झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हैवीवेट स्पर्धा में 190 किलोग्राम के बेस्ट लिफ्ट और 130.9 अंक के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का मेडल खाता खोला। 28 जुलाई को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर स्वदेश लौटे झंडू ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने कोच राजिंदर सिंह रेलू और साई गांधीनगर सेंटर को दिया।
मुकाबले का घटनाक्रम
दो समूहों में बँटे इस मुकाबले में झंडू ने ग्रुप-बी में शीर्ष स्थान हासिल किया, जहाँ उन्होंने युगांडा के डेनिस म्बाजीरा (114.1 अंक) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9 अंक) को पीछे छोड़ा। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। झंडू सिल्वर से महज 0.1 अंक के अंतर से चूक गए।
झंडू कुमार का अगला लक्ष्य
स्वदेश लौटने पर झंडू कुमार ने कहा, 'भारत के लिए पदक जीतकर मुझे बेहद खुशी मिली है। सोशल मीडिया पर लोगों ने मुझे भरपूर सपोर्ट किया है। भविष्य में इससे भी बेहतर करना है। मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक है।' उन्होंने गांधीनगर में की गई कड़ी ट्रेनिंग को इस सफलता की बुनियाद बताया।
कोच की भूमिका और चोट से वापसी
कोच राजिंदर सिंह रेलू ने बताया कि प्रतियोगिता से 15 दिन पहले झंडू के कंधे में मामूली स्ट्रेन आ गई थी, जिससे उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था। रेलू ने कहा, 'हमने उन्हें भरोसा दिलाया। झंडू कुमार ने काफी मेहनत की और देश के लिए मेडल जीता। हमें इस बात का दुख है कि वह गोल्ड से चूक गए — अगली बार इसे गोल्ड में तब्दील करना चाहेंगे।'
साई गांधीनगर की भूमिका
कोच रेलू ने साई गांधीनगर सेंटर के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि यहाँ 2019 में पैरा पावरलिफ्टिंग की शुरुआत केवल 2 खिलाड़ियों से हुई थी, जो आज बढ़कर 13 खिलाड़ी हो गए हैं। एशियन गेम्स पदक विजेता परमजीत सिंह भी इसी केंद्र की उपज हैं। गौरतलब है कि सरकारी सहयोग से पैरा खेलों को मिल रहे प्रोत्साहन का यह ठोस उदाहरण है।
सरकारी सम्मान
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को झंडू कुमार को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार पैरा एथलीटों को मुख्यधारा की मान्यता दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। एशियन गेम्स और ओलंपिक की तैयारी के साथ, झंडू कुमार की नज़र अब स्वर्णिम भविष्य पर है।