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ICC ने महिला क्रिकेटरों के लिए प्रसव के बाद मैदान पर वापसी की गाइडलाइंस जारी कीं, '6 आर' फ्रेमवर्क लागू

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ICC ने महिला क्रिकेटरों के लिए प्रसव के बाद मैदान पर वापसी की गाइडलाइंस जारी कीं, '6 आर' फ्रेमवर्क लागू

सारांश

ICC ने '6 आर' फ्रेमवर्क के ज़रिए महिला क्रिकेटरों के लिए प्रसव के बाद मैदान पर वापसी का रोडमैप तैयार किया है। यह पहल मातृत्व और पेशेवर क्रिकेट को साथ-साथ चलाने की संभावना को संस्थागत मान्यता देती है — एक ऐसा बदलाव जो महिला खेल जगत में लंबे समय से प्रतीक्षित था।

मुख्य बातें

ICC ने 22 जून 2026 को दुबई से महिला क्रिकेटरों के लिए प्रसव के बाद मैदान पर वापसी की आधिकारिक गाइडलाइंस जारी कीं।
गाइडलाइंस का आधार छह चरणों का '6 आर' फ्रेमवर्क है — रेडी, रिव्यू, रिस्टोर, रीकंडीशन, रिटर्न और रिफाइन।
प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एक डेडिकेटेड केस मैनेजर (डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट) नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है।
प्रेग्नेंसी की घोषणा करना या न करना पूरी तरह खिलाड़ी का निर्णय ; सदस्य बोर्ड प्रेग्नेंसी टेस्ट अनिवार्य नहीं कर सकते।
दस्तावेज़ सलाह देता है कि खिलाड़ी पहली तिमाही के बाद प्रतियोगिता से विराम लें, हालाँकि यह अनिवार्य नहीं है।
यह पहल ICC के '100 प्रतिशत क्रिकेट' अभियान के तहत महिला स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने की कोशिश है।

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 22 जून 2026 को दुबई से महिला क्रिकेटरों के लिए प्रसव के बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की विस्तृत गाइडलाइंस जारी कीं, जो खिलाड़ियों, सदस्य बोर्डों और मेडिकल स्टाफ को एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करती हैं। यह पहल ICC के व्यापक '100 प्रतिशत क्रिकेट' अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मातृत्व और पेशेवर क्रिकेट को परस्पर विरोधी के बजाय सहयोगी के रूप में स्थापित करना है।

क्या है '6 आर' फ्रेमवर्क

इन गाइडलाइंस की केंद्रीय संरचना छह चरणों वाला '6 आर' मॉडल है — रेडी (तैयारी), रिव्यू (चिकित्सा समीक्षा), रिस्टोर (शारीरिक बहाली), रीकंडीशन (क्रिकेट-विशिष्ट कंडीशनिंग), रिटर्न (प्रतियोगिता में वापसी) और रिफाइन (निरंतर सुधार)।

यह चरण-दर-चरण प्रक्रिया रिकवरी से शुरू होकर मेडिकल मूल्यांकन, धीरे-धीरे प्रशिक्षण, खेल-विशिष्ट कंडीशनिंग, प्रतियोगिता में पुनः प्रवेश और दीर्घकालिक निगरानी तक फैली हुई है। गौरतलब है कि यह ढाँचा किसी एक निर्धारित समयसीमा पर आधारित नहीं है — प्रत्येक खिलाड़ी की प्रगति उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय होगी।

डेडिकेटेड केस मैनेजर की भूमिका

गाइडलाइंस में प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एक समर्पित केस मैनेजर — आमतौर पर एक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट — नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है। यह व्यक्ति प्रेग्नेंसी के दौरान और मैदान पर वापसी तक खिलाड़ी का मुख्य संपर्क बिंदु होगा।

केस मैनेजर की जिम्मेदारी होगी कि वह सहायता सेवाओं का समन्वय करे, नियमित समीक्षाएँ आयोजित करे और यह सुनिश्चित करे कि सभी निर्णय माँ और शिशु दोनों की भलाई को केंद्र में रखकर लिए जाएँ।

बहु-विषयक सहायता टीम

समग्र देखभाल के लिए ICC ने एक मल्टी-डिसिप्लिनरी सपोर्ट टीम का सुझाव दिया है, जिसमें मेडिकल स्टाफ, फिजियोथेरेपिस्ट, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच, मनोवैज्ञानिक, आहार विशेषज्ञ, कोच और पारिवारिक सहायता नेटवर्क शामिल हों।

दस्तावेज़ में नियमित बैठकों की भी वकालत की गई है — प्रेग्नेंसी की प्रारंभिक घोषणा पर, तीसरी तिमाही में, प्रसव के छह से आठ सप्ताह बाद, और खिलाड़ी के क्रिकेट माहौल में पुनः प्रवेश के बाद हर चार सप्ताह पर।

निजता और खिलाड़ी की स्वायत्तता

ICC ने स्पष्ट किया है कि प्रेग्नेंसी की घोषणा करना या न करना पूरी तरह खिलाड़ी का व्यक्तिगत निर्णय है। सदस्य बोर्डों को प्रेग्नेंसी परीक्षण अनिवार्य नहीं करना चाहिए। गाइडलाइंस प्रेग्नेंसी के दौरान निरंतर व्यायाम को प्रोत्साहित करती हैं, लेकिन यह भी रेखांकित करती हैं कि प्रशिक्षण और प्रतियोगिता संबंधी सभी निर्णय चिकित्सा पेशेवरों की सलाह से और प्रत्येक खिलाड़ी की परिस्थितियों के अनुसार लिए जाने चाहिए।

दस्तावेज़ यह सलाह देता है कि खिलाड़ी पहली तिमाही के बाद प्रतियोगिता से विराम लें, हालाँकि इस पर जोर दिया गया है कि प्रतियोगिता छोड़ने की कोई निश्चित अनिवार्य तिथि नहीं है — यह निर्णय खिलाड़ी, उनके चिकित्सक और संबंधित बोर्ड के मेडिकल स्टाफ मिलकर करेंगे।

आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब अधिकतर महिला क्रिकेटर अपने करियर के दौरान परिवार शुरू करने और उसके बाद सफलतापूर्वक मैदान पर लौटने का विकल्प चुन रही हैं। ICC की ये गाइडलाइंस महिला खेल में मातृत्व से जुड़ी बातचीत को सामान्य बनाने की दिशा में एक संरचनात्मक कदम हैं, और उम्मीद की जाती है कि सदस्य बोर्ड इन्हें अपनी घरेलू नीतियों में भी समाहित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उनके क्रियान्वयन में होगी। सदस्य बोर्डों — विशेषकर उन देशों में जहाँ महिला क्रिकेट का बुनियादी ढाँचा अभी भी कमज़ोर है — के लिए डेडिकेटेड केस मैनेजर और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम जुटाना एक बड़ी चुनौती होगी। यह भी विचारणीय है कि गाइडलाइंस 'सलाह' के स्तर पर हैं, बाध्यकारी नियम नहीं — जिससे अनुपालन असमान रह सकता है। महिला खेल में मातृत्व को लेकर जो संस्थागत चुप्पी रही है, उसे तोड़ने के लिए इरादे से आगे जाकर जवाबदेही तंत्र भी ज़रूरी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ICC ने महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेग्नेंसी के बाद वापसी की गाइडलाइंस क्यों जारी कीं?
ICC ने ये गाइडलाइंस इसलिए जारी कीं ताकि मातृत्व और पेशेवर क्रिकेट को परस्पर विरोधी न माना जाए और खिलाड़ियों को प्रसव के बाद सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मैदान पर लौटने में मदद मिले। यह '100 प्रतिशत क्रिकेट' अभियान का हिस्सा है।
ICC का '6 आर' फ्रेमवर्क क्या है?
'6 आर' फ्रेमवर्क में छह चरण हैं — रेडी, रिव्यू, रिस्टोर, रीकंडीशन, रिटर्न और रिफाइन। यह रिकवरी से शुरू होकर मेडिकल समीक्षा, धीरे-धीरे प्रशिक्षण, क्रिकेट-विशिष्ट कंडीशनिंग, प्रतियोगिता में वापसी और दीर्घकालिक निगरानी तक फैला है।
क्या प्रेग्नेंसी के दौरान खिलाड़ी को बोर्ड को सूचित करना अनिवार्य है?
नहीं। ICC की गाइडलाइंस के अनुसार प्रेग्नेंसी की घोषणा करना पूरी तरह खिलाड़ी का व्यक्तिगत निर्णय है। सदस्य बोर्ड प्रेग्नेंसी टेस्ट अनिवार्य नहीं कर सकते।
प्रेग्नेंसी के दौरान खिलाड़ी कब तक प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकती है?
ICC दस्तावेज़ सलाह देता है कि खिलाड़ी पहली तिमाही के बाद प्रतियोगिता से विराम लें, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। यह निर्णय खिलाड़ी, उनके चिकित्सक और संबंधित बोर्ड के मेडिकल स्टाफ मिलकर लेंगे।
केस मैनेजर की भूमिका क्या होगी?
केस मैनेजर — आमतौर पर एक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट — खिलाड़ी का मुख्य संपर्क बिंदु होगा। वह सहायता सेवाओं का समन्वय करेगा, नियमित समीक्षाएँ आयोजित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी निर्णय माँ और शिशु की भलाई को केंद्र में रखकर लिए जाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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