सुशील कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, सागर धनखड़ हत्याकांड में जमानत याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को 6 अगस्त 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने सागर धनखड़ हत्याकांड में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुशील 23 मई 2021 से न्यायिक हिरासत में हैं और इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियन सागर धनखड़ की हत्या 4-5 मई 2021 की रात दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम परिसर में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, धनखड़ और उनके साथियों को कथित तौर पर जबरन अगवा कर स्टेडियम लाया गया, जहाँ लाठी, डंडों और हॉकी स्टिक से बेरहमी से पिटाई की गई। सिर पर गहरी चोट लगने के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, किसी भारी वस्तु से लगी चोट के कारण मस्तिष्क में गंभीर क्षति हुई थी।
मुख्य घटनाक्रम
सुशील कुमार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 23 मई 2021 को गिरफ्तार किया था और तब से वे जेल में हैं। अक्टूबर 2022 में ट्रायल कोर्ट ने उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की हत्या, आपराधिक साजिश, धमकी और घातक हथियारों से दंगा करने से संबंधित धाराओं के अंतर्गत आरोप तय किए। साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत भी मामले दर्ज किए गए। 19 जुलाई 2023 को अदालत ने घुटने की सर्जरी के लिए उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।
हाई कोर्ट का फैसला
सुशील कुमार ने 6 फरवरी को रोहिणी कोर्ट द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। गुरुवार को उच्च न्यायालय ने यह याचिका खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी है।
सुशील कुमार की पहचान और खेल करियर
इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी के रूप में नाम आने से पहले सुशील कुमार भारत के सबसे प्रतिष्ठित पहलवानों में गिने जाते थे। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कुश्ती में कांस्य पदक और 2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीता था। गौरतलब है कि वे लगातार दो ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीटों में से एक हैं।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय से जमानत मिलने की उम्मीद टूटने के बाद सुशील कुमार के पास अब सर्वोच्च न्यायालय का रास्ता खुला है। ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी और मामले का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।