पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारतीय निर्यातकों की सहायता के लिए सरकार के उपाय: वाणिज्य सचिव

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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारतीय निर्यातकों की सहायता के लिए सरकार के उपाय: वाणिज्य सचिव

सारांश

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते व्यापार में रुकावटों के मद्देनजर, सरकार भारतीय निर्यातकों की सहायता के लिए उपायों पर विचार कर रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस बात की पुष्टि की।

मुख्य बातें

सरकार निर्यातकों की सहायता के लिए कदम उठा रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव का व्यापार पर प्रभाव पड़ रहा है।
लॉजिस्टिक समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
निर्यातकों के फीडबैक पर ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने की योजना बना रही है।

नई दिल्ली, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रहे तनाव के कारण व्यापार में आ रही रुकावटों को देखते हुए, सरकार भारतीय निर्यातकों की सहायता के लिए कुछ उपायों पर विचार कर रही है। यह जानकारी सोमवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साझा की।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे इन कदमों की घोषणा इस सप्ताह अंत तक की जा सकती है।

राजेश अग्रवाल ने कहा, "क्षेत्र में चल रहे तनाव का असर भारत के निर्यात पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, उन देशों से होने वाले आयात पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।"

उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जबकि एयर कार्गो सेवाओं में भी कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा, "जहाजों की आवाजाही में खास तौर पर लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं और एयर कार्गो भी कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यदि भारत के उस क्षेत्र में होने वाले निर्यात को देखें, तो वह प्रभावित होगा, लेकिन वहां से होने वाले आयात पर भी असर पड़ेगा।"

अग्रवाल ने बताया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है ताकि व्यापार पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।

स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। यह समूह निर्यातकों की समस्याओं पर बारीकी से नजर रख रहा है और उनके समाधान के लिए काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि यह समूह रोज सुबह १० बजे बैठक करता है, जिसमें प्रभावित क्षेत्रों में सामान भेजने वाले निर्यातकों को आ रही चुनौतियों की समीक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य व्यापारियों से फीडबैक लेना और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान ढूंढना है।

वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात बढ़ सकता है, लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण देश अपनी पूरी निर्यात क्षमता हासिल नहीं कर पाएगा।

उन्होंने कहा, "कुल निर्यात के आंकड़े पिछले साल से बेहतर हो सकते हैं, लेकिन यदि ये बाधाएं न होतीं, तो हम इससे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे।"

अग्रवाल ने कहा कि सरकार अन्य देशों के बाजारों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश करेगी ताकि पश्चिम एशिया में व्यापार में आई कमी की भरपाई की जा सके।

उन्होंने कहा, "उस क्षेत्र में जो निर्यात कम होगा, उसकी भरपाई हम अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाकर करने की कोशिश करेंगे।"

संपादकीय दृष्टिकोण

पश्चिम एशिया में तनाव व्यापार पर प्रभाव डाल रहा है। सरकार निर्यातकों की समस्याओं को समझते हुए उपाय कर रही है। यह स्थिति गम्भीर है, और निर्यातकों को सहारा देने के लिए सरकार की पहल सराहनीय है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार निर्यातकों की मदद के लिए क्या उपाय कर रही है?
सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है जो निर्यातकों की समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए काम कर रहा है।
पश्चिम एशिया में तनाव का भारतीय व्यापार पर क्या असर हो रहा है?
पश्चिम एशिया में तनाव से भारत के निर्यात और आयात दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार ने कब तक उपायों की घोषणा करने की योजना बनाई है?
सरकार इन उपायों की घोषणा इस सप्ताह के अंत तक कर सकती है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) का क्या कार्य है?
डीजीएफटी निर्यातकों की समस्याओं पर नजर रखता है और उनके समाधान के लिए काम करता है।
वाणिज्य सचिव ने क्या कहा है मौजूदा निर्यात आंकड़ों के बारे में?
उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में कुल निर्यात बढ़ सकता है, लेकिन पश्चिम एशिया के तनाव के कारण पूरी क्षमता हासिल नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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