28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर निशाना

सारांश

चोट के बावजूद हार न मानने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 190 किग्रा उठाकर भारत को ब्रॉन्ज दिलाया — सिल्वर से सिर्फ 0.1 अंक दूर रहे। अब उनकी नज़र एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है।

मुख्य बातें

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में 130.9 अंक और 190 किग्रा के बेस्ट लिफ्ट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
झंडू सिल्वर मेडल से केवल 0.1 अंक के अंतर से चूके; गोल्ड नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस (132.8 अंक) को मिला।
प्रतियोगिता से 15 दिन पहले कंधे में स्ट्रेन के बावजूद झंडू ने वापसी कर पदक जीता।
साई गांधीनगर में 2019 से शुरू हुए पैरा पावरलिफ्टिंग कार्यक्रम में अब 13 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने झंडू को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।
झंडू का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में पदक जीतना है।

पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हैवीवेट स्पर्धा में 190 किलोग्राम के बेस्ट लिफ्ट और 130.9 अंक के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का मेडल खाता खोला। 28 जुलाई को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर स्वदेश लौटे झंडू ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने कोच राजिंदर सिंह रेलू और साई गांधीनगर सेंटर को दिया।

मुकाबले का घटनाक्रम

दो समूहों में बँटे इस मुकाबले में झंडू ने ग्रुप-बी में शीर्ष स्थान हासिल किया, जहाँ उन्होंने युगांडा के डेनिस म्बाजीरा (114.1 अंक) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9 अंक) को पीछे छोड़ा। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। झंडू सिल्वर से महज 0.1 अंक के अंतर से चूक गए।

झंडू कुमार का अगला लक्ष्य

स्वदेश लौटने पर झंडू कुमार ने कहा, 'भारत के लिए पदक जीतकर मुझे बेहद खुशी मिली है। सोशल मीडिया पर लोगों ने मुझे भरपूर सपोर्ट किया है। भविष्य में इससे भी बेहतर करना है। मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक है।' उन्होंने गांधीनगर में की गई कड़ी ट्रेनिंग को इस सफलता की बुनियाद बताया।

कोच की भूमिका और चोट से वापसी

कोच राजिंदर सिंह रेलू ने बताया कि प्रतियोगिता से 15 दिन पहले झंडू के कंधे में मामूली स्ट्रेन आ गई थी, जिससे उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था। रेलू ने कहा, 'हमने उन्हें भरोसा दिलाया। झंडू कुमार ने काफी मेहनत की और देश के लिए मेडल जीता। हमें इस बात का दुख है कि वह गोल्ड से चूक गए — अगली बार इसे गोल्ड में तब्दील करना चाहेंगे।'

साई गांधीनगर की भूमिका

कोच रेलू ने साई गांधीनगर सेंटर के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि यहाँ 2019 में पैरा पावरलिफ्टिंग की शुरुआत केवल 2 खिलाड़ियों से हुई थी, जो आज बढ़कर 13 खिलाड़ी हो गए हैं। एशियन गेम्स पदक विजेता परमजीत सिंह भी इसी केंद्र की उपज हैं। गौरतलब है कि सरकारी सहयोग से पैरा खेलों को मिल रहे प्रोत्साहन का यह ठोस उदाहरण है।

सरकारी सम्मान

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को झंडू कुमार को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार पैरा एथलीटों को मुख्यधारा की मान्यता दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। एशियन गेम्स और ओलंपिक की तैयारी के साथ, झंडू कुमार की नज़र अब स्वर्णिम भविष्य पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत में पैरा खेलों की बदलती तस्वीर का प्रमाण है — साई गांधीनगर जैसे केंद्र, जो 2019 में 2 खिलाड़ियों से शुरू हुए, आज 13 एथलीट तैयार कर रहे हैं। हालाँकि, सिल्वर से 0.1 अंक का अंतर यह भी बताता है कि शीर्ष पर पहुँचने के लिए तकनीकी परिष्कार और लंबे प्रतिस्पर्धी कैलेंडर की ज़रूरत है, जो अभी भी पैरा एथलीटों को मुख्यधारा के खिलाड़ियों की तुलना में कम मिलता है। ₹10 लाख का नकद पुरस्कार सम्मानजनक है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या पैरा और ओलंपिक एथलीटों के पुरस्कार ढाँचे में समानता लाने का वक्त आ गया है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने 190 किग्रा का बेस्ट लिफ्ट और 130.9 अंक हासिल किए।
झंडू कुमार का अगला लक्ष्य क्या है?
झंडू कुमार ने स्पष्ट किया है कि उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में पदक जीतना है। वे गांधीनगर में अपनी ट्रेनिंग जारी रखेंगे।
झंडू कुमार के कोच कौन हैं और उनकी क्या भूमिका रही?
झंडू कुमार के कोच राजिंदर सिंह रेलू हैं, जिन्होंने प्रतियोगिता से 15 दिन पहले कंधे की चोट के बावजूद झंडू का मनोबल बनाए रखा। कोच रेलू साई गांधीनगर में पैरा पावरलिफ्टिंग कार्यक्रम का नेतृत्व करते हैं।
साई गांधीनगर सेंटर का पैरा खेलों में क्या योगदान है?
साई गांधीनगर में 2019 में पैरा पावरलिफ्टिंग की शुरुआत केवल 2 खिलाड़ियों से हुई थी, जो आज 13 खिलाड़ियों तक पहुँच गई है। एशियन गेम्स पदक विजेता परमजीत सिंह भी इसी केंद्र से हैं।
झंडू कुमार को सरकार ने कितना पुरस्कार दिया?
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने झंडू कुमार को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. 3 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 4 दिन पहले