लद्दाख खेल नीति 2026 लागू: अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेताओं को ₹1 करोड़ तक का बोनस
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने 1 अगस्त 2026 को लद्दाख खेल नीति 2026 को औपचारिक मंजूरी दी — एक व्यापक खेल ढाँचा जो मासिक छात्रवृत्ति, एकमुश्त नकद पुरस्कार और लगातार वित्तीय सहायता के ज़रिये इस केंद्र शासित प्रदेश के एथलीटों को सशक्त बनाएगा। इस नीति के तहत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ₹5 लाख से ₹1 करोड़ तक का वन-टाइम कैश बोनस मिल सकता है।
नीति में क्या है खास
खेल नीति 2026 'स्काउट, फैसिलिटेट एंड रिकॉग्नाइज' के मूल उद्देश्य पर आधारित है। यह नीति स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक प्रतिभाओं को पहचानने, निखारने और पुरस्कृत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। अधिकारियों के अनुसार, नीति को अंतिम रूप देने से पहले पिछले दो महीनों में एथलीटों, उनके परिवारों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श किया गया। इस प्रक्रिया में खिलाड़ियों ने उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने की वित्तीय कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया था।
मासिक छात्रवृत्ति की संरचना
नीति के अंतर्गत 12 महीने की मासिक छात्रवृत्ति उन खिलाड़ियों को दी जाएगी जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य-स्तरीय, नेशनल स्कूल गेम्स या खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में पदक जीते हों। छात्रवृत्ति की दरें इस प्रकार हैं: अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक पर ₹1 लाख प्रति माह, राष्ट्रीय स्वर्ण पदक पर ₹75,000 प्रति माह, और राज्य-स्तरीय स्वर्ण पदक पर ₹10,000 प्रति माह। रजत और कांस्य पदक विजेताओं को भी अलग-अलग दरों पर छात्रवृत्ति मिलेगी। उल्लेखनीय बात यह है कि यदि कोई एथलीट उच्च स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतता है, तो उसे स्वतः बेहतर छात्रवृत्ति श्रेणी में स्थानांतरित किया जाएगा — मौजूदा सहायता बाधित नहीं होगी।
एकमुश्त नकद पुरस्कार और एडवेंचर स्पोर्ट्स
मासिक छात्रवृत्ति के अतिरिक्त, प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में पदक जीतने पर ₹5 लाख से ₹1 करोड़ तक के वन-टाइम कैश बोनस की घोषणा की गई है। एडवेंचर स्पोर्ट्स को भी इस नीति में स्थान मिला है — लद्दाख के वे पर्वतारोही जो विश्व में कहीं भी 8,000 मीटर से अधिक ऊँची चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करते हैं, उन्हें ₹10 लाख का एकमुश्त नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह प्रावधान लद्दाख की विशिष्ट भौगोलिक पहचान और पर्वतारोहण परंपरा को मान्यता देता है।
पैरा एथलीटों के लिए विशेष प्रावधान
नीति में दिव्यांग खिलाड़ियों को भी समान महत्व दिया गया है। पैरालंपिक गेम्स, पैरा एशियन गेम्स, पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स, नेशनल पैरा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप के साथ-साथ दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित और स्पेशल ओलंपिक्स श्रेणी के एथलीटों के लिए विशेष नकद पुरस्कारों की व्यवस्था की गई है। यह समावेशी दृष्टिकोण नीति को केवल अभिजात वर्ग के खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रखता।
उपराज्यपाल का दृष्टिकोण और आगे की राह
उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने इस नीति को लद्दाख प्रशासन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य एक जीवंत और आत्मनिर्भर खेल समुदाय का निर्माण करना है, जहाँ युवा एथलीट वित्तीय चिंताओं से मुक्त होकर खेल को करियर के रूप में अपना सकें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लद्दाख के किसी खिलाड़ी का जीता प्रत्येक पदक पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेलो इंडिया कार्यक्रम की भावना के अनुरूप है, जो जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में इस नीति के क्रियान्वयन की निगरानी और एथलीटों तक इसका लाभ पहुँचाना लद्दाख प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।