो मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट का भी निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने एनाटॉमी म्यूज़ियम, डिसेक्शन हॉल, सेंट्रल लाइब्रेरी और लेक्चर थिएटर जैसी सुविधाओं का जायज़ा लिया।

सिलवासा के एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट कॉलेज में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी उपराष्ट्रपति ने हिस्सा लिया। इस दौरे को केंद्र शासित प्रदेश के बुनियादी ढाँचागत और शैक्षणिक विकास की समीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे की तस्वीर

सोलोमन पप्पैया के निधन से तमिल साहित्यिक परंपरा में जो रिक्तता आई है, उसे भरना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में तमिलनाडु सरकार और विभिन्न साहित्यिक संस्थानों द्वारा उनके सम्मान में आयोजनों की संभावना है। वहीं, उपराष्ट्रपति का दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव दौरा इन छोटे केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय विकास एजेंडे पर दृश्यता दिलाने का एक प्रयास रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह इस बात का संकेत भी है कि केंद्र तमिल सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक संवेदनशीलता से देख रहा है। असली सवाल यह है कि पप्पैया जैसे विद्वानों की विरासत को संस्थागत रूप कैसे दिया जाए — सिर्फ शोक संदेशों से यह काम नहीं होगा।
RashtraPress
12 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोलोमन पप्पैया कौन थे?
सोलोमन पप्पैया तमिल भाषा के प्रसिद्ध विद्वान, वक्ता और साहित्यकार थे, जिन्होंने पट्टिमंड्रम (तमिल वाद-विवाद मंच) की परंपरा को टेलीविज़न के ज़रिये करोड़ों दर्शकों तक पहुँचाया। उन्हें तमिल साहित्य और संस्कृति को जनसुलभ बनाने के लिए जाना जाता है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पप्पैया को कैसे श्रद्धांजलि दी?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 12 सितंबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर पप्पैया के निधन पर गहरा दुख जताया और उनकी वाक्पटुता, विद्वता व तमिल साहित्य में योगदान की सराहना की।
पट्टिमंड्रम क्या है और इसका महत्व क्या है?
पट्टिमंड्रम तमिलनाडु में साहित्यिक वाद-विवाद की एक प्राचीन परंपरा है, जिसमें विद्वान किसी विषय पर तर्क-वितर्क करते हैं। सोलोमन पप्पैया ने इस विधा को टेलीविज़न पर लोकप्रिय बनाकर इसे आधुनिक दर्शकों तक पहुँचाया।
उपराष्ट्रपति के दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव दौरे में क्या शामिल था?
यह राधाकृष्णन का इन केंद्र शासित प्रदेशों का पहला आधिकारिक दौरा था। उन्होंने दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सीफ्रंट, नमोपथ सीफ्रंट, नमो अस्पताल, नमो मेडिकल इंस्टीट्यूट और स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर का निरीक्षण किया।
सोलोमन पप्पैया की विरासत को कैसे याद किया जाएगा?
पप्पैया को तमिल भाषा की समृद्धि को आम लोगों तक पहुँचाने वाले सबसे प्रभावशाली समकालीन विद्वानों में गिना जाता है। आने वाले दिनों में तमिलनाडु सरकार और साहित्यिक संस्थानों द्वारा उनके सम्मान में आयोजनों की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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