पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार को खेल मंत्री मांडविया ने ₹10 लाख से नवाज़ा, कॉमनवेल्थ 2026 में जीता था कांस्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार से मुलाकात कर उन्हें ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। झंडू ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हैवीवेट पैरा-पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 130.9 अंक और 190 किग्रा की बेस्ट लिफ्ट के साथ कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया था।
मुकाबले का घटनाक्रम
दो समूहों में हुई इस स्पर्धा में झंडू ने ग्रुप बी में 130.9 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया — युगांडा के डेनिस मबाजीरा (114.1 अंक) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9 अंक) को पीछे छोड़ते हुए। संयुक्त तालिका में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 अंक से रजत जीता। झंडू का प्रयास रजत से मात्र 0.1 अंक पीछे रहा, फिर भी कांस्य पदक पक्का करने के लिए पर्याप्त था।
खेल मंत्री की प्रतिक्रिया
मांडविया ने एक्स पर लिखा, "पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर भारत को गर्व महसूस कराया। उनकी यह कामयाबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैरा-स्पोर्ट्स को मुख्यधारा में लाने और यह पक्का करने के विजन का सबूत है कि हमारे पैरा-एथलीटों को हर दूसरे एथलीट की तरह ही प्राथमिकता, सहयोग और अवसर मिलें।"
झंडू कुमार की संघर्ष-कथा
बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में जन्मे झंडू जन्म से ही पोलियो से पीड़ित थे। उन्होंने 2017 में पैरा एथलेटिक्स से अपना खेल-करियर शुरू किया और F55 शॉट पुट व डिस्कस थ्रो में कई जिला एवं राज्य स्तरीय पदक जीते। जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के दौरान पावरलिफ्टिंग में उनकी रुचि जागी और कोच राजिंदर सिंह राहेलू के मार्गदर्शन में वे तेज़ी से भारत के शीर्ष पैरा पावरलिफ्टर्स में शामिल हो गए।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड से कॉमनवेल्थ तक का सफर
2025 में झंडू ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 205 किग्रा लिफ्ट कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और खेलो इंडिया पैरा गेम्स में इसे 206 किग्रा तक बेहतर किया। इसी वर्ष उन्होंने बीजिंग वर्ल्ड कप 2025 में कांस्य पदक जीता। इसके बाद एशियन और ओशिनिया चैंपियनशिप 2026 में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई किया। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से शारीरिक चुनौतियाँ भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकतीं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा-स्पर्धाओं में झंडू से और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।