अजीत वाडेकर: भारतीय क्रिकेट के पहले कप्तान जिन्होंने विदेशी धरती पर टेस्ट सीरीज जीती
सारांश
Key Takeaways
- अजीत वाडेकर ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी।
- उन्होंने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में टेस्ट श्रृंखलाएँ जीतीं।
- उनकी कप्तानी में टीम ने १-० से जीत हासिल की।
- अजीत ने कुल २,११३ रन बनाए और एक शतक लगाया।
- उन्हें 'अर्जुन अवॉर्ड' और 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अजीत वाडेकर, भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने राष्ट्रीय टीम को विदेशी धरती पर जीत हासिल करने का कौशल सिखाया। अजीत ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम में वो जज्बा भरा, जिसके बल पर टीम ने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड को पहली बार मात दी। वाडेकर एक उत्कृष्ट कप्तान के साथ-साथ एक बेहतरीन बल्लेबाज भी रहे। उनकी क्रिकेट की यात्रा भी बेहद दिलचस्प है।
अजीत वाडेकर का जन्म १ अप्रैल १९४१ को मुंबई में हुआ। वे पढ़ाई में काफी अच्छे थे और इंजीनियर बनने का सपना देखते थे। क्रिकेट से उनका कोई खास नाता नहीं था, लेकिन रोज़ाना ३ रुपये कमाने की इच्छा ने उन्हें पहले बार क्रिकेट के मैदान पर उतारा और जो हुआ, वो इतिहास बन गया। वास्तव में, भारत के पूर्व क्रिकेटर बालू गुप्ते उनके कॉलेज के सीनियर थे और उन्होंने अजीत को १२वें खिलाड़ी के तौर पर अपनी कॉलेज टीम में शामिल होने का प्रस्ताव दिया।
कॉलेज की टीम में खेलने वाले सभी खिलाड़ी कुशल थे, लेकिन पानी पिलाने के लिए कोई खिलाड़ी नहीं था, इसलिए अजीत वाडेकर को चुना गया। उन्हें हर दिन ३ रुपये दिए जाते थे। अजीत को इस खेल में रुचि आने लगी और उन्होंने कॉलेज की टीम में खेलने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट में एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया।
अजीत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए 1966 में वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू किया। उस समय विदेशी धरती पर एक मैच जीतना भारतीय टीम के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। अजीत की बल्लेबाजी क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय टीम की कप्तानी सौंप दी गई। 1971 में अजीत वाडेकर के नेतृत्व में भारतीय टीम वेस्टइंडीज गई और वहां इतिहास रचते हुए वतन लौट आई। अजीत की अगुवाई में भारतीय टीम ने पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला को 1-0 से जीतकर अपनी पहचान बनाई। यह वेस्टइंडीज में भारत की पहली टेस्ट श्रृंखला जीत थी।
इसी वर्ष जुलाई और अगस्त में भारतीय टीम ने इंग्लैंड में भी वो अद्भुत उपलब्धि हासिल की, जो पहले कभी नहीं हो सकी थी। अजीत की कप्तानी में टीम ने तीन मैचों की श्रृंखला को 1-0 से जीतने में सफलता हासिल की। भारतीय टीम ने श्रृंखला के अंतिम टेस्ट में जीत दर्ज की, जो इंग्लैंड में भारत की पहली टेस्ट जीत भी थी।
अजीत वाडेकर ने भारत के लिए कुल 37 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान 2,113 रन बनाए। उन्होंने एक शतक और 14 अर्धशतक लगाए। अजीत ने भारत के लिए कुल 2 वनडे मुकाबलों में 73 रन बनाए। उन्हें 1967 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया और 1972 में उन्हें पद्म श्री से भी नवाजा गया।