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कर अपील सीमा बढ़ने से विवादित कर मांग में ₹16,690 करोड़ की गिरावट: निर्मला सीतारमण

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कर अपील सीमा बढ़ने से विवादित कर मांग में ₹16,690 करोड़ की गिरावट: निर्मला सीतारमण

सारांश

कर अपील की मौद्रिक सीमा बढ़ाने का असर साफ दिखा — तीनों अपीलीय मंचों पर मिलाकर ₹16,690 करोड़ की विवादित कर मांग घट गई। ITAT, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में हजारों मामले वापस लिए गए या दायर ही नहीं हुए, जो भारत की कर प्रणाली में एक ठोस संरचनात्मक बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

कर अपील की मौद्रिक सीमा बढ़ने से तीनों अपीलीय मंचों पर विवादित कर मांग में कुल ₹16,690 करोड़ की अनुमानित कमी आई।
आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में 443 मामले वापस, 11,390 अपीलें दायर नहीं — कमी ₹3,662.82 करोड़ ।
उच्च न्यायालयों में 4,791 मामले वापस, 5,565 अपीलें नहीं दायर — कमी ₹9,218.71 करोड़ ।
सर्वोच्च न्यायालय में 744 मामले वापस, 534 अपीलें नहीं — कमी ₹3,807.15 करोड़ ।
नई सीमाएँ 17 सितंबर 2024 से लागू: ITAT के लिए ₹60 लाख , उच्च न्यायालय के लिए ₹2 करोड़ , सर्वोच्च न्यायालय के लिए ₹5 करोड़ ।
CBDT ने पिछले 12 वर्षों में फेसलेस निर्धारण, पूर्व-भरित रिटर्न सहित कई कर सुधार लागू किए।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि विभागीय कर विवादों में अपील दायर करने की मौद्रिक सीमा बढ़ाए जाने के बाद देश में विवादित कर मांग में कुल ₹16,690 करोड़ की अनुमानित कमी दर्ज की गई है। यह कदम केंद्रीय बजट 2024-25 के तहत उठाया गया था, जिसका उद्देश्य आयकर अपीलीय मंचों पर लंबित मामलों का बोझ घटाना था।

मुख्य घटनाक्रम

17 सितंबर 2024 से लागू नई मौद्रिक सीमाओं के अनुसार, आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) के लिए अपील की सीमा ₹60 लाख, उच्च न्यायालयों के लिए ₹2 करोड़ और सर्वोच्च न्यायालय के लिए ₹5 करोड़ निर्धारित की गई है। इन सीमाओं के लागू होने के बाद आयकर विभाग ने बड़ी संख्या में अपीलें या तो वापस लीं या दायर ही नहीं कीं।

मंच-वार आँकड़े

आयकर अपीलीय अधिकरण में 443 मामले वापस लिए गए और 11,390 अपीलें दायर नहीं की गईं, जिससे विवादित कर मांग में ₹3,662.82 करोड़ की कमी आई। उच्च न्यायालयों में 4,791 मामले वापस लिए गए और 5,565 अपीलें नहीं दायर की गईं — इससे ₹9,218.71 करोड़ की कमी दर्ज हुई। सर्वोच्च न्यायालय में 744 मामले वापस लिए गए और 534 मामलों में अपील नहीं की गई, जिसके चलते ₹3,807.15 करोड़ की कमी आई।

व्यापक कर सुधारों का संदर्भ

वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने पिछले 12 वर्षों में कर अनुपालन को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें पहले से भरे हुए आयकर रिटर्न, संशोधित फॉर्म 26AS, अद्यतन रिटर्न दाखिल करने की सुविधा, फेसलेस निर्धारण एवं अपील प्रणाली, और अनुमानित कराधान योजना का विस्तार शामिल हैं। रिटर्न न भरने वालों पर लागू उच्च TDS/TCS प्रावधानों को भी हटाया गया है।

आम करदाता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पर न्यायिक प्रणाली में कर विवादों का बोझ कम करने का दबाव लगातार बना हुआ है। गौरतलब है कि भारत में लाखों कर विवाद वर्षों से विभिन्न अपीलीय मंचों पर लंबित रहते हैं, जिससे करदाताओं को अनिश्चितता और वित्तीय दबाव झेलना पड़ता है। मौद्रिक सीमा बढ़ाने से छोटे करदाताओं के मामले अब विभागीय अपील के दायरे से बाहर हो गए हैं, जो उनके लिए राहत की बात है।

क्या होगा आगे

सरकार के अनुसार, इन सुधारों से न केवल अपीलीय मंचों पर मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि कर विवाद निपटान की प्रक्रिया भी तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सीमाओं को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता रहा, तो न्यायिक संसाधनों पर दीर्घकालिक दबाव में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

690 करोड़ की यह कमी संख्या में प्रभावशाली लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे करदाताओं को वास्तविक राहत मिली या केवल सरकारी अपीलों की संख्या घटी। मौद्रिक सीमा बढ़ाना एक प्रशासनिक कदम है, न कि कर विवादों की जड़ पर प्रहार — विवाद तब भी बने रहते हैं जब विभाग अपील नहीं करता। गौरतलब है कि भारत में कर विवादों का कुल बकाया अभी भी लाखों करोड़ में है, और इस पृष्ठभूमि में ₹16,690 करोड़ की कमी एक शुरुआत भर है। दीर्घकालिक समाधान के लिए विवाद-उत्पत्ति के कारणों — जैसे मनमाने निर्धारण और अस्पष्ट कर कानून — को संबोधित करना अनिवार्य होगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर अपील की मौद्रिक सीमा बढ़ाने से विवादित कर मांग में कितनी कमी आई?
तीनों अपीलीय मंचों — आयकर अपीलीय अधिकरण, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय — को मिलाकर विवादित कर मांग में कुल ₹16,690 करोड़ की अनुमानित कमी आई है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अगस्त को लोकसभा में दी।
नई कर अपील सीमाएँ कब से लागू हुईं और ये क्या हैं?
नई मौद्रिक सीमाएँ 17 सितंबर 2024 से लागू हुईं। इनके अनुसार ITAT के लिए ₹60 लाख, उच्च न्यायालय के लिए ₹2 करोड़ और सर्वोच्च न्यायालय के लिए ₹5 करोड़ की सीमा निर्धारित की गई है।
आयकर अपीलीय अधिकरण में कितने मामले वापस लिए गए?
ITAT में 443 मामले वापस लिए गए और 11,390 अपीलें दायर नहीं की गईं, जिससे विवादित कर मांग में ₹3,662.82 करोड़ की कमी आई।
इस कदम से आम करदाता को क्या फायदा होगा?
मौद्रिक सीमा बढ़ने से छोटे और मध्यम करदाताओं के मामले अब विभागीय अपील के दायरे से बाहर हो गए हैं, जिससे उन्हें लंबे कानूनी विवादों से राहत मिलती है। इसके अलावा, अपीलीय मंचों पर लंबित मामलों की संख्या घटने से निपटान प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
CBDT ने पिछले 12 वर्षों में कौन-से प्रमुख कर सुधार लागू किए हैं?
CBDT ने पूर्व-भरित आयकर रिटर्न, संशोधित फॉर्म 26AS, फेसलेस निर्धारण एवं अपील प्रणाली, अद्यतन रिटर्न दाखिल करने की सुविधा और अनुमानित कराधान योजना का विस्तार जैसे सुधार लागू किए हैं। रिटर्न न भरने वालों पर लागू उच्च TDS/TCS प्रावधानों को भी हटाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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