CWG 2026: हरियाणा के 7 मुक्केबाज फाइनल में, भारत के सभी 10 बॉक्सर्स को कम से कम सिल्वर पक्का
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजी का इतिहास रच दिया गया है — भारत के सभी 10 मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में प्रवेश किया है, जिससे देश के खाते में कम से कम 10 सिल्वर मेडल सुनिश्चित हो गए हैं। इनमें से 7 मुक्केबाज हरियाणा से हैं, जो शनिवार को रिंग में उतरकर गोल्ड की दावेदारी पेश करेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के खिलाड़ियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी है।
हरियाणा के पुरुष मुक्केबाजों का प्रदर्शन
पुरुष वर्ग में हरियाणा के तीन मुक्केबाज फाइनल में पहुँचे हैं। नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा) ने सेमीफाइनल में त्रिनिदाद और टोबैगो के नाइजेल पॉल को एकतरफा 5-0 से परास्त किया। अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल की राह पक्की की। सचिन सिवाच (60 किग्रा) ने वेल्स के हैरिस-एलन को 5-0 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई। तीनों मुकाबलों में हरियाणा के मुक्केबाजों ने प्रतिद्वंद्वियों को कोई मौका नहीं दिया।
हरियाणा की महिला मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन
महिला वर्ग में भी हरियाणा की चार बेटियों ने अपना दम दिखाया। साक्षी चौधरी (51 किग्रा) ने कनाडा की एम्बर-जेन वॉल को सर्वसम्मत निर्णय में 5-0 से हराया। प्रिया घनघस (60 किग्रा) ने इंग्लैंड की एल. किंग्स-व्हीटली को 5-0 से पराजित किया। जैस्मिन लांबोरिया (57 किग्रा) ने रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट (RSC) के जरिए लेसोथो की रैपेलांग मासेलेला को हराया। प्रीति पंवार (54 किग्रा) ने भी फाइनल में अपनी जगह पक्की की।
मुख्यमंत्री सैनी की बधाई
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के मुक्केबाजों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, 'आप सभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश की मेडल टैली को और भी ऊपर लेकर जाएं, यही हमारी कामना है। हरियाणा के खिलाड़ियों ने हमेशा ही देश का मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।' गौरतलब है कि हरियाणा भारतीय खेलों की रीढ़ रहा है और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी इस परंपरा को कायम रखा है।
भारत की मेडल टैली और आगे की राह
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अब तक 5 स्वर्ण सहित कुल 23 पदक अपने नाम किए हैं और मेडल टैली में 10वें स्थान पर है। शनिवार को सभी 10 मुक्केबाज 'गोल्डन पंच' के इरादे से रिंग में उतरेंगे, जिससे भारत की पदक संख्या में उल्लेखनीय उछाल संभव है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।