22 जुलाई 2026
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गोड़धोइया नाला परियोजना: CM योगी ने किया निरीक्षण, सपा पर भूमाफिया संरक्षण का आरोप

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गोड़धोइया नाला परियोजना: CM योगी ने किया निरीक्षण, सपा पर भूमाफिया संरक्षण का आरोप

सारांश

₹495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना अब सिर्फ बुनियादी ढाँचे का मामला नहीं — CM योगी ने इसे सपा के भूमाफिया राज के खिलाफ राजनीतिक बयान भी बना दिया। 15 घंटे की बारिश में जलभराव न होना इस परियोजना की सबसे बड़ी परीक्षा थी, जिसमें वह खरी उतरी।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 22 जुलाई को गोरखपुर में ₹495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया।
आरोप लगाया कि सपा शासन में भूमाफियाओं ने सरकारी ज़मीनों पर गलत इंदराज कर नागरिकों को ठगा; भाजपा सरकार ने प्रभावितों को सम्मानजनक मुआवज़ा दिया।
नाला 9.50 किमी लंबा, 10 मीटर चौड़ा; 18 किमी सीवर लाइन, 36 एमएलडी एसटीपी, 14 पुल और 61 एमएलडी एमपीएस का कार्य पूरा।
हाल की 15 घंटे की बारिश में उत्तरी क्षेत्र के 17 वार्डों में जलभराव नहीं हुआ।
परियोजना से 3 लाख की आबादी लाभान्वित; पानी रामगढ़ताल और तरकुलानी होते हुए राप्ती नदी तक पहुँचेगा।
फोरलेन सड़कों से संपत्ति का मूल्य ₹1 लाख से बढ़कर ₹5 लाख तक पहुँचने का दावा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 जुलाई को गोरखपुर में ₹495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया — फातिमा हॉस्पिटल के निकट और जेल बाईपास के समीप दो स्थानों पर। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल में भूमाफियाओं ने सरकारी ज़मीनों पर गलत इंदराज कराकर आम नागरिकों को ठगा, और भाजपा सरकार ने उन प्रभावितों को सम्मानजनक मुआवज़ा दिया है।

मुख्यमंत्री के आरोप और मुआवज़े का दावा

जेल बाईपास पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार के दौरान भूमाफियाओं ने गोड़धोइया नाले के आसपास की सरकारी ज़मीनों पर फर्जी कागज़ात तैयार कर लोगों को बेचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार ने जब यह परियोजना शुरू की, तो जिन लोगों के नाम ज़मीन के कागज़ों पर दर्ज थे, उन सभी को मुआवज़ा प्रदान किया गया।

परियोजना की विशेषताएँ और उपलब्धियाँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि गोड़धोइया नाला अब 9.50 किलोमीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा बन चुका है। इसके साथ 18 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई जा रही है ताकि नाले में सीवर का पानी न गिरे। परियोजना के तहत 36 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), 14 पुल और 61 एमएलडी का मास्टर पंप स्टेशन (एमपीएस) का कार्य पूरा हो चुका है।

उन्होंने बताया कि नाले पर दोनों ओर सड़क, रेलिंग, फुटपाथ और प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही नाले के दोनों किनारों पर सघन पौधरोपण का भी आह्वान किया गया। उनकी योजना है कि नाले पर यातायात व्यवस्था हो और सुरक्षा उपाय भी सुनिश्चित किए जाएँ।

जलभराव से राहत और भविष्य की संभावनाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस नाले के पुनरोद्धार से पहले गोरखपुर महानगर के उत्तरी क्षेत्र के 17 वार्ड बारिश में जलमग्न हो जाते थे। हाल ही में 15 घंटे की मूसलाधार बारिश में भी उत्तरी क्षेत्र में जलभराव नहीं हुआ, क्योंकि नाले ने सारा पानी सोख लिया। उन्होंने कहा कि जब सभी नालों का पुनरोद्धार पूरा होगा, तो महानगर में कहीं भी पानी नहीं रुकेगा।

यह पानी गोड़धोइया नाले से होते हुए रामगढ़ताल और तरकुलानी से गुज़रकर राप्ती नदी तक पहुँचेगा। उन्होंने चेताया कि यदि नाले में कूड़ा डाला गया या अतिक्रमण हुआ, तो जलभराव, बदबू और बीमारी की समस्याएँ फिर लौट सकती हैं। परियोजना से गोरखपुर उत्तर क्षेत्र की लगभग 3 लाख आबादी को लाभ मिल रहा है।

विकास कार्यों और संपत्ति मूल्य पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि फोरलेन सड़कों — मोहद्दीपुर से बाईपास, स्पोर्ट्स कॉलेज से बरगदवा, असुरन से मेडिकल कॉलेज और असुरन से पिपराइच — के निर्माण से क्षेत्र की संपत्तियों का मूल्य बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि पहले जो संपत्ति ₹1 लाख की थी, वह अब ₹5 लाख की हो गई है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और रोज़गार के नए अवसर भी बन रहे हैं।

जनसभा में अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

जनसभा के दौरान बारिश शुरू हो जाने पर मुख्यमंत्री ने पंडाल से बाहर खड़े नागरिकों को तुरंत जर्मन हैंगर में बुला लिया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की। सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि योगी सरकार के विकास कार्यों को देखकर विरोधियों के पास कुछ बोलने को नहीं बचा। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोड़धोइया नाला परियोजना को मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का मॉडल बताया और कहा कि इससे महानगर को जलभराव से स्थायी राहत मिलेगी। आगे सीवर लाइन का कार्य अंतिम चरण में है और शेष बुनियादी ढाँचा जल्द पूरा होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संतुलित रिपोर्टिंग की कमी उजागर करता है। 17 वार्डों में जलभराव न होना ठोस परिणाम है, पर दीर्घकालिक सफलता नागरिकों द्वारा नाले की स्वच्छता बनाए रखने पर निर्भर है — जो प्रशासनिक नहीं, सामाजिक चुनौती है। संपत्ति मूल्य पाँच गुना बढ़ने का दावा सत्यापन की माँग करता है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोड़धोइया नाला परियोजना क्या है और इसकी लागत कितनी है?
गोड़धोइया नाला परियोजना गोरखपुर में ₹495 करोड़ की लागत से चल रही पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और ट्रीटमेंट की परियोजना है। इसका उद्देश्य गोरखपुर के उत्तरी क्षेत्र को जलभराव से स्थायी राहत दिलाना है।
CM योगी ने सपा पर क्या आरोप लगाए?
CM योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में भूमाफियाओं ने गोड़धोइया नाले के पास सरकारी ज़मीनों पर फर्जी इंदराज कराकर आम नागरिकों को ठगा और उन्हें वह ज़मीनें बेचीं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ऐसे सभी प्रभावित लोगों को सम्मानजनक मुआवज़ा दिया है।
इस परियोजना से गोरखपुर में जलभराव की समस्या कैसे हल होगी?
9.50 किमी लंबे और 10 मीटर चौड़े इस नाले से बारिश का पानी रामगढ़ताल और तरकुलानी होते हुए राप्ती नदी तक पहुँचेगा। हाल ही में 15 घंटे की मूसलाधार बारिश में भी उत्तरी क्षेत्र के 17 वार्डों में जलभराव नहीं हुआ।
परियोजना से कितनी आबादी को लाभ मिलेगा?
गोड़धोइया नाला परियोजना से गोरखपुर उत्तर क्षेत्र की लगभग 3 लाख आबादी को लाभ मिल रहा है। उन्हें जलभराव, बदबू और बीमारी से मुक्त बेहतर वातावरण मिलने लगा है।
परियोजना के बाकी काम कब तक पूरे होंगे?
नाले का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और 18 किमी सीवर लाइन का काम अंतिम चरण में है। इसके बाद नाले के दोनों ओर सड़क, रेलिंग, फुटपाथ, प्रकाश व्यवस्था और पुलों का निर्माण भी किया जाना है।
राष्ट्र प्रेस
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