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कर्णम मल्लेश्वरी: सिडनी ओलंपिक 2000 में कांस्य जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट

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कर्णम मल्लेश्वरी: सिडनी ओलंपिक 2000 में कांस्य जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट

सारांश

कर्णम मल्लेश्वरी सिर्फ एक भारोत्तोलक नहीं थीं — वह एक युग की शुरुआत थीं। आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव से निकलकर सिडनी ओलंपिक 2000 में कांस्य पदक जीतने तक की उनकी यात्रा भारतीय महिला खेल इतिहास का सबसे प्रेरणादायी अध्याय है।

मुख्य बातें

कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को वूसवानीपेटा, श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुआ।
उन्होंने सिडनी ओलंपिक 2000 में 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं।
विश्व चैंपियनशिप 1994 और 1995 में 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक ; 1993 और 1996 में कांस्य पदक ।
1994 और 1998 एशियन गेम्स में रजत पदक जीते।
1994 में अर्जुन पुरस्कार , 1999 में पद्मश्री और खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित।
जून 2021 में दिल्ली सरकार के खेल विश्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त।

कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया — वह ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं और भारोत्तोलन में किसी भी वर्ग में ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी भी। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले से निकली इस बेटी की यात्रा भारतीय महिला खेल इतिहास का एक निर्णायक अध्याय है।

प्रारंभिक जीवन और प्रशिक्षण

कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को वूसवानीपेटा, श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुआ। मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने भारोत्तोलन का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। उनके पहले कोच नीलमशेट्टी अप्पन्ना थे, जिनके मार्गदर्शन में उनकी प्रतिभा निखरी।

बेहतर सुविधाओं की तलाश में मल्लेश्वरी नई दिल्ली आईं और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से जुड़ीं। 1990 में राष्ट्रीय शिविर में प्रवेश के बाद उनकी सफलता का सिलसिला तेज़ी से आगे बढ़ा।

अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ

मल्लेश्वरी ने विश्व चैंपियनशिप 1994 और 1995 में 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। 1993 और 1996 की विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किए। एशियन गेम्स 1994 और 1998 में उन्होंने रजत पदक जीते।

गौरतलब है कि यह सफलताएँ ऐसे दौर में मिलीं जब भारत में महिला भारोत्तोलन को बहुत कम संसाधन और पहचान मिलती थी।

सिडनी ओलंपिक 2000 — ऐतिहासिक पल

सिडनी ओलंपिक 2000 में 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर मल्लेश्वरी ने दो कीर्तिमान एक साथ स्थापित किए। वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और भारत के लिए भारोत्तोलन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली एथलीट — चाहे महिला हो या पुरुष। यह पदक भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार क्षणों में से एक माना जाता है।

पुरस्कार और सम्मान

मल्लेश्वरी को 1994 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1999 में उन्हें पद्मश्री और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार — दोनों से नवाज़ा गया। जून 2021 में दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित खेल विश्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त की गईं।

संन्यास और विरासत

2004 के एथेंस ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मल्लेश्वरी ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास ले लिया। उनकी विरासत आज भी उन लाखों युवा खिलाड़ियों, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो खेल को करियर के रूप में अपनाना चाहती हैं। भारतीय भारोत्तोलन में उनका योगदान अतुलनीय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा भी है जिसने उन्हें पहले नज़रअंदाज़ किया और बाद में सम्मानित किया। सिडनी में पदक जीतने के बाद जो राष्ट्रीय गौरव उमड़ा, वह उस दशकों की मेहनत का प्रतिफल था जो बिना पर्याप्त सरकारी संसाधनों के की गई थी। यह सवाल आज भी प्रासंगिक है कि भारत में महिला भारोत्तोलन को अभी भी वह ढाँचागत समर्थन क्यों नहीं मिला जो पुरुष खेलों को मिलता है। मल्लेश्वरी का खेल विश्वविद्यालय में कुलपति बनना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली बदलाव तब होगा जब उनके जैसी प्रतिभाएँ ग्रामीण स्तर पर ही पहचानी और पोषित की जाएँगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्णम मल्लेश्वरी ने ओलंपिक में कौन सा पदक जीता था?
कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इस पदक के साथ वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं।
कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म कहाँ हुआ था?
कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को वूसवानीपेटा, जिला श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने 12 वर्ष की आयु में भारोत्तोलन शुरू किया और बाद में बेहतर प्रशिक्षण के लिए नई दिल्ली आईं।
कर्णम मल्लेश्वरी को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
मल्लेश्वरी को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री और 1999 में ही राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जून 2021 में उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित खेल विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया।
कर्णम मल्लेश्वरी ने विश्व चैंपियनशिप में कैसा प्रदर्शन किया?
मल्लेश्वरी ने विश्व चैंपियनशिप 1994 और 1995 में 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। 1993 और 1996 की विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किए।
कर्णम मल्लेश्वरी ने खेल से संन्यास कब लिया?
2004 के एथेंस ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कर्णम मल्लेश्वरी ने प्रतिस्पर्धी भारोत्तोलन से संन्यास ले लिया। इसके बाद वह खेल प्रशासन से जुड़ीं और 2021 में दिल्ली के खेल विश्वविद्यालय की कुलपति बनीं।
राष्ट्र प्रेस
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