क्या नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अस्थमा का खतरा अधिक है? : अध्ययन

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क्या नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अस्थमा का खतरा अधिक है? : अध्ययन

सारांश

क्या आप जानते हैं कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को अस्थमा का खतरा अधिक होता है? एक हालिया अध्ययन ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर किया है, जिसमें जेंडर और शिफ्ट कार्य के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई है।

मुख्य बातें

नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अस्थमा का खतरा अधिक होता है।
महिलाओं में अस्थमा का प्रभाव पुरुषों की तुलना में अधिक गंभीर होता है।
मेनोपॉज के बाद अस्थमा का जोखिम बढ़ जाता है।
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का उपयोग फायदेमंद हो सकता है।
शोध से पता चला है कि बॉडी क्लॉक में गड़बड़ी से स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

नई दिल्ली, १६ जून (राष्ट्र प्रेस)। एक नए अध्ययन के अनुसार, नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में दिन में काम करने वाली महिलाओं की तुलना में अस्थमा का खतरा अधिक होता है।

यह अध्ययन, जिसमें २,७४,५४१ लोगों को शामिल किया गया, ईआरजे ओपन रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। हालांकि, पुरुषों में दिन या रात की शिफ्ट के बीच अस्थमा का कोई संबंध नहीं पाया गया।

अध्ययन में पाया गया कि केवल रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं में मध्यम या गंभीर अस्थमा का खतरा डे शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की तुलना में लगभग ५० प्रतिशत अधिक था।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर, यूके के डॉ. रॉबर्ट मेडस्टोन ने बताया, "महिलाओं में अस्थमा का प्रभाव पुरुषों की तुलना में अधिक गंभीर होता है। महिलाओं में अस्थमा से अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का दर भी अधिक है।"

यह पहला अध्ययन है जिसने शिफ्ट के काम और अस्थमा के बीच जेंडर बेस्ड अंतर की जांच की। शोधकर्ताओं ने पाया कि ५.३ प्रतिशत लोगों को अस्थमा था, जिनमें १.९ प्रतिशत को मध्यम या गंभीर अस्थमा था, यानी वे अस्थमा की दवाएं और इन्हेलर ले रहे थे।

शोध में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि नाइट शिफ्ट और अस्थमा के बीच संबंध क्यों है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह शरीर की बॉडी क्लॉक में गड़बड़ी के कारण हो सकता है, जिसमें पुरुष और महिला हार्मोन्स का स्तर प्रभावित होता है।

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का हाई लेवल अस्थमा से सुरक्षा प्रदान करता है, जो महिलाओं में कम होता है। इसके अलावा, पुरुष और महिलाएं अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं, जो एक कारण हो सकता है।

डॉ. मेडस्टोन ने बताया, "एचआरटी नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अस्थमा से बचाव कर सकता है, लेकिन इसके लिए और शोध की जरूरत है।"

मेनोपॉज के बाद उन महिलाओं में अस्थमा का जोखिम अधिक पाया गया जो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) नहीं ले रही थीं। नाइट शिफ्ट करने वाली ऐसी महिलाओं में अस्थमा का खतरा दिन में काम करने वाली की तुलना में दोगुना देखा गया।

शोधकर्ता अब यह जानने की योजना बना रहे हैं कि क्या सेक्स हार्मोन का शिफ्ट में काम और अस्थमा के बीच कोई संबंध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाइट शिफ्ट में काम करने से अस्थमा का खतरा कैसे बढ़ता है?
नाइट शिफ्ट में काम करने से शरीर की बॉडी क्लॉक प्रभावित होती है, जो हार्मोन स्तर को प्रभावित कर सकती है, और इससे अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।
क्या पुरुषों में भी नाइट शिफ्ट से अस्थमा का खतरा बढ़ता है?
इस अध्ययन में पाया गया कि पुरुषों में नाइट या डे शिफ्ट के बीच कोई संबंध नहीं था।
महिलाएं एचआरटी का उपयोग करने से अस्थमा से बच सकती हैं?
डॉक्टरों का मानना है कि एचआरटी नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अस्थमा से बचाव कर सकता है, लेकिन इसके लिए और शोध की आवश्यकता है।
क्या मेनोपॉज के बाद अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है?
हां, अध्ययन में पाया गया कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जो एचआरटी का उपयोग नहीं करतीं।
इस अध्ययन का महत्व क्या है?
यह अध्ययन महिलाओं के स्वास्थ्य और शिफ्ट वर्क के बीच के संबंध को समझने में महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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